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कार सिखाने के बहाने बहन की गांड में लंड रगड़ा

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मेरा नाम लल्लन हे, हम लोग पूरी फेमली (6 मेम्बर्स) फ़ार्म हाउस में रहते हे. मैं छोटा हूँ और मेरी दो बड़ी बहने हे. मुझे दीदी को देख के आँखे सेकने का चस्का लगा हुआ था. अक्सर मैंने अपनी दीदी को कपडे बदलते हुए देखा था. उसकी बड़ी बड़ी चूचियां आराम से 32 इंच की तो होंगी ही. तब मेरी दीदी कोलेज के पहले वर्ष में थी. मेरी बहन के कुल्हे भी एकदम सेक्सी हे. और एक बार मैंने उसे कपडे चेंज करते देखा फिर बार बार उसे देखने का मन भी होने लगा था मेरा. दीदी के नंगे बदन को बाथरूम में याद कर के मैं मुठ मारता था. और मैंने मन ही मन इरादा किया था की मैं अपनी बहन को जरुर चोदुंगा एक दिन! मैंने हमेशा दीदी को हवस से भरी आँखों से देखता था. पर उसे चोदने का कोई मौका मुझे मिल नहीं रहा था. और साला ऐसे में दीदी की मंगनी और फिर मेरेज भी हो गई. साला मेरा सपना और इरादा अभी भी अधुरा था बहन की चुदाई करने का! शादी के कुछ महीनो के बाद मेरे घर से सब लोगों को बहार जाना हुआ. मेरे एक्साम्स थे इसलिए दीदी घर मेरे साथ रहने के लिए आ गयी. घरवाले मुझे और दीदी को एक हफ्ते के लिए छोड़ के चले गए. मैंने अब सोचा की पूरा हफ्ता हे बहन की चूत पाने के लिए.

अगले दिन मोर्निंग में जब मैं बाथरूम में गया तो कपडे नहीं ले के गया. और बहार आया तो अपने बदन के ऊपर सिर्फ एक फटा हुआ तोवेल ही लपेट रखा था मैंने. और इस तोवेल के अन्दर मेरा खड़ा हुआ लंड एकदम आराम से आकार बनाता हुआ देखा जा सकता था. मैंने जानबूझ के फटे हुए हिस्से को लंड के पास ही रखा हुआ था. बहार निकल के मैंने दीदी से कपडे मांगे. जब वो कपडे दे रही थी तो फटे हुए हिस्से से लंड बहार आ निकला. मैंने अपने हाथ से फटाक से उसे ढंक लिया.

जब दीदी ने मेरा निकर मुझे पकड़ाया तो मैंने कहा अरे इसमें तो चींटियाँ हे दीदी. और फिर मैं जूठमूठ की चींटियाँ निकालने लगा. मेरा लंड पूरा तन गया था और वो एरी दीदी के सेक्सी बदन को जैसे सलाम कर रहा था. मेरी बहन ने भी लंड को देख ही लिया था. वो शर्म के मारे वहाँ से चली गई. थोड़ी देर में वो नहाने के लिए बाथरूम में गई. मैंने जानबूझ के दुसरे कमरे में से घर के लेंडलाइन पर कॉल लगाया और दीदी को आवाज दिया कॉल पिक करने के लिए. मेरी बहन जब फ़ोन लेने के लिए आई तो मैंने बाथरूम में जा के उसके कपडे उठा लिए. दीदी फिर से नहाने के लिए आई तो उसने देखा नहीं की वहां कपडे नहीं हे. वो अभी सिर्फ अपनी पेंटी में थी. उसके बड़े बूब्स भीगने की वजह से और कडक और बड़े हो गए थे. अपने ग्रेप्स जैसी निपल्स को दीदी अपनी उँगलियों से साबुन लगा के घिस रही थी. फिर उसने पेंटी के अन्दर अपना हाथ डाल दिया और चूत के ऊपर झाग करने लगी. पेंटी की साइड से दीदी की झांट के दर्शन भी हो रहे थे.

