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संतोषी आंटी के साथ साथ उनकी लड़की के चूत की सेवा की

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Hindi xxx Story हेलो दोस्तों मैं सुदेश आप सभी का इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम में स्वागत करता हूँ।
मेरे घर के पास में संतोषी आंटी रहती थी। उसके पति स्वर्गवासी हो चुके थी। आंटी के एक जवान लड़की मीनू और एक लड़का सौरभ । वो अक्सर दुखी रहती थी और मैं उसके घर बराबर जाया करता था। वैसे तो संतोषी आंटी विधवा थी पर जब सज धजकर तैयार हो जाती हूँ बहुत सुंदर लगती थी। 40 साल की उनकी उम्र थी। जिस्म भरा हुआ था। रंग गोरा था। चेहरे की छवि भी अच्छी थी। दोस्तों बस पूछिए मत। मेरा तो लंड संतोषी आंटी को देखकर खड़ा हो जाता था। धीरे धीरे मैं सोच लिया की उनकी चूत मुझे किसी भी कीमत पर चोदनी है। मैं अपने काम पर लग गया। आये दिन सुबह शाम संतोषी आंटी के घर जाता था। कभी मैं उसकी सब्जियां बजार से ले आता तो कभी उसके उसकी बैंक से पैसे निकाल लाता।

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“बेटे सुदेश! तुम मेरे दोनों बच्चों को ट्यूशन पढ़ा दिया करो” एक दिन संतोषी आंटी ने मुझसे कहा
“ठीक है आंटी” मैंने कहा और मैं अंदर ही अंदर बहुत खुश था। शाम को मैं 4 से 6 दो घंटे उनके बच्चों को ट्युशन देने लगा। मेरा रोज का आना जाना हो गया। धीरे धीरे आंटी मुझसे हंस हंसकर बाते करने लगी। एक दिन बड़ी गर्मी थी और संतोषी आंटी बाथरूम में नहा रही थी। मैं ट्यूशन पढ़ा रहा था। मुझे बड़ी तेज पेसाब लगी। मैंने देखा नही और अचानक बाथरूम में घुस गया। संतोषी आंटी पूरी तरह से नंगी थी और खड़ी होकर नहा रही थी। वो अपनी 38” की गोल गोल कसी कसी चूचियों में साबुन लगा रही थी। जैसे ही मैं अंदर घुसा मैंने आंटी को देखा। “ओह्हह ….!” मेरे मुंह से निकल गया और जैसे ही मैं मुड़ा मेरा पैर ही फिसल गया और मैं अचानक संतोषी आंटी के उपर ही लडखडा गया। उन्होंने मुझे नंगे नंगे ही किसी तरह गिरने से रोका। बाथरूम के फर्श पर चिकनाहट बहुत थी। साबुन पड़ा था। मुझे सम्हालते सम्हालते संतोषी आंटी भी लडखडा गयी।
फिर वो मेरी बाहों में अचानक आ गयी और हम दोनों बाथरूम के फर्श पर कुछ दूर तक लोट गये। अचानक ये सब हो गया। दोस्तों नंगी नंगी संतोषी आंटी को देखकर मेरा लंड उसी वक़्त खड़ा हो गया। आज इस माल को कसके चोद लूँ। मैंने सोचा। वो भी हैरान थी। इधर मैं भी हैरान था। वो मेरी बाहों में नंगी थी। उसका गदराया जिस्म बहुत सेक्सी था। वो जल्दी जल्दी तेज सांसे भर रही थी। शायद वो घबराई हुई थी। वो नीचे थी मैं उनके उपर था। फिर मैंने वक़्त की पुकार को सुन लिया और झुककर संतोषी आंटी के होठो को पीने लगा। हालात ऐसे बन चुके थे की वो भी खुद को कंट्रोल नही कर सकी। वो भी मेरे होठ चूसने लगी। और हम दोनों एक दूसरे को ताड़े जा रहे थे और गरमा गर्म चुम्बन लेते जा रहे थे। धीरे धीरे आंटी मुझसे खुल गयी। मैं उसकी साँसों की भीनी भीनी महक ले रहा था। दोस्तों उस दिन हम दोनों ने करीब 15 मिनट तक एक दूसरे को चूसा।
“आंटी दोगी??” मैंने हल्की आवाज में उसके कान में कहा
वो कुछ नही बोली। साफ़ था की आज वो मुझसे चुदने को रेडी थी। मैंने तुरंत अपनी पेंट खोल के निकाल दी और अंदर खूटी पर टांग दी। फिर मैंने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया। संतोषी आंटी का दिल धकर धकर कर रहा था। शायद वो डरी और घबराई हुई थी। किसी भी पल वो इनकार कर सकती थी। मैं किसी भी तरह उनको आज चोदना चाहता था। इससे पहले संतोषी आंटी अपना इरादा बदले मैंने उनके पैर खोल दिए और जल्दी से उसकी गदराई पाव जैसी फूली चूत में अपना 7” का लंड मैंने डाल दिया और चोदना शुरू कर दिया। फिर उनको बाहों में भर लिया। फिर तो दोस्तों ऐश ही ऐश हुई। संतोषी आंटी किसी 18 साल की लौंडिया की तरह “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” करने लगी। मैं जल्दी जल्दी उनके साथ सम्भोग करने लगा। ये कहानी आप इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

