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भाभी के अनार जैसे बूब्स का मज़ा लिया

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indiansexkahani.com हेल्लो दोस्तों मेरा नाम संदीप है और मैं गुजरात से हूँ. आज मैं आप लोगो को एक और नयी स्टोरी बताने जा रहा हूँ जो मेरी लाइफ की एक सच्ची घटना है. ये कहानी मेरे एक दूर के बड़े भाई की बीवी और मेरी है. मेरा भाई हमारे ही गाँव में रहता है. वैसे तो वो मेरा दूर का भाई है तो हमारी फेमली वगेरह का मिलना कम ही होता है. लेकिन धंधे के सिलसिले में मिलते है क्यूंकि हमारा काम एक जैसा ही है. इस वजह से मैं उस भाई से काफी क्लोज हूँ. मैं महीने में कम से कम 3 -4 बार तो उसके घर जाता ही हूँ और अक्सर खाना भी वही खा लेता हूँ. इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम. भाई की वाइफ यानि की भाभी के साथ भी मेरी अच्छी बनती है और हम दोनों के बिच में मजाक मस्ती भी चलती है. भाभी का नाम पूजा है और वो दिखने में मस्त है. पतली, स्लिम और छोटे छोटे मम्मे है उसके. उसका वजन करीब 45 किलो और हाईट 5 फिट 6 इंच की है. मैं कभी उनके बारे में गलत नहीं सोचता था. लेकिन हां भाभी की बाजु में एक आंटी रहती थी अकेली. उनके हसबंड दुबई में रहते थे साल में एक बार आते थे. मैं उस आंटी को देख कर उसे लाइन मारता था. कभी कभी आंटी को देखने के लिए भाई के घर चला जाता था.

और आंटी वाली बात भाई और भाभी दोनों को पता थी. और वो मेरे से इस बात को ले के मजाक भी किया करते थे. एक दिन मैं भाई के घर गया. जब पहुंचा तो पता चला की भाई घर पर नहीं था, और भाभी घर पर अकेली ही थी. तो भाभी को बोला मैंने की चलो अब मैं भी जाता हूँ तो भाभी ने बोला थोड़ी देर रुक जाओ मैं भी बोर ही हो रही हूँ, आप थोड़ी देर बाद चले जाना. मैंने भी ओके बोल दिया और भाभी को कहा चलो फिर एक मस्त चाय पिलाओ मेरे को. भाभी चाय लेने चली गई और मैं टीवी देखने लगा. थोड़ी देर के बाद आंटी भी आई घर पर बैठने के लिए. आंटी ने मस्त ड्रेस पहना था. और चुन्नी नहीं डाली थी. आंटी आई और मेरे सामने बैठ गई. मैं सोफे पर बैठे बैठे आंटी के बूब्स का दीदार कर रहा था. मुझे आंटी के बूब्स की दरार देखने का मजा आ रहा था. मैं एकदम से उसके बूब्स देखता रहा.. मेरा लंड भी खड़ा हो गया था. तभी भाभी चाय ले के आई और उसने मुझे देख लिया. मुझे पता नहीं था की भाभी मुझे देख रही है. मैं तो बस आंटी के बूब्स को ही देखता जा रहा था. इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम.  तभी भाभी ने कहा की संदीप चाय ले लो. तभी मुझे होश आया और मैंने चाय ली और पिने लगा. और हम लोग इधर उधर की बातें करने लगे. फिर थोड़ी देर बाद आंटी का फोन बजा और वो जाने के लिए उठी. तब उसके पैरो में कुछ फंस गया और वो निकालने के लिए झुकी तो उसके बूब्स पुरे ब्लेक ब्रा से साफ़ दिखने लगे. और मैं पागल सा हो गया और लंड बेकाबू सा हो गया था. मैं अपने लंड को ठीक करने लगा. फिर आंटी चली गई. भाभी उठी और उसने दरवाजा बंद कर दिया और वो खड़ी हुई मुझे ही देख रही थी. और उसने बोला संदीप आंटी में क्या देख रहे थे इतना ध्यान से? मेरे मुहं से निकल गया वो दो बड़े बड़े तरबूच! और ये सुन के भाभी हंसने लगी और बोली तरबूच में ऐसा क्या मजा है, मजा तो अनार में भी आता है कभी चखा है क्या?

