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दशहरे के दिन तलाकशुदा औरत की प्यास बुझाई

Hindi xxx Story हेलो दोस्तों,,,,  मेरा नाम दिलावर है। कानपुर की एक छोटी बस्ती में रहता हूँ। indiansexkahani.com काफी गरीब बस्ती है ये। गंदगी भी बहुत है यहाँ पर क्या करे किसी तरह जिन्दगी तो काटनी ही है। मेरे घर के पास एक लड़की रहती थी। उसका नाम गुड्डी था। वो देखने में ठीक ठाक थी। बहुत सुंदर तो नही थी पर बहुत खराब भी नही थी। उसकी शादी से पहले मैं उसे लाइन दिया करता था। पर “मैं जो भी करूंगी अपने पति के साथ करूंगी। पहले मुझसे शादी करो फिर मेरी चुदाई करो” वो हर बार कहती थी। इस वजह से मेरी उससे दोस्ती नही हो पायी थी। मैंने 2 -4 बार चुम्मा लिया था उसका। फिर उसकी शादी हो गई थी।
पर गुड्डी की ससुराल में सब कुछ ठीक नही था। आये दिन उसका पति शराब पीता, जुआ खेलता और सारा पैसा उड़ा देता। शाम को आकर रोज गुड्डी के साथ मारपीट करता। इसलिए गुड्डी से अपने पति को तलाक दे दिया। अब गुड्डी फिर से अपने मायके चली आई। मैंने उसे सुबह सुबह सरकारी नल पर पानी भरते हुए देखा तो मेरी गुड्डी से मुलाकात हो गयी। उसने ही मुझे सब कुछ बताया। मैं उसे सेक्सी नजरो से देख रहा था। 2 साल तक गुड्डी ससुराल में रह कर आई थी। यानी 2 साल उसकी चुदाई भी हुई होगी। मैंने उससे दोस्ती करने लगा। अभी उसके बच्चे भी नही हुए थे। मेरा उसे चोदने का मन था। मैं काम पर लग गया। उसे लाइन देने लगा। हमारी बस्ती में पानी की बड़ी समस्या थी। सिर्फ एक सरकारी नल था और पानी भरने वाले हजारो। मैं सुबह 5 बजे ही जग जाता और गुड्डी के लिए 8- 10 बाल्टी भर देता। उसे उठाकर उसके घर ही रख देता। शाम को मैं उसके साथ सब्जी लेने बजार जाता। खूब बात करता उससे। आप यह स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है। 

“गुड्डी!! माना तेरा पति शराबी था, जुआरी था पर रात में मजा तो देता होगा??” मैंने उससे पूछा
“हाँ” गुड्डी शरमाकर बोलती
“कितने देर चुदाई करता था???” मैंने पूछता
“क्या मतलब???” वो कहती
“मतलब की कितने देर में झड़ता था” मैं पूछता
“5 -6 मिनट में” वो जवाब देती
“बस… इतनी कम देर। मेरे साथ खेलो तो पूरे आधा घंटा मजा दूँ” मैंने कहता
“धत्त!!” गुड्डी बोलती
मैं उससे खूब मजाक करता। कुछ दिनों बाद दशहरा का त्योहार आ गया। मैंने गुड्डी को रावण दहन दिखाने ले गया। वहाँ पर बहुत मजा आया। गुड्डी मेरे पास ही बैठी थी। भीड़ बहुत थी। खूब मम्मे दबाये मैंने। उसके ब्लाउस पर खूब हाथ घुमाया। खूब मजा लूटा। गुड्डी ने कुछ नही कहा। कुछ देर बाद रावण को आग जला हुआ बाण मारा गया। रावण दगने लगा। उसमे खूब पटाखे लगे हुए थे जो दब रहे थे। गुड्डी खूब मजा ले रही थी। उसने अच्छी सी लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी। मैंने उसके आंचल के अंदर हाथ डाल दिया और उसके 34” के मम्मे खूब दबाए। गुड्डी गर्म हो गयी। चुदने को गर्म हो गयी। खूब मजा लूटा मैंने। रावण पूरी तरह से दग गया। मैंने गुड्डी के साथ हाथ में हाथ डालकर घर की तरह पैदल पैदल आने लगा।
“गुड्डी दे दे आज???” मैंने पैदल चलते चलते कहा
“क्या???” वो बोली। जो मेरा इरादा समझ रही थी पर फिर भी अनजान बन रही थी।
“चूत!!” मैंने कहा
“नही….नही” गुड्डी बोली
आज तो मुझे तेरी रसीली चूत चोदनी है। आज कोई बहाना नही चलेगा” मैंने कहा

हमारा घर आ गया। मेरे घर पर कोई नही था। मैंने गुड्डी का हाथ पकड़ लिया और अपने घर में ले आया।
“दिलावर!! मुझे बाद में चोद लेना। मेरी बूढी माँ मेरा इन्तजार कर रही होगी। छोड़ो मुझे” गुड्डी बोली
“2 मिनट में चुदाई हो जाती है। बस कुछ देर लगेगा” मैंने कहा और उसे तखत पर लिटा दिया। गुड्डी के उपर मैं लेट गया और गालों पर चुम्मा देने लगा। वो भी राजी हो गयी। उसके गाल को मैंने कई बात दांत से काट लिया। वो चिहुक गयी। फिर मैं उसके गले और आंखों पर किस करने लगा। गुड्डी गर्म होने लगी। उसने छोटी बांध रखी थी और लाल रंग की साड़ी पहन रखी थी। उसका ब्लाउस बहुत कसा था। उसके गोल गोल दूध मुझे आकर्षित कर रहे थे। मैंने उसके मम्मे पर हाथ रख दिया और सहलाने लगा। ये कहानी आप इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसके गले पर मैं खूब किस किया। कानो को दांत से पकड़कर चबा लिया। अंत में अपने होठ उसके होठो पर रख दिए और गरमा गर्म चुबन लेने लगा। असल में मैं उसके होठो को चबा और खा रहा था। गुड्डी मेरा साथ निभा रही थी। बाहर से वो नही नही नही कर रही थी पर अंदर से चुदने का मन था उसका। मैंने साली को 15 मिनट तक उसके होठ चूस लिए। पूरा रस पी गया। मेरा लंड मेरी पेंट में टनटना गया और खड़ा होकर पत्थर जैसा हो गया। अब मुझे जल्दी से अपनी गर्लफ्रेंड गुड्डी को चोद लेना था। मैं इतना जोश में आ गया की खुद ही उसके लाल रंग के ब्लाउस की बटन खोलने लगा। गुड्डी मेरा पूरा साथ दे रही थी। कही से कोई विरोध नही कर रही थी। मैं उसके ब्लाउस को खोल दिया।
ब्रा उतार कर किनारे बिस्तर पर रख दी। गुड्डी के कसे कसे दूध देखे तो मौज आ गयी। ओह्ह भगवान !! क्या पटाखा माल है ये। दोस्तों कसी कसी 34” की रसीली चूचियां थी उसकी। बिलकुल तनी हुई। मैं दोनों मम्मो पर हाथ घुमाने लगा। वो “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” करने लगी। मैं सहलाने लगा। गुड्डी से आँखें शर्म से बंद कर ली। मैं उसके दर्शन करने लगा। उफ्फ्फ!! क्या नशीली दुधिया छाती थी। जिस तरह से किसी भैस के थन दूध से भरे हुए दिखाई देते है, ठीक उसी तरह से गुड्डी के थन दूध से भरे दिख रही थी। मेरा लंड खड़ा हो गया उसकी जवानी देखकर। मैंने उसके मम्मो को हाथ से  दबाना शुरू कर दिया। दोस्तों आपको कैसे बताऊं मजा आ गया जिन्दगी का। आप यह स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है। 