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दीदी के ऊपर गर्मी चढ़ी हुई थी. वो चूत के ऊपर उंगलियाँ घुमा के मदहोश हो रही थी. दीदी के निपल्स के अन्दर भी दूध आ चूका था. उसके बूब्स एकदम कडक हो गए थे. कुछ देर चूत का फिंगरिंग कर के दीदी ने ऊँगली को बहार निकाला. और फिर वो अपनी चूत के कामरस को वो खुद ही चाट गई! दीदी अपने भीगे हुए बदन को पौंछ रही थी और मेरे लंड का मयूर नाचने लगा था. मैं वहां से हट गया क्यूंकि बहन अब नाहा चुकी थी. फिर उसने मुझे बुला के कपडे देने के लिए कहा. मैंने कहा दीदी मुझे आप के कपडे नहीं मिल रहे हे.

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मेरी बहन बोली, अरे मेरे अंदर वाले कपडे पुरे गिले हे, प्लीज़ देखना.

एक मिनिट के बाद मैंने फिर से कहा नहीं मिल रहे हे दीदी आप एक काम करो तोवेल लपेट के आ जाओ. और मेरी बहन ने ऐसा ही किया. तोवेल पतला था और गिला होने की वजह से ट्रांसपेरेंट हो गया था. मैं हवस की निगाहों से अपनी बहन के कामुक बदन को देख रहा था. बहन ने कहा, मेरे कपडे कहाँ हे? मैं अब उसके बूब्स को देख रहा था. वो भी एकदम कडक और बड़े लग रहे थे. मेरी बहन तोवेल में अपने कमरे में गई. पीछे तोवेल में उसकी गांड मस्त मटक रही थी. मैं गांड को देखता हुआ उसके पीछे चल पड़ा. उसने मुझे देखा तो बोली, कहा जा रहे हो तुम? मैंने भी हिम्मत से कह ही दिया, आप ही को देखने आया था!

वो एकदम गुस्से में लाल हो गई और बोली, हरामी मैं बहन हूँ तेरी!

और उसने सन्न कर के एक चांटा मुझे लगा दिया. और फिर उसने मेरा हाथ पकड के कमरे से बहार धक्का लगा दिया. मुझे बड़ी शर्म आ गई और मैं उस से आँखे नहीं मिला पा रहा था.

ऐसे ही दो दिन निकल गए. फिर मेरी बहन मेरे पास आ के बोली, चल मुझे कार चलाना सिखा.

मैंने उस से कहा, नहीं मैं नहीं बताऊंगा आप को.

वो बोली ऐसे कैसे नहीं बताएगा, मैं तेरी दीदी हूँ ना!

अब मेरे ब्रेन में एक अलग ही आइडिया आ गया. इसलिए मैंने कहा ओके मैं सिखाऊंगा आप को कार चलाना.

शाम को मैं अपनी बहन को कार में ले के एक वीरान सी सडक पर चला गया. वहां पर ट्राफिक एकदम कम होता हे. आज मैं आने से पहले अपनी चड्डी को पेंट के निचे से निकाल के ही आया था. मैंने अपनी बहन को सिट पर बिठाया. और मैं साइड की सिट पर बैठ के उसे बोला, चलो चलाओ आप. उसने एकदम स्पीड में गाडी चलाई मैने हेंड ब्रेक का हेंडल खिंच के कार रोक दी. वो एकदम से डर गई थी.

वो बोली, लल्लन मेरे से नहीं हो पायेगा! मैंने कहा ऐसे हिम्मत न हारो दीदी आप फिर से ट्राय करो. फिर भी उसकी स्पीड बढ़ गई और वो बोली, सच में मैं नहीं सिख पाउंगी! मैंने कहा आप इधर आओ. फिर मैंने धीरे से कार चला के उसे दिखाई और बताया की ऐसे करना हे. वो बोली, मेरे से होगा क्या

मैंने कहा एक काम करो, मैं यही बैठा रहता हूँ आप मेरे आगे आ जाओ. मेरी बहन बोली, ठीक हे.

वो मेरी सिट पर आगे बैठ गई. उसकी गांड वाला हिस्सा मेरी तरफ था. मैंने अन्दर चड्डी नहीं पहनी थी इसलिए मेरा लंड का अहसास उसे होने लगा था. उसने पिछे देखा भी लेकिन कुछ बोली नहीं. मैंने अपने लेग्स को वाइड कर के उसके लेग्स को दोनों तरफ से अपने लेग्स के बिच में दबा दिया. फिर मैंने कार को चालु कर दी. और फिर मैं गाडी चलाने लगा. मेरा लंड भी इधर स्टार्ट हो गया था. और वो पेंट में से ही दीदी की एसहोल पर टच होने लगा था. मेरी बहन को भी गांड पर मेरे लंड होने का आभास अब एकदम पक्का हो गया था लेकिन वो बोल भी क्या सकती थी! थोड़ी देर के बाद मैंने उसे कार का स्टीयरिंग व्हील दे दिया और बोला की आप चलाओ अब. और फिर मेरे दोनों हाथों को मैंने बहन की टमी यानी की पेट पर रख दिए और धीरे धीरे से उसे सहलाने लगा.