धीरे धीरे आंटी मेरे जूनून में शामिल हो गयी। आखिर वो कौन सी औरत होगी तो 7” का लंड खाते समय मजा नही लेगी। दोस्तों मैं जल्दी जल्दी उसकी चूत में लंड की सप्लाई करने लगा। आंटी ने मुझे बाहों में भर लिया और मेरे गाल और गले पर किस करने लगी। धीरे धीरे वो बोतल में उतर रही थी। हम दोनों को चूत में नशीली रगड मिल रही थी। मैं तो बार बार उसकी रसीली बुर की तरफ ही देख रहा था। अब 15 मिनट हो गये थे। आंटी “……अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की कामुक आवाजे निकाल रही थी। वो चुद रही थी। मैं उनको चोद रहा था। फिर मैंने उनको पैर और जादा खोल दिए। जल्दी जल्दी हूँ हूँ… करके मैं आंटी का गेम बजाने लगा।
उनके उपर लेटकर मैं उनको चोद रहा था। उनकी रसीली चूची को मैं मुंह में लेकर पी रहा था। सब काम एक साथ मैं कर रहा था। मेरा लंड तो जैसे झडना जानता ही नही था। मेरी कमर बार बार अंदर जाती। बार बार उपर आ जाती। संतोषी आंटी ने भी कभी नही सोचा होगा की वो 25 साल के एक नौजवान लौंडे से चुद जाएगी। उनकी “…..ही ही ही……अ अ अ अ .अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह….. उ उ उ…” की आवाजे रुकने का नाम नही ले रही थी। धीरे धीरे मैं खल्लास होने वाला था। कुछ और 10 -20 धक्के मैंने तेज तेज संतोषी आंटी के रसीले भोसड़े में मारे और जल्दी से लंड उनकी चूत से निकाल लिया। आंटी ने जल्दी से अपना मुंह खोल दिया। मैं जल्दी जल्दी अपना लंड फेटने लगा। कुछ देर बाद लंड से माल की अनेक पिचकारियां निकली और सारा माल आंटी पी गयी।
फिर उन्होंने मुझे फर्श पर लिटा दिया और जल्दी जल्दी मेरा लंड मुंह में लेकर चूसने लगी। 15 मिनट संतोषी आंटी ने लंड चुसव्व्ल किया। कुछ देर मैंने उसके दूध चूसे। दोस्तों इस तरह संतोषी आंटी मुझसे सेट हो गयी। अब नियम बदल गया। मैं उसके बच्चों को शाम को पढ़ाने जाता। उसकी जवान लड़की मीनू और सौरभ को काम दे देता। फिर संतोषी आंटी मुझे इशारा करके दूसरे कमरे में बुला लेती। उसके बाद मैं अक्सर उनकी साडी और पेटीकोट उठाकर जमकर चूत फाड़ चुदाई करता। अब हम दोनों सेक्स में काफी खुल गये। अब सब कुछ बदल गया। संतोषी आज मुझसे रोज चुदाने लगी। अब तो नियम ही बन गया। मैं बच्चों को काम दे देता और आंटी के कमरे में चला जाता। फिर मैं ही उसके ब्लाउस की बटन खोलता और ब्रा निकालता। उसके बाद आधे आधे घंटे उनके दूध चूसता।