मैं अब उसके कबूतरों को जोर जोर से दबा रहा था। गुड्डी भी भरपूर मजा ले रही थी और “……अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की सेक्सी आवाजे निकाल रही थी। येतो अच्छा हुआ की मेरी फैमिली दशहरा देखने चली गयी थी। मैं आराम से आज अपनी गर्लफ्रेंड को चोद सकता था। मैं मस्ती से गुड्डी के आमो को दबा रहा था। उसकी जवानी का मजा लूट रहा था। फिर लेटकर उसके दूध मुंह में लेकर चूसने लगा। गुड्डी के आम बहुत रसीले थे। सफ़ेद संगमर्मर जैसे छातियों के उपर काले काले गोले तो मेरी जान ही निकाल रहे थे। कितनी खूबसूरत थी गुड्डी अंदर से।
दोस्तों मैं आज अपने सारे अरमान पूरे कर लिए। आधे घंटे तक उसके कबूतरों को मुंह में लेकर रस चूसता रहा। पीता रहा। खूब मजा ले लिया। गुड्डी पूरी तरह से गर्म हो गयी। “…..ही ही ही……अ अ अ अ .अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह….. उ उ उ…” की कामूक आवाजे निकालने लगी। खूब मजा ले लिया मैंने। मैंने उसकी साड़ी उतारी नही। सिर्फ उपर उठा दी। गुड्डी से लाल साड़ी से मैच करती लाल रंग की चड्ढी पहनी हुई थी। आधे घंटे से जो मैं उसे प्यार कर रहा था उसकी वजह से वो पूरी तरह से गर्म हो गयी वो पूरी तरह से गर्म हो गयी थी। उसकी चड्डी में उसकी चूत का ताजा रस लग चुका था। चड्डी पानी पानी हो गयी थी। मैंने कुछ देर चड्डी के उपर से उसकी सेक्सी चूत चाटी और पी ली। गुड्डी पागल हुई जा रही थी। वो अब चुदना चाहती थी।  आप यह स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है। 
“दिलावर!! चोदना है तो चोद ले पर मुझे और मत तड़पाओ” गुड्डी बोली
मैंने उसकी लाल रंग की पेंटी में ऊँगली डाल दी और उपर को खींचने लगा। धीरे धीरे उसकी चड्डी उपर निकलने लगी। सफ़ेद गोरी गोरी जांघो को दर्शन हुए तो जिन्दगी सफल हो गयी। गुड्डी के घुटनों में चड्ढी अटक गयी। मैं हाथ घुमाकर उतार दी। उसने खुद हो अपने दोनों पैर खोल दिए। पानी से भीगी हुई चूत के दर्शन मुझे हो रहे थे। गुड्डी बांवली हुई जा रही थी। मैं लेटकर उसकी चूत का रस पीने लगा। वो “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…” करने लगी। कितना नमकीन पानी था उसके भोसड़े का। मैंने मजे लेकर खूब पीया। खूब जिन्दगी का मजा लिया। गुड्डी अपनी गांड बार बार उठा रही थी। अपना पेट उठा रही थी। मैं जीभ से उसकी चूत का सब रस पी रहा था। मजा लूट रहा था। गुड्डी सिसक सिसक कर आहे ले रही थी। उसकी साँसे तनी जा रही थी। दोस्तों 15 मिनट उसकी चूत पी मैंने। खूब मजा आया। फिर मैंने अपना शर्ट पेंट उतार दिया।

निकर निकाल दिया। लंड उसकी चूत पर रखा और धक्का मारा। मेरा लंड 6” लम्बा था पर पहली बार में सिर्फ 4” अंदर गया। कई महीनो से गुड्डी चुदी नही थी इसलिए चूत बंद हो गयी थी। मैंने दुसरा धक्का जोर से दिया। इस बार पूरा 5” लंड उसकी चूत को फाड़कर अंदर घुस गया। वो “….आआआआअह्हह्हह… अई…..अई….ईईईईईईई मर गयी…मर गयी….मर गयी….मैं तो आजजजजज!!” बोलकर चिल्लाने लगी।
मैं उसे चोदना शुरू कर दिया। धीरे धीरे उसे पेलने लगा। गुड्डी से अपनी आँखें बंद कर ली। सेक्सी लग रही थी। मैंने लेटकर उसकी चूत लेने लगा। खूब चोदा साली को। उसकी आँखों पर चुम्मी ले लेकर उसकी चूत चोदी मैंने। गुड्डी 10 मिनट बाद मस्त हो गयी। अब उसकी चूत का छेद अच्छे से खुल गया था। मैं अपनी गांड उठा उठाकर उसे पेल रहा था। गुड्डी की हड्डियाँ चटख रही थी। चुद रही थी कमीनी। मैं उसे चूत को बजा रहा था। बड़ी मीठी और नशीली रगड़ थी वो। मेरा लंड जड़ तक उसके भोसड़े को फाड़ रहा था। उफ्फ्फ!! इतना सेक्सी अहसास था। मैं खिलवाड़ करता और चोदते चोदते रुक जाता और लंड को अंदर ही रहने देता। गुड्डी के दूध मुंह में लेकर चूसने लग जाता। दोस्तों जिन्दगी का असली मजा मुझे आज आ रहा था।  आप यह स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है। 
गुड्डी की सासें की तेजी, उसकी आहे और जोर जोर से चिल्लाने और सिसकने की आवाज मुझे जोश दिला रही थी। और अधिक चोदने को कह रही थी। मैं उसे भरपूर मजा दे रहा था। मेरा 6” लम्बा और 3” मोटा लंड उसकी चूत का भरता बना रहा था। दशहरे के दिन तो मजा आ गया था दोस्तों। खूब चोदा मैंने अपनी गर्लफ्रेंड गुड्डी को। अंत में तेज धक्के मारते मारते मैं चूत के अंदर ही झड़ गया।DMCA.com Protection Status

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