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भाभी ने जन्मदिन पर मेरे लंड को केक लगाया

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मेरा नाम मुशीर पठान हे और मैं यूपी के लखनऊ के पास एक छोटे से गाँव से हूँ. मैं अपने बड़े भाई आबिद और भाभी कुलसुम के साथ लखनऊ में ही रहता हूँ. भाई की मार्केट में कबाब की शॉप हे वही मैं काम करता हूँ और दिन में अपनी कॉलेज की पढाई करता हूँ. दोस्तों मैंने पहले कभी भी अपनी भाभी कुलसुम को गलत निगाहों से नहीं देखा था. वो भले ही मेरे सामने ढीली नाइटी में बिना ब्रा पहने घुमे लेकिन मेरा ध्यान पहले कभी उनके बूब्स पर नहीं गया था. मैं उन्हें अपनी बड़ी बहन की नजर से ही देखता था. लेकिन शायद वो मुझे कभी भाई के जैसा नहीं समझती थी. भैया का धंधा इवनिंग का ही था. वो दो तिन हजार का गल्ला कर लेते थे. आधा खर्चा निकालो फिर भी कमाई अच्छी ही थी.

उन दिनों मेरी अम्मीजान की तबियत खराब हुई. उन्हें किडनी की प्रॉब्लम हुई. भैया ने उन्हें बहुत कहा की आप लोग भी लखानऊ आ जाओ. पर अब्बा अपना पुश्तेनी मकान नहीं छोड़ना चाहते थे. वो कहते थे की मैं पैदा इस घर में हुआ था. और अब तुम लोग मेरा जनाजा ही इस घर से निकालना. अम्मी की तबियत ज्यादा ख़राब हुई तो भाईजान ने कहा, मुशीर तू एक काम कर, दो दिन के लिए दूकान तू संभाल, मैं अम्मी की खबर देख आता हूँ. भाई की दूकान पर दो नोकर थे जो बहुत अनुभवी थे. इसलिए मैंने भाई से कहा ठीक हे भाईजान मैं देख लूँगा. दुसरे दिन तडके ही भाई निकल गए. भाभी ने कबाब का सामान बना लिया था वो नोकरों के साथ ले के मैं दूकान चला गया. रात में 8 बजे भैया ने दुकान की खबर निकालने के लिए कॉल किया. और कहा की अम्मी का सोनोग्राफी वगेरह होना हे इसलिए मैं एकाद दिन और रहूँगा. मैंने कहा कोई बात नहीं हे.

रात के साड़े 10 बजे मैं घर पर आया. भाभी जान ने आज भी नाइटी पहनी थी. और आज वो चमकीले वेलवेट के कपडे की नाइटी थी उनके बदन पर. वो होंठो पर लाली लगाए हुए थी और पावडर का भी लपेड़ा दिख रहा था. मैंने उतना ध्यान नहीं दिया. गल्ले के पैसे उन्हें दे के मैंने खाना खा लिया. करीब 11 को मैं निचे पानी पिने के लिए उतर ही रहा था की भाभी मुहे सीड़ियों पर मिल गई. वो वही रुक गई. सीढ़िया इतनी भी बड़ी नहीं थी की दो इंसान एकसाथ पास हो सके. मैंने भाभी को देखा. वो कुछ अलग स्माइल के साथ खड़ी हुई थी. वो बोली, मैं तुझे ही बुलाने आ रही थी ऊपर.

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वो ऐसा कह के अपने बूब्स को खुजाने लगी. मैंने भाभी जान को ऐसे कभी नहीं देखा था. और बूब्स को हिलाते हुए वो वहसी नजरों से मेरे पेनिस की तरफ बार बार देख रही थी.

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मैंने कहा, मेरा क्या काम था?

वो बोली, आज मेरा जन्मदिन हे और केक लाइ हूँ मैं!

मैंने कहा, अरे माफ़ करना भाभी जान, मुझे पता नहीं था. फिर मैंने कहा, हेप्पी बर्थ डे.

वो बोली, ऐसे नहीं गिफ्ट देनी पड़ेगी पहले मुझे.

मैंने कहा ठीक हे दे देंगे आप को गिफ्ट कल हम.

मैं उसके साथ निचे कमरे की तरफ चल दिया. नाईटी का कपडा भाभी की गांड की दरार में धंसा हुआ था. पर भाभी ने उसे बहार निकालने की दरकार नहीं की. अब मुझे थोडा थोडा खुमार सा चढ़ रहा था. घर में अकेले औरत और मर्द का होना सेक्स की चिंगारी को सुलगा ही देता हे. पर मैंने अपना संयम और शर्म नहीं खोया था तब तक.

भाभी ने कमरे में केक के ऊपर मोमबत्ती जला दी थी पहले से ही. मैंने कहा बