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ननदोई के साथ दिन में चुदाई वाली रासलीला

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Hindi Sex Kahani मेरा नाम विद्या है। मैं गाजीपुर की रहने वाली हूँ। मेरी शादी हो चुकी है। मैं 29 साल की जवान और सेक्सी औरत हूँ। अभी मेरे बच्चे नही हुए है। मेरे पति मुझे बहुत प्यार करते है। मेरी सेक्स लाइफ बहुत अच्छी है। पति रात में मुझे भरपूर प्यार देते है। मुझे चुदना बहुत पसंद है। मैं आम औरतों की तरह सुबह उठकर टहलने नही जाती हूँ और ना ही जिम जाने का मौका मिलता है। बस मैं सेक्स करके अपने आपको ताजा और तंदुरुस्त रखती हूँ। रोज मैं चुदाई के मजे लेती हूँ और वही वजह है की मैं मोटी नही हुई हूँ।
मैं पतली दुबली हूँ। मेरे पति यही गाजीपुर में जॉब करते है। वो पोस्ट मास्टर है। मेरे पति ने मेरे ननदोई की जॉब भी पोस्ट ऑफिस में डाकिया के रूप में लगवा दी है। सरकारी नौकरी है इसलिए पैसे अच्छे मिल जाते है। मैं अपने पति के साथ किराए के मकान में रह रही हूँ। मेरी नन्द और ननदोई भी साथ रह रही है इसी मकान में। मेरी ननद का नाम माधवी है। मेरे पति ने अपने पैसे लगाकर माधवी की शादी की है क्यूंकि मेरे ससुर जी पहले ही खत्म हो गये थे। मेरे ननदोई इस बात का बड़ा अहसान मानते है। मेरे पति से 10 लाख रुपये कैश दहेज़ में दिया था। उसी पैसे को घूस में देकर ननदोई जी की सरकारी नौकरी लगवा दी है।
मैं अपने ननदोई से चुद गयी हूँ। कैसे?? आपको सब बता रही हूँ। 6 महीने पहले की बात है मेरे ननदोई ने अपने ऑफिस में किसी से 10 हजार रूपए की घूस ले ली थी। इसलिए वो सस्पेंड हो गये और अब घर पर रहने लगे थे। मेरे पति सुबह नौकरी पर चले जाते और नन्द माधवी पास के स्कूल में टीचर हो गयी थी। वो रोज पढ़ाने जाती थी।

पहले तो घर में मैं सिर्फ पेटीकोट ब्लाउस में रहती थी क्यूंकि एक तो गर्मी इतनी होती है। साड़ी पहनकर काम नही हो पाता है। पर अब मेरे ननदोई घर में रहते थे इसलिए मुझे साड़ी ब्लाउस पहनकर काम करना पड़ता था। दोपहर में मुझे चुदने का बड़ा दिल करता था। पर पति तो ऑफिस में रहते थे। बार बार नजरो के सामने ननदोई आ जाते तो मेरी नियत खराब हो जाती। कभी कभी मन करता की काश अगर दोपहर में ये मुझे चोद लिया करे तो कितना मजा मिले। दोपहर में ननदोई और रात में पति का अलग अलग वैराइटा का लंड खाने को मिलने लगे तो किस्मत ही चमक जाए। मैं सोचती रहती थी।
एक दिन मेरे ननदोई (जिनका नाम करन है) अचानक से बेहोश हो गये। उनको हार्ट में कुछ दिक्कत हो रही थी। सीने में दर्द हो रहा था और साँस नही ले पा रही थी। मैं डर गयी की कहीं ऐसा वैसा कुछ न हो जाए। मैंने उनको बिस्तर पर लिटा दिया और मत्थे पर गीली पट्टी लगाने लगी। जब देखा की उनको साँस नही आ रही है तो मैंने लम्बी साँस खींची और ननदोई के मुंह को खोलकर अपना मुंह रखा और जोर से ऑक्सीजन दी। इस तरह मैंने 10 मिनट किया। फिर उनको होश आ गया था। वो उठ कर बैठ गए तो मैंने उनकी पीठ पर हाथ से सहलाने लगी।
“आप ठीक तो है??” मैंने परेशान होकर पूछा
वो कुछ देर तक लम्बी लम्बी साँस खींचते रहे। फिर सही हो गये। मुझे अजीब नजरों से देख रहे थे।
“सरहज जी!! अगर आप मुझे ऑक्सीजन नही देती तो शायद मैं मर गया होता। आपके होठ तो बड़े मीठे है” वो बोल पड़े
 कभी सोचा नही था की अपने ननदोई के होठो को चूसूंगी। पर आज ये सब अचानक से हो गया। मैं थोड़ी शर्म कर रही थी। पर ननदोई मुझे घूर घूर के देख रहे थे।
“ऐसे आप क्या देख रहे है???” मैंने हसंकर पूछा
“यही की आप जितनी सुंदर हो उतनी होशियार भी। आपने शादी करके टिंकू (मेरे पति) की लाइफ बन गयी। सच में वो बहुत किस्मत वाला है। मुझे अगर आपके जैसी बीबी मिल जाती तो मजा आ जाता” ननदोई जी बोले और मेरे हाथ पर रख दिया।
“ये आप क्या कर रहे है???” मैंने पूछा
“आपने मेरी जान बचाई है। मैं भी आपकी सेवा करना चाहता हूँ” वो बोले और मेरे हाथ में उठाकर किस करने लगे।
वो मुझे चोदना चाहते थे मैं जान गयी थी। वो मेरी तरह दूसरी नजरो से देख रहे थे। बार बार मेरे जिस्म की तरह देख रहे थे। मैंने नेट वाली साड़ी और ब्लाउस पहना हुआ था। मेरे ब्लाउस से अंदर की ब्रा साफ साफ दिख रही थी। मैं एक भरे पूरे जिस्म की मालकिन थी। मेरा जिस्म भरा हुआ था। 36 30 32 का सेक्सी फिगर था मेरा। मेरे मम्मे बहुत बड़े बड़े गोल गोल सेक्सी थे। बिलकुल मलाई जैसे दिख रहे थे। आज ननदोई जी मेरे आमो को मुंह में लेकर चूसना चाहते थे। मैं जान गयी थी। वो मेरे हाथो पर चुम्मा देने लगे। उनकी आँखें चमक रही थी।

“देखिये! ये गलत होगा। मैं शादी शुदा औरत हूँ। ये सब ठीक नही” मैंने कहा
“सरहज ही!! कुछ गलत नही है। आप मूजे पसंद करती है। मैं आपको पसंद करता हूँ। मैं आपक जिन्दगी की असली खुसी देना चाहता हूँ” वो बोले और मुझे कन्धो से पकड़ लिया और खुद से चिपकाने लगे।
“नही नही !! ये सब सही नही” मैंने कहा पर अंदर से मेरा उनसे चुदने का बड़ा दिल था।
उन्होंने मुझे गोद में उठा लिया और मेरे बेडरूम में जाने लगे। मैं लगातार मना कर रही थी पर वो नही माने। मुझे मेरे बेडरूम में ले आये और लिटा दिया। मेरे उपर लेट गये और मेरे गाल, गले और होठो पर चुम्मा लेने लगे। मेरे नेट वाले ब्लाउस के उपर से वो मेरे 36” के दूध कस कसके अपने हाथो से दबाने लगे। मैं “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” करने लगी। ननदोई कस कसके मेरी चूचियों को दबा रहे थे और मजे से सहला रहे थे। जब तक मैं कुछ बोल पाती उन्होंने मेरे नेट वाले ब्लाउस को खोल दिया। ब्रा भी उतार दी। मेरे शानदार बूब्स को देखकर वो पागल हो गये और हाथो से कस कसे दबाने लगे। मुझे भी अच्छा लगने लगा। फिर वो मेरी बायीं मुसम्मी को मुंह में लेकर चूसने लगे। मुंह में लेकर जल्दी जल्दी चूसने लगे तो मेरी चूत बिलकुल गीली होने लगी।
मेरी ननद माधवी को आने में अभी 3 घंटे थे। तब तक ननदोई जी मुझे आराम से चोद सकते थे। मैंने अपने बेडरूम में लगी दीवाल घड़ी को देखकर हिसाब लगाया। आज तो ननदोई जी पूरी तरह से पागल हो गये थे। जल्दी जल्दी मेरी बायीं मुसम्मी को चूस रहे थे जैसे मैं उनकी औरत हूँ। मैं बार बार मुंह खोलकर “……अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….”की आवाजे निकाल रही थी क्यूंकि मुझे भी बड़ा आननद आने लगा। उन्होंने आधे घंटे तक मेरी दोनों मुसम्मी चूस डाली। मेरी चूत अपना रस चोदने लगी। वो मेरे मखमली पेट को किस करने लगे। दांत से काटने लगे। धीरे धीरे उन्होंने मेरी साड़ी खोल दी। मेरा पेटीकोट उतार दिया। मैंने लाल रंग की सिल्क वाली पेंटी पहनी हुई थी। ननदोई जी से मेरे दोनों पैर खोल दिए और पेंटी के उपर से चूत जल्दी जल्दी चाटने लगे। मेरा रस तो उपर तक पहुच गया था। ननदोई चाट चाटकर मजा ले रहे थे। वो पेंटी के उपर से मेरी भरी हुई चूत को सहला रहे थे। चूत की बीच वाली लाइन पेंटी के उपर से साफ़ साफ दिख रही थी।