मैंने बोला हां मजा तो सब में ही आता है. लेकिन मैंने अनार चखा नहीं है इसलिए पता नहीं है. और भाभी मजा करने के लिए फिलिंग भी जरुरी है. तो भाभी ने कहा सिर्फ फिलिंग ही नहीं टाइम भी सही होना जरुरी है. और भाभी ऐसे ही सब बात करते करते मेरे एकदम पास आ के बैठ गई. मैंने कहा हां भाभी टाइम भी चाहिए अगर टाइम ना हो तो कुछ नहीं हो सकता है. फिर भाभी ने मुझे देख के बोला अभी तो टाइम ही टाइम है. मैंने बोला मतलब? तो उसने कहा अब तुमहे कैसे समझाऊ तेरा भाई तो मुझे टाइम ही नहीं दे पता अगर तू चाते तो वो टाइम मुझे दे सकता है. और ऐसा कहता ही वो मेरे लंड के ऊपर अपना हाथ रख के मेरी आँखों में देखने लगी. मुझे तो करंट लगा था जैसे. मैंने तुरंत भाभी को किस कर दया और एक दुसरे की बाहों में समा गए हम दोनों. तभी भाभी मुझसे अलग हुई और बोली आज टाइम अच्छा जाने वाला है मैं तेरे लिए कुछ लाती हूँ. और भाभी अंदर रूम में चली गई. इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम ..जब वो वापस आई तो उसने एक एकदम ट्रांसपेरेंट सी नाइटी पहनी हुई थी जिसके अंदर उसका बदन साफ़ साफ़ दिख रहा था. ऊपर एक जामुन रंग की ब्रा और निचे सफ़ेद पेंटी! वाऊ उसका ये रूप देख के मैं हैरान हो गया. वो आके मेरी गोदी में ही बैठ गई और बोली, आज अनार का सवाद चख ही लो आप फिर आप कहेंगे की तरबूच से अच्छे तो अनार होते है! और उसका हाथ मेरे लंड पर था जिसे उसने दबा दिया. मेरे लौड़े की ताजगी देख के उसकी आँखे भी खुल उठी थी. उसने अपने बूब्स को मेरे मुहं के पास ला के जैसे मुझे सूंघने के लिए कहा. मैंने बूब्स के ऊपर अपने मुहं और नाक का टच किया. और फिर भाभी मेरी तरफ को और बढ़ी. उसके छोटे लेकिन एकदम टाईट बूब्स मेरे मुहं में घुसने लगे थे जैसे. फिर वो मेरे एक हाथ को ऊपर ले के अपने बूब्स पकड़ा के बोली, एन्जॉय अनार नाऊ!

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बस ये कहने भर की ही देरी थी मुझे तो. मैंने जल्दी से भाभी की नाइटी की डोरी को खोल दिया. भाभी ने बड़ी ही मस्ती से मेरे बाल नोंचे और मेरे मुहं को उसने अपने अनार (सोरी बूब्स) के ऊपर दबा दिया. मैंने अपने होंठो से ही उसकी ब्रा को खोला. और फिर हौले से उसके एक बोबे को अपने मुहं में ले लिया. उसकी निपल बहार की और निकली हुई थी. जवानी का जोश उसके अंदर एकदम कूट कूट के भरा हुआ था. भाभी ने अब अपने को मेरे लंड पर से हटा के पेंट की ज़िप पर ले जा के मेरी पेंट को खोल दिया. मैंने गांड थोड़ी ऊपर की और पेंट और चड्डी दोनों को निकाला और घुटनों तक खिंच लिया. भाभी ने दोनों बूब्स खोल दिए. मैंने दिल खोल के दोनों बूब्स के जाम को चखा. भाभी का कहना एकदम सच था, इन अनारों में शायद तरबूच से ज्यादा ही मजा छिपा हुआ था.   इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम
अब भाभी धीरे से मेरे निचे आई और मेरे लंड को पहले उसने हाथ से हौले से हिलाया. और फिर जिस नाजाकत से उसने लंड को अपने मुहं में लिया था की मेरे तो होश ही उड़ से गए. भाभी ने लंड को मुहं में भर के मेरे सामने देखा और फिर आधे से भी ज्यादा लंड को मुहं में रखे हुए हाथ से लंड के निचे के हिस्से को पकड़ के चूस्से लगाने लगी. कसम से वो जो सिन था वो काफी दाहक और सेक्सी था. भाभी के मुहं में घुसा हुआ मेरा लंड बड़ा ही मोटा लग रहा था. और भाभी भी चूसने की पक्की खिलाड़ी लग रही थी. एक मिनिट से ज्यादा उसने लंड को थोडा थोड़ा चूसा. और फिर हाथ को हटा के वो अंडकोष तक मेरे लंड को ले के चूसने लगी. और फिर उसने बड़े ही सेक्सी ढंग से मेरे लंड को मुहं से निकाल के हिलाया. थूंक से सना हुआ लंड बड़ा ही मजेदार सेक्स का नशा दे रहा था जब भाभी उसे पकड के हिला रही थी.