बहन ने अभी भी गाडी तेज कर दी. और उसने ही ब्रेक भी मारी. मैंने मौका देख के अपने दोनों हाथ से उसके बूब्स पकड़ लिए और दबाये. दीदी एकदम उठ गई धक्के से ब्रेक के, और जब वो वापस बैठी तो उसकी बुर पर मेरा लंड घिस गया. वो बोल रही थी तब मैंने उसकी निपल को मसल दिया. उसके मुहं से अहह की सिसकी निकल गई. अभी भी मेरे लंड की पोजीशन उसके लंड पर ही थी. मैंने एकदम वहसी स्वर में कहा, चलो न घर चलते हे अब! वो मान गई तो मैंने कहा आप ऐसे गोदी में बैठ के ही कार चलाओ. पहले तो वो नहीं मानी लेकिन मैंने बहुत कहा तो वो मान गई.

अब मैं धीरे से अपने हाथ को दीदी की मांसल जांघ पर ले गया. और जांघो को धीरे से मसलने लगा. और साथ ही मैं धीरे से अपने लंड को आगे पीछे करने लगा. मन तो बहुत किया की उसकी बुर को भी टच कर लूँ लेकिन मैंने जल्दबाजी नहीं की. अब मेरी बहन के उपर भी गर्मी चढ़ने लगी थी. घर भी करीब आ गया था. मैंने हिम्मत कर के अपना हाथ उसकी पिगली हुई बुर पर रख दिया. वो सिहर उठी. घर आते ही मैंने ब्रेक मारी. वो उतर के सीधे ही बिना कुछ बोले घर में घुसी. मैं गाडी लगा के आया तो देखा वो बाथरूम में घुस गई थी. मैंने जल्दी से दरवाजे की एक तिराड से अन्दर देखा. उसने अपना पायजामा खोल दिया था और अपनी पेंटी की स्ट्रिप को साइड पर कर दी थी. उसकी एक ऊँगली बुर में डाली हुई थी. और वो एक हाथ से अपने बूब्स मसल रही थी और दुसरे हाथ की ऊँगली से बुर हिला रही थी. एक मिनिट में उसकी बुर से व्हाईट डिस्चार्ज बहार आया जिसे उसने अपनी जबान से चाट लिया.

मैं वहां से हट गया. नाहा के जब मैं उसके कमरे में गया तो वो पलंग में उलटी लेटी हुई थी. उसकी सेक्सी गांड देख के मेरा लंड फिर से टाईट हो गया. मैंने उसके पास लेट के कहा, क्या हुआ दीदी, कार ड्राइव करने में मजा आया की नहीं.

वो स्माइल दे के हाँ बोली.

फिर मैंने बहन को कहा, मैं कुछ कहना चाहता हूँ.

वो बोली, क्या?

तो मैंने कहा, तुम मुझे पसंद हो और मैं एक बार प्यार कर लेना चाहता हूँ.

वो कुछ नहीं बोली और मैंने धीरे से उसकी बड़ी गांड पर हाथ रख दिया. और फिर उसके करीब हो के उसके होंठो के ऊपर चूम लिया. वो सिर्फ आँखे बंध कर के सिसकियाँ भर रही थी. मैंने ग्रीन सिग्नल देख के अपना हाथ उसके बूब्स पर रख दिया. मैं बहन के होंठो को किस करते हुए उसके मांसल मम्मो को दबा रहा था.