कितनी मस्त मस्त मक्खन जैसी चूची थी संतोषी आंटी की। मैं तो मुंह में ले लेता और काफी काफी देर तक चूसता रहता। आंटी बस “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…” की सेक्सी आवाजे निकलती रहती। वो मुझे प्यार से मेरे बालों में अपने हाथ घुमाती। आंटी का चेहरा बताता की उनको भरपूर मजा आ रहा है। उनकी चूचियां आज भी कसी थी। मैं तो हैरान था ये देखकर। 2 -2 बच्चे हो गये पर अब भी चूचियां कसी कसी। मैं मुंह चला चलाकर जन्नत के मजे लुटता दोस्तों। हम दोनों की जोड़ी जम गयी। धीरे धीरे मैं नये नये रोज बदलकर संतोषी आंटी को चोदने लगा। कभी उसकी गांड के नीचे तकिया लगाकर चूत मारता। कभी लंड पर बिठाकर उनको सवारी करवाता। वो “आऊ…..आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..” की आवाज निकालकर मेरे लंड की सवारी करती और खूब उछलती। लगता की जैसी कोई 18 साल की लड़की चुदा रही थी। मैं बार बार संतोषी आंटी की चूची को मसल देता। वो कराह जाती। इस तरह हम दोनों खूब मजे लुटने लगे। अब तो आंटी रोज अपनी चूत को अच्छे से शेव कर लेती और क्रीम लगाकर चिकनी कर लेती। उसको मेरा लंड चुसना भी बहुत पसंद था। काफी काफी देर तक वो जल्दी जल्दी अपने हाथों से मेरा लंड फेटती और मुंह में लेकर जल्दी जल्दी चूसती। मुझे बड़ा अच्छा लगता। धीरे धीरे मैंने उनकी गांड मारना भी शुरू कर दी। पहले पहले तो आंटी मना कर रही थी। ये कहानी आप इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।
“नही सुदेश बेटा!! मैं गांड नही मरवाउंगी” संतोषी आंटी बोली
“अरे दो ना जानेमन!! प्लीस दो ना जान” मैं कहता और उनको पटा लेता। शुरुवात में मैंने लंड पर तेल लगाकर आंटी की गांड मारना शूरु कर दी। धीरे धीरे वो अभ्यस्त हो गयी और अब तो खुलकर गांड मरवाने लगी। 3 महीने की गांड चोदन के बाद संतोषी आंटी की गांड का छेद 2” चौड़ा हो गया। मैंने अपने मोबाइल से फोटो खीचकर आंटी को छेद दिखाया।
“देखो जान!! तुम्हारी गांड पर मेहनत कर करके मैंने तुम्हारा छेद कितना बड़ा कर दिया। अब तो तुम असली रंडी लग रही हो” मैंने कहा
संतोषी आंटी हँसने लगी। दोस्तों धीरे धीरे उनकी लड़की मीनू को सब पता चल गया।
“सुदेश भैया!! आप मेरी मम्मी से चुपके चुपके कमरे में मिलते जाते हो ना??” एक दिन मीनू ने मुझसे पूछ लिया
“क्या मतलब है तुम्हारा??? साफ़ साफ कहो??” मैंने बहाना मारते हुए कहा
“सुदेश भैया आप मेरी मम्मी को कमरे में जोर जोर से चोदते हो ना??? मैंने सब देख लिया है” मीनू बोली
दोस्तों उसकी बात सुनकर मेरी तो गांड हवा हो गयी।

“देख मीनू!! किसी से इसके बारे में कहना मत। बदनामी होगी” मैंने धीरे से दबी आवाज में कहा
“सुदेश भैया अगर आप मुझसे मम्मी की तरह जोर जोर से चोदो तो मैं किसी से नही बोलूंगी” मीनू बोली
उसके बाद दोस्तों मेरा डर खत्म हो गया। मीनू अपने आप मुझसे पट गयी। उसकी जवानी देखकर मेरा लंड टनटना गया। शाम को मैंने मीनू को अपने घर पर बुला लिया मैथ्स के सवाल पूछने के बहाने। मैं दरवाजा अंदर से बंद कर दिया। फिर मैं उसे बाहों में भर लिया और उसके सेक्सी होठ चूसने लगा। हम दोनों खड़े होकर काफी देर तक गर्म गर्म चुम्बन करते रहे। उसके बाद मैंने मीनू की सलवार उतरवा दी। पेंटी निकलकर कुछ देर उसकी चूत को चाट चाटकर गुलाबी कर दिया। अंत में मैंने मीनू जैसी कच्ची कली को 18 मिनट अपने 7” के लंड से चोदा। फिर उसकी चुद्दी में ही माल गिरा दिया। दोस्तों अब तो मैं अपने लंड से संतोषी आंटी और उनकी बेटी दोनों की चूत की सेवा करता हूँ। भरपूर मजा आता है।

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