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बॉय फ्रेंड को गिफ्ट में दिया चूत

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indiansexkahani.com हाय दोस्तों आज मैं आपको अपनी दोस्त सरिता की कहानी सुनाने जा रहा हूं। तो सरिता बाकि लड़कियो की तरह खूबसूरत नही थी लेकिन हा ठसा ठस भरी हुई गांड और मोटे बम्बाट स्तन उसके पर्सनालिटी की शान थे। चेहरा साधारण था और रंग आबनूसी, इसलिये उसे देखकर कालेज में लड़कों का ट्रेफ़िक भी ज्यादाह नही था। स्टूडियस होने की वजह से उसका रुझान मेरी तरफ़ था और हम अक्सर लायब्रेरी, पार्क वगैरह में बैठ कर डिस्कसन कर लिया करते थे। मेरी निगाह दूसरी लड़कियो पर थी लेकिन सरिता को चोदने के बारे मे मेरे मन मे ं कोई वासना नही आयी थी। पर धीरे धीरे मैने महसूस किया कि उसका ध्यान मेरी किताबों पर नहीं मेरे चौड़े सीने और ब्रह्मचारी लौड़े पर ज्यादा था क्योकि अब तक मैने कालेज में जीएफ़ नही बनाई थी और लौंडियो को लेकर बड़ा ही उदासीन रहता था। और एक दिन वो हो गया जिसने हमारे रिश्तों को बदल दिया। लंड की प्यास बूझ गई उस दिन और उसे सुख मिल गया |

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एक दिन हम लाईब्रेरी की गैलरी में बैठ पढ रहे थे कि मैने बगल में बैठी सरिता के कठोर चूंचे की चुभन अपने कंधे पर महसूस करी। मुझे अपने लौड़े मे सुरसुराहट महसूस होने लगी। मैने उसकी जांघ पर हाथ रख दिया और आराम से टेबल के नीचे उसकी जीन्स की जिप पर फ़िसलाते हुए ले गया। उसकी मोटी मोटी जांघें एकदम फ़िसलन भरी थीं पेंसिल जीन्स में काफ़ी ठूंस के भरी हुई थीं। अब उसका हाथ मेरे पिछवाड़े पर टीशर्ट के अंदर रेंग रहा था। मेरी रीढ की हड्डी में झुरझुरी होने लगी थी। मैने उसकी गरम सांसों को महसूस किया जो मेरे कान के बाजू से गुजर रही थीं। शाम सात बजे सेंट्रल लायब्रेरी में कोई नहीं था। मैं उसके चेहरे की बनावट भूल चुका था और मुझे वो भोजपुरी गाना याद आ गया- मुहवा पे डालके चदरिया लहरिया लूट ए राजा

मैने सरिता को किताबो के स्टैक की तरफ़ चलने को बोला। आर्ट्स वाली स्टैक के पास सुनसान जगह थी क्योंकि आर्ट्स वाले लौंड लाईब्रेरी में कम रोड पर ज्यादा छींटाकशी करते पाये जाते हैं। मौका अच्छा था और मेरा दिमाग भी फ़िर चुका था। मैने आलमारी पर की किताबें हटा दीं। सरिता को उठाया और उस रैक पर उसकी मोटी गांड टिका दी। जीन्स खींच कर एक ही झटके में अलग कर दी और पैंटी को झटके से फ़ाड़ डाला। वो सहयोग कर रही थी। अब मेरे सामने उसकी सांवली बुर झांटदार क्षेत्र के बीच गंधाती हुई पिचपिची दिख रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उसे आजतक प्यार न किया है वो खुशी के आंसू बहाती हुई कामरस छोड़ती हुई पेले जाने का इंतजार कर रही थी। प्यारी फ़ुद्दी की कहानी मेरे लंड से लिखी जानी थी और उसका नन्हा नन्हा सुराख मेरे लौड़े की प्रतीक्षा में खुल और बंद हो रहा था। मुझे पता नही था कि चेहरे से साधारण दिखने वाली इस बाला के अंदर का नजारा इतना कामुक और रसभरा होगा। मैं मदहोश हुआ जाता था और लाईब्रेरियन के डर से थोड़ी जल्दी थी नही तो इन पलो को मै अपने आंखों में छुपा लेना चाहता था। और अब बारी थी अपनी प्यारी दोस्त को रांड बनाकर चोदने की और अपने अनुभव हीन लौड़े को एक एक्स्पर्ट चुदक्कड़ बना देने की।