मेरे को बूब्स को अपने लंड से चोदने की फेंटसी ना जाने कब से थी. हालांकि भाभी के बूब्स उतने बड़े नहीं थे की उन्हें चोदे जा सके. लेकिन मैंने फिर भी उसे ऐसा करवाने के लिए कहा तो वो फटाक से मान गई. अपने दोनों बूब्स को वो हाथ से दबा के बैठी हुई थी. और मैंने अपने लंड को बूब्स के बिच में डाल के आगे पीछे करना चालू कर दिया. वो मेरे को देख के हंस रही थी. लंड उसके सख्त बूब्स से लड़ के और भी भूखा हो चला था.
भाभी को पलंग में डाल के मैं उसके ऊपर चढ़ गया. एक बार फिर से मैंने भाभी के बूब्स को मुहं में ले के चुसे. और भाभी ने अब मेरे लंड को हाथ में ले के बोला, जल्दी करो मेरे राजा अब मेरे से नहीं रहा जा रहा है, अपने बाजे को मेरी चूत में डाल के उसको बजा दो!
ये सुनते ही मैंने अपने लोडे को एक हाथ से पकड़ा और भाभी जी ने दो ऊँगली से अपनी चूत को खोला. अंदर की त्वचा एकदम गुलाबी थी. उसके ऊपर मैंने अपने लंड को रख दिया और एक ही धक्के में आधा लंड अंदर कर दिया. भाभी मेरे सीने से चिपक गई और हम दोनों एक दुसरे में खो से गए. मैंने और एक धक्का दे के भाभी की चूत में पूरा लंड डाल दिया. और फिर मैं उसे जोर जोर के धक्के दे के चोदने लगा. भाभी कराह रही थी और लेकिन लौडा लेने में उसे मजा भी खूब आ रहा था. वो अपनी छोटी सी गांड को उठा उठा के ले रही थी. और मैंने उसे कंधे से पकड के ऐसे चोद रहा था जैसे दुनिया की आखरी चूत को चोदने का सौभाग्य आज मुझे मिला हुआ हो!

पांच मिनिट तक मैंने भाभी को ऐसे ही मिशनरी पोज में ठोका और फिर मैंने भाभी को कहा आप मेरे गोदी में आ जाओ अब.
मैंने लंड को उसकी चूत से निकाला और मैंने निचे लेट गया. भाभी अपनी चूत को मेरे लंड पर रख के उसके ऊपर बैठ गई. लंड अब की बिना किसी परेशानी के उसकी चूत में जा घुसा था. और वो उछल उछल के मेरा लंड लेने लगी थी. पांच मिनिट तक अपने छोटे से बूब्स को हिला हिला के उसने खूब जम्प लगाए. और फिर मैंने अपने लंड का पानी उसकी संकरी सी चूत में ही निकाल दिया. वो खुश हो गई और अपने गले के ऊपर किसी बोलीवुड हिरोइन की स्टाइल से हाथ रख के उसने अह्ह्ह निकाल दी!
अब मैंने भाभी की चूत से अपने लंड को निकाल दिया. उसने अपने दुपट्टे से मेरे लंड को साफ़ कर दिया. और फिर हम दोनों कपडे पहनने लगे. वो बोली, क्यूँ कैसा लगा टाइम का सही उपयोग मेरे साथ?
मैंने कहा आप ने तो मजा करवा दिया भाभी जी.  इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम
भाभी अपनी चूत को अब कपड़ो में छिपाते हुए बोली, तो बताओ तरबूच अच्छे होते है या अनार?
मैंने हंस के कहा, जी भूख लगी हो और जो पहले सामने हो वो ही अच्छा होता है.
भाभी ने कहा जब भूख लगे मेरे को बता देना मैं अनार खिला दूंगी.
मैंने कहा, और उस तरबूच का सवाद भी करवा देना कभी!
भाभी समझ गई थी की मैं उसे कह रहा था अपना सेटिंग आंटी से करवाने के लिए.

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