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पड़ोस की औरत को वीर्यदान करके बना कुवारा बाप

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sexy stories मेरा नाम लोहा सिंह है। बरेली का रहने वाला हूँ। मेरे नाम की तरह मेरा 8” का लंड भी बिलकुल लोहे की तरह है। मैं 7 फुट लम्बा हूँ और जवान मर्द हूँ। मेरा शरीर चुस्त और पूरी तरह से फिट है और बिलकुल लोहे की तरह मजबूत है। जवान लडकियाँ मुझे देखकर लाइन मारती है। मुझे लड़कियों के दूध चूसना बहुत अच्छा लगता है। उनकी बुर पीना और चाटना भी मुझे पसंद है। मुझे नई नई चूत को चोदना में बहुत ही आनन्द प्राप्त होता है। मुझे लड़कियों के गुलाबी होंठ बहुत अच्छा लगता हैं। आज आपको अपनी स्टोरी सुना रहा हूँ। दोस्तों मैं एक किराना दूकान चलाता हूँ। उपर वाले की दया से मेरी दूकान अच्छी चल रही है और मुनाफा भी अच्छा हो रहा है। मेरी कालोनी में एक मस्त जवान औरत रहती थी गीता।
वो अक्सर मेरी दूकान पर राशन, चाय, चीनी, चाय पत्ती लेने आती थी। धीरे धीरे मेरी उससे काफी दोस्ती हो गयी। वो मुझे लोहा भैया कहकर बुलाती थी। गीता काफी सुंदर और सेक्सी औरत थी। वो शादी शुदा औरत थी। वो साड़ी ब्लाउस ही पहनती थी। कभी कभी सलवार सूट पहन लेती थी। उसके 38” के दूध गोल गोल और बहुत ही रसीले थे। उसे देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता था। उसे चोदने का बड़ा मन था मेरा। उसे मैं डिस्काऊंट देता था। खूब सस्ता सामान देता था जिससे गीता मेरी दूकान पर रोज आती रहे। दोस्तों उसे एक नजर देख लेने से मेरा मूड अच्छा बन जाता था। वो काफी गोरी चिट्टी औरत थी। उम्र 30 के आसपास थी। वो काफी सुंदर सुशील औरत थी। मुझे तो उसके पति से जलन होती थी। साला कितनी मस्त बीबी चोदने केलिए पा गया। भाई इसे कहते है किस्मत। मैं गीता को सोच सोचकर अनेकों बार मुठ मार चुका था। मैं अभी कुवारा लड़का था। उम्र सिर्फ 25 साल थी। मुझे शादी के लिए कोई अच्छी लड़की नही मिल रही थी। मैं चूत लेने के लिए परेशान था। चूत मारने की अब मेरी उम्र हो गयी थी। रात में मुझे नींद नही आती थी। बस गीता का खयाल हर वक्त आता था। वो मेरी कालोनी में ही रहती थी। एक दिन वो मेरी दूकान पर सुबह सुबह आ गयी। उसके सिर पर चोट के निशान थे। मैं उसे बहन कहकर बुलाता था।

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“अरे बहन!! ये तुम्हारे सिर पर चोट कैसे लगी???” मैंने परेशान होकर पूछा
मेरी पड़ोसन गीता रोने लगी।
“लोहा भैया! कल रात में मेरे पति ने मुझे बहुत पीटा। मेरी शादी को 7 साल हो गया है। पति बोल रहे थे की अगर मुझे 1 साल में बच्चा नही हुआ तो वो मुझे तलाक दे देगे और दूसरी शादी कर लेंगे। अब बताओ भैया अगर उन्होंने मुझे घर से निकाल दिया तो मैं कहाँ जाऊँगी??” गीता आँशु बहाती हुई बोली
मुझे उसके पति पर बहुत गुस्सा आया। साले का सिर फोड़ दूँ यही दिल कर रहा था।
“बहन मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ” मैंने गीता से कहा
“कैसे???” वो हैरान होकर बोली
“गीता!! बुरा मत मानना। मेरे साथ तुम सम्भोग कर लो। अगर तुम पेट से ना हुई तो कहना” मैंने कहा
गीता सायद बुरा मान गई। वो कुछ नही बोली और सामान लेकर चली गयी। पर 1 हफ्ते बाद उसके पति ने उसे फिर से पीटा। अगले दिन दोपहर में वो मेरी दूकान पर आ गयी। इस बार भी वो रो रही थी। ये कहानी आप इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।
“लोहा भैया !! अब तुम ही मुझे बच्चा दे दो वरना मेरे ससुराल वाले मुझे घर से निकाल देंगे” गीता धीरे से बोली
“गीता बहन! मैं तुमको बच्चा जरुर दूंगा। मेरे वीर्य में बहुत पावर है। एक बाद मेरी वीर्य तुम्हारी बच्चेदाने में चला गया तो समझ तो बच्चा पक्का है” मैंने कहा और गीता को अंदर बुला लिया। घर में सिर्फ मेरी मम्मी थी जो कुछ देख नही पाती थी। उनको मोतियाबिंद था। मैंने दूकान का शटर गिरा दिया। गीता को फर्स्ट फ्लोर पर ले गया। यही मेरा आलिशान बेडरूम था। गर्मी बहुत थी। मैंने ac चला दिया। गीता को मैंने फ्रिज से ठंडा पानी दिया। वो जब पानी पीने लगी तो उसके गले का कौवा नीचे उपर हो रहा था। वो सेक्सी लग रही थी। अभी भी उसके सिर पर चोट का निशान था। उसके पति से उससे पीटा था क्यूंकि गीता को बच्चा नही हो रहा था।
कुछ देर बाद मैंने गीता को बिस्तर पर बुला लिया। इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम

“आओ बहन… मैंने कहा
“प्लीस मुझे बहन मत कहो। क्या तुम बहनचोद हो???” गीता बोली और हम दोनों फिर हँसने लगे। अब वो अच्छी लग रही थी। मेरी नजर उसके भरे हुए जिस्म पर थी। अब उसका मूड अच्छा था। मुझे इस बात की खुसी थी।
“आज से तुम मेरी गीता रानी हो” मैंने कहा
“ये अच्छा है। तुम मुझे गीता रानी बोलो” गीता ने हंसकर कहा
मैंने देर नही की। उसे बाँहों में भर लिया। ओह्ह कितने दिनों बाद आज मुझे मस्त चूत चोदने को मिल रही है। दोस्तों गीता बिलकुल जवान माल थी। मुझे तो आलिया जैसी लग रही थी। हम प्यार करने लगे। वो मुझे किस करने लगी। मैं उसे गुलाबी होंठ चूसने लगा। आज मुझे उसको अच्छे से चोदना होगा। उसे बच्चा देना बहुत जरूरी है। मैंने सोचा। मैंने उसे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया। उसकी साड़ी का पल्लू मैंने हटा दिया। उसके ब्लाउस से उसके ठोस दूध मुझे साफ साफ दिख रहे थे और अपने करीब बुला रहे थे। मैंने जल्दी जल्दी उसके दूध पर हाथ लगाने लगा। मैंने सहलाना शुरू कर दिया। गीता “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” करने लगी।
काफी देर तक मैंने उसके ब्लाउस के उपर से उसके दूध सहलाये। गीता गर्म होने लगी।
“लोहा सिंह आओ मेरे दूध चूस लो” गीता बोली
इस बार उसने मुझे भाई नही बोला क्यूंकि अगर वो बोल देती तो बहन की लौड़ी बन जाती। मैंने उसके ब्लाउस की बटन एक एक करके खोलना शुरू कर दिया। ब्लौस निकाल दिया। अंदर उसके 38” के मम्मे सफ़ेद कॉटन ब्रा में कैद थे। गीता ने अपने हाथ पीछे किये और ब्रा का हुक खोल कर आजाद किया। उनकी नंगी चूचियां मेरे सामने आई तो मैं हक्का बक्का रह गया। कितनी रसीली चूचियां थी दोस्तों। कुदरत का ख़ास नमूना। बड़ी बड़ी गोल गोल सफ़ेद संगमर्मर जैसी चूचियां। और उपर निपल्स के चारो ओर बड़े बड़े भूरे भूरे गोले जो बेहद सेक्सी लग रहे थे। गीता के दूध को मैंने हाथ में ले लिया और सहलाने लगा। वो “……अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” करने लगी। मैं उसकी जवानी देखकर पागल हो गया था। उफनती छातियाँ देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया। अब मुझे उसे कसके चोदना था। मैंने अपने हाथो को उसकी छातियों पर गोल गोल घुमाना शुरू कर दिया। गीता को अच्छा लग रहा था। मैंने दबाना शुरू कर दिया। किसी रबर की गेंद की तरह सॉफ्ट और मुलायम। कितनी रसीली चूचियां थी। ये कहानी आप इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।
“गीता! तुम तो मस्त माल हो। तुम्हारी तो पूजा होनी चाहिए” मैंने कहा
“लोहा सिंह आज तुम मेरी रसीली चूत की पूजा करो और मुझे ऐसा चोदो की मुझे बच्चा हो जाए” गीता बोली
मैं मुंह लगाकर उसकी उफनती छातियों को चूसने लगा। गीता का क्लीवेज बहुत सेक्सी था। उपरवाले से उसे फुर्सत में बैठकर बनाया था। मैं जल्दी जल्दी उसके दूध दबाने लगा। गीता सिसकने लगी। उसे मजा आ रहा था। मैं जल्दी जल्दी उसके मम्मे चूस और पी रहा था। उसकी निपल्स में जल्दी जल्दी अपनी जीभ का किनारा टकरा रहा था।
“अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह….. उ उ उ…करो लोहा सिंह मजा आ रहा है। आज मेरे छलकती चूचियों को पी लो। ले लो मजा मेरी भरी पूरी जवानी का आज” गीता बोली
मैं और तेज तेज उसकी छातियाँ चूसने लगा। चूं चूं की आवाज उसकी निपल्स से आने लगी। गीता की चूत अब गीली होने लगी थी। मैंने काफी देर तक उसकी चूचियां बदल बदल कर पी ली। मजा आ गया। धीरे धीरे मैंने उसकी साड़ी निकाल दी। फिर उसके पेट पर हाथ घुमाने लगा। धीरे से उसके पेटीकोट की डोर मैंने खींच दी। पेटीकोट खुल दिया। उसके साथ उसकी पेंटी भी मैंने उतार दी। गीता पूरी तरह से नंगी मेरे सामने बिस्तर पर पड़ी थी। उसने मेरे लंड को पकड़ लिया और जल्दी जल्दी फेंटने लगी। मुझे मजा आ रहा था।

“गीता आराम से….धीरे धीरे करो” मैंने कहा
अब वो आराम आराम से लंड फेटने लगी। फिर उसने मेरा 8” का मोटा लंड मुंह में लेकर चुसना शुरू कर दिया। उसे इसका टेस्ट अच्छा लग रहा था। वो जल्दी जल्दी चूसने लगी। मुझे सनसनी हो रही थी। गीता तेजी से मेरा लंड फेट रही थी। मुंह में लेकर जल्दी जल्दी चूस रही थी। उसके हाथ गोल गोल घूम रहे थे। उसने 6 मिनट मेरा लंड किसी आइसक्रीम की तरह चूसा। फिर वो लेट गयी।
“आओ लोहा सिंह ….आओ मुझे बच्चा दो” गीता रानी बोली
उसने खुद ही अपने पैर खोल दिए। मैं लेटकर उसकी रसीली चुद्दी चाटने लगा। वो “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…” करने लगी। उसकी चूत में खलबली हो रही थी। मैं जल्दी जल्दी जीभ लगाकर उसकी बुर पी रहा था। गीता अपनी गांड और कमर हिला रही थी। वो पूरी तरह से नंगी थी और सेक्सी औरत लग रही थी। मैं तो उसके चूत के दाने और मूत के छेद को जल्दी जल्दी चाट रहा था। फिर मैंने लंड उसकी चूत में डाल दिया। मैं उसकी ठुकाई शुरू कर दी। गीता ने किसी रांड की तरह अपने पैर उपर हवा में उठा लिए।

“जोर से लोहा सिंह….जोर से मुझे पेलो वरना मुझे बच्चा नही होगा” गीता बोली
मैं और तेज तेज धक्के उसकी भोसड़ी में मारने लगा। गीता चुदने लगी। मेरा लंड उसकी चूत की अच्छी कुटाई कर रहा था। उसकी चूत से चटर पटर की आवाज आ रही थी। उसका पेट मेरे पेट से टकरा रहा था। मेरे हाथ उसकी 38” की गोल गोल चूचियों पर थे। मैं तो जैसे कोई साईकिल चला रहा था। गीता जल्दी जल्दी चुदा रही थी। हम दोनों तेज रफ्तार में गाडी चला रहे थे। मैं तेज रफ्तार में अपनी पड़ोसन में चोद रहा था। आखिर में 15 मिनट का गरमा गर्म सम्भोग हुआ। हम दोनों पसीने में भीग गये थे। कुछ देर मैंने पीछे से उसकी गांड चोदी। कपड़े पहनकर वो अपने घर चली गयी। मैंने उसकी पेंटी उससे गिफ्ट के रूप में मांग ली थी। बार बार इमरान की तरह मैं उसकी लाल रंग की सेक्सी पेंटी की सूंघ रहा था। मैं गीता की रसीली चुद्दी के लिए पागल हो चूका था। 4 बार उसने मेरा साथ सम्भोग किया। 9 महीने बाद उसे एक हट्टा कट्टा लड़का पैदा हो गया।
अब वो बहुत खुश थी। उसके ससुराल वाले अब उसे चाहने लगे थे। मैं गीता को अब भी घर में ले जाकर चोद लेता था। बिना किसी नखड़े के वो मुझे अपनी चूत दे देती थी। अब मैं कुवारा बांप बन चूका था।

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