मेरी बहन भी फुल सपोर्ट कर रही थी. हम दोनों के बदन तप गए थे सेक्स की गर्मी में. मैंने हाथ ऊपर करवा के बहन के कुर्तेको उतार दिया. अब मैं उसकी जामुन रंग की ब्रा को पकड के उसकी चुंचियां दबाने लगा. फिर मैं उसकी जांघे मसलते हुए पजामे का नाडा भी खोल दिया. मेरी बहन ने अपना पाजामा खुद उतारा. अब वो मेरे सामने अपनी अंडर गारमेंट्स में ही थी और बड़ी हॉट दिख रही थी. मैंने उसे चुमते हुए इन दो कपडे के टुकड़ों को भी उतार फेंका और वो मेरे सामने पूरी न्यूड      हो गई. सच में उसकी नंगी बुर एकदम सेक्सी थी और किसी का भी लंड उसे देख के ही खड़ा हो जाए ऐसा था.  अब मैं भी बिस्तर से खड़ा हो के पूरा न्यूड हो गया. बहन का हाथ पकड़ के मैंने उसे अपना लंड पकडवा दिया. वो मेरे लंड को धीरे से हिला रही थी. मैंने कहा, दीदी इसे अपने मुहं में ले लो ना. वो बोली नहीं ऐसा गन्दा गन्दा मैं नहीं करूँगा!

मैंने कहा लेकिन मैं तो आज आप के साथ सब गंदा करूँगा. ये कह के मैंने उसकी दोनों टांगो को फैला के बुर को देखा. बुर के ऊपर अपने होंठो को लगा के मैं चाटने लगा. दीदी सिस्कारियां लेने लगी. मैं अपने हाथो से उसके बूब्स को दबा रहा था और उसके बुर को एकदम जोर जोर से चाट रहा था. काफी देर तक मैंनेबुर चाटी और फिर अपने लंड को उसके छेद पर लगा दिया. मैंने एक धक्का मारा लेकिन बुर बड़ा टाईट था इसलिए लंड अन्दर नहीं घुसा. वही दीदी की कोल्ड क्रीम पड़ी थी पलंग के पास की मेज पर. मैंने सुपाडे के ऊपर और उसके बुर के धक्कन के ऊपर क्रीम लगा दी. फिर से लंड को बुर पर लगा के धक्का दिया तो आधा सुपाड़ा बहन के बुर में घुस गया. मेरी बहन की बुर की चमड़ी छिल गई और वो दर्द से छटपटा उठी और बोली, अरे बाप रे कितना गरम हे ये तो, निकालो इसे बहार!

मैंने लंड को ऐसे ही पार्क रहने दिया और बहन के दोनों बूब्स को पकड़ के दबाने लगा. कुछ देर में वो लंड की गर्मी से एडजस्ट हो गई और उसकी सिसकियाँ शांत हो गई. मैंने मौका देख के एक और धक्का दे दिया. अब कोल्ड किर्म की वजह से बुर को चीरता हुआ मेरा लंड अन्दर घुस गया.  मेरा पूरा लंड बहन के बुर में घुस चूका था.

मेरी बहन दर्द की वजह से रो पड़ी और चिल्लाने लगी. मैंने उसकी जरा भी परवाह नहीं की और चप चप की आवाज से धक्के देने लगा. कुछ मिनिट की चुदाई के बाद वो शांत हुई और मेरे धक्के ऐसे ही चालु थे.

अब मेरी बहन भी चुदाई में मेरा पूरा साथ दे रही थी. मैं उसके दोनों मम्मो को जोर जोर से दबा रहा था. कुछ ही देर में बहन की बुर में से पानी निकल पड़ा. लेकिन मेरा अभीतक नहीं हुआ था इसलिए मैं उसे चोदता गया. बुर का पानी निकलने के बाद तो मेरा चुदाई का मजा और भी बढ़ गया क्यूंकि वो अब और भी चिकनी जो हो गई थी. मैंने अपनी झडप बढ़ा दी और एकदम जोर जोर से घुटनों का पूरा प्रेशर दे के बहन की बुर को ठोकने लगा. वो जोर जोर से सांसे ले रही थी. मैंने उसके बूब्स को जोर से मसल दिए और उसके होंठो से अपने हहोंठो को लगा दिया. लिप किस करते हुए ही मेरे लंड का पानी भी मेरी बहन की बुर में चूत गया. मेरी बहन ने अपनी दोनों टांगो को मेरी कमर के ऊपर घुमा के लोक कर लिया. और वो भी मेरे साथ ही सेकंड टाइम झड़ गई. मुझे इस मस्त चुदाई के बाद अपनेआप ही नींद आ गई. बहुत दिनों के बाद लंड को शान्ति मिली थी.

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