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ननदोई जी उसी लाइन पर जल्दी जल्दी जीभ घुमा रहे थे। मैं अब गर्म हो गयी थी और चुदना चाहती थी।
““ननदोई जी !! क्या सिर्फ उपर उपर से मजा लोगे या अंदर का मजा भी लोगे??” मैंने कहा
वो मेरा इशारा समझ गये। उन्होंने मेरी लाल सेक्सी पेंटी को अपने हाथो से उतार दिया और जल्दी जल्दी चूत को पीने लगे। मेरी चूत पर बहुत सारा सफ़ेद मक्खन आ गया था उसे वो जीभ लगाकर चाट गये। उन्होंने अपनी पेंट उतार दी और शर्ट भी उतार दी। कच्छा उतारकर वो नंगे हो गये। जल्दी जल्दी अपने 8” लंड को फेटने लगे। फिर मेरी चूत पर रखकर धक्का दिया। लंड अंदर घुस गया। ननदोई जी मेरे साथ गरमा सेक्स सेक्स करने लगे। मैंने उनको सीने से लगा लिया। “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…”की आवाजे मैं निकाल रही थी। मुझे बड़ा सेक्सी फील हो रहा था। वो जल्दी जल्दी मुझे लंड देने लगे। जल्दी जल्दी मुझे चोद रहे थे। मैं गर्म गर्म आवाजे निकाल रही थी। बहुत मोटा लंड था ननदोई का। चूत की गहराई में जाकर वो प्रहार कर रहे थे जिस्से मेरी प्यास आराम से बुझ रही थी। उनके धक्के अब और जादा गहरे हो रहे थे। वो मुझे बिना कंडोम के ही चोद रहे थे। मैं उनका पूरा साथ निभा रही थी। मजे से चुदवा रही थी। मेरे हाथ की चूचियां छन छन कर रही थी। पायल खन खन कर रही थी। वो लेटकर दोनों बाहों में भरकर मुझे बजा रहे थे। मुझे तो जन्नत का मजा मिल रहा था।

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“आऊ…..आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..” लगातार मैं बोल रही थी। इतना मजा तो मुझे अपने पति (टिंकू) से चुदकर भी नही मिला था। मेरी एक एक हड्डी चटक रही थी। चट चट की आवाज मेरी बदन की हड्डियों से आ रही थी। असली मर्द की पलंग तोड़ चुदाई कैसी होती है ये तो मैंने आज ही जाना था। 18 -20 मिनट बाद तो ननदोई जी इतने तेज तेज धक्के देने लगे किस जिस बेड पर मैं चुद रही थी उसके चारो पावे चर चर की आवाज करने लगे। उसी से पता चल रहा था की मेरी कितनी जबरदस्ती कुटाई उन्होंने की थी। अंत में वो झड़ने वाले थे। मैंने उनको अपने सीने से कस लिया जिससे उनक भरपूर प्यार मिले। हाँफते हाँफते उन्होंने माल मेरी चूत में छोड़ दिया। मैंने उनकी दिलोजान से प्यार किया। खूब चुम्मा मैंने दिया।
“सरहज जी!! बोलो मेरी सेवा आपको कैसी लगी???” वो लम्बी सांस लेकर बोले
मैं भी हांफ रही थी। जितनी ताकत चुदाई में ननदोई जी की खर्च हुई थी उतनी मेरी भीहुई थी।
“आपने तो आज मुझे रंडी बना दिया” मैंने कहा और उसके गाल पर पप्पी देने लगी
“सरहज जी!! अगर रंडी बनने में खूब मजा मिलता है तो आपको बन जाना चाहिए” वो बोले
कुछ देर बाद उन्होंने मुझे अपने लंड पर बिठा लिया और सेक्स करने को कहा। मुझे भी अब आनन्द आने लगा था तो मैं भी सेक्स करने लगे। चूत में लंड को डालकर मैं उछल उछल कर चुदवाने लगी। मैं अपनी कमर को गोल गोल घुमा रही थी जिससे ननदोई जी को बड़ा मीठा अहसास हो रहा था। फिर मेरी कमर अपने आप उनके लंड पर नाचने लगी। मेरे हाथ की उँगलियों में उन्होंने अपनी उंगलियाँ फसा दी और मेरी कमर को उपर की तरह उठा उठाकर सेक्स करने लगे।

खूब मनोरंजन हुआ दोस्तों। अपने लंड पर बिठाकर ननदोई से करीब 1 घंटे मजा लिया। मैंने उनके दोनों कन्धे पकड़कर जल्दी जल्दी नीचे की तरफ फटके मारे। अंत में वो मेरी चुद्दी में ही झड़ गये। मैंने उनके उपर ही गिर गयी। वो मेरे गाल को दांत से काटने लगे। मूझे होठो पर किस करने लगे। अब जब मौक़ा मिलता है मैं ननदोई से चुदवा लेती हूँ। कहानी आपको कैसे लगी, अपनी कमेंट्स इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर जरुर दे।

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