मैने उसके भग को प्यार करने के लिये अपनी उंगलियां मस्तानी फ़ुद्दी के सुराख पर रखीं और हल्का दबाव बनाया। वो मस्ताने लगी और मेरे को बाहो मे भर लिया। अब उसके मोटे स्तन मेरे सीने को रगड़ मार रहे थे। उफ़्फ़ चुदवास का यह पहला नशा मेरी सारी पढाई भुलवा चुका था और चोदने के लिये मेरे लोड़े का सुपाड़ा फ़ूल कर कुप्पा हो चुका था। मैने उसकी फ़ुद्दी की गुलाबी गुलाबी फ़ांक का रस चूसने के लिये अपनी जीभ की नोक सटी सटी दोनो फ़ांकों के बीच फ़िसलानी शुरु कर दी। वाकैई यह सोमरस काबिले तारीफ़ था और चूत अनछुई थी। अब कौन बकचोद इंतजार कर सकता था भला। मैने अपना मोटा लौड़ा सुरंग पर रगड़ा और ढेर सारा थूक अपने मोटू सुपाड़े पर रगड़ उसे फ़िसलन भरा बना लिया। अब बारी आ गयी थी कवारी चूत मे घुसने की। हल्का सा दबाव बनाते हुए मैने उसकी गांड पीछे से पकड़ ली जिससे वह अपनी फ़ुद्दी की पोजिशन न खिसका सके।

 

अब मैने हल्का धक्का दिया और वो मरमराने लगी। प्लीज पेन हो रहा है छोड़ो ना। मैने उसके होटो पर हाथ रख दिया जिससे उसकी आवाज लाईब्रेरियन तक न पहुचे। और एक और हल्का झटका, लंड दो इंच अंदर था। सुपाड़े के सामने चूत की झिल्ली थी। कठोर लंड और कोमल झिल्ली लेकिन लौंडीया के लिये दर्दनाक हिस्सा। मैने उसको अपनी बाहो में जोर से जकडते हुए लंड का एक भरपूर वार चूत पर किया और फ़च फ़च करती खून की धारा लाइब्रेरी के रैक से किताबो को भिगोती नीचे बहने लगी। लंड अब पूरा अंदर था और मेरी स्पीड बढती जा रही थी। मेरा हाथ उसके मुह पर था और अब भी वो गूं गूं की आवाजे निकाल रही थी। धीरे धीरे मैने अपने हाथ की जकड़न ढीली की। उसकी चीख अब सीत्कारियो में बदल गयी थी। मैने लंड का पूरा वार अंदर करना शुरु कर दिया, उसकी टांगों के बीच खड़े होकर चोदने का यह अनोखा अनुभव मुझे काफ़ी मजा दे रहा था। अब पोजिशन बदलनी थी ताकि उसकी फ़ुद्दी का हर भाग मजा ले सके। उसके अंदर का हर कोना मेरे लौड़े को पुकार रहा था। मैने तदबीर बदल दी उसकी योनि की चेहरे को भूल उसे हर कोने से चोद डाला। सब कुछ भूल कर वो मेरी हो गयी और मैने समझ लिया कि वो एक खांटी माल थी। अब मै और वो बीएफ़ जीएफ़ हैं और ऐसी लौंडीया पटाने का फ़ायदा है कि हमे औरो से खतरा नही रहता। तो बेधड़क चुदाई का खेल जारी है हमारा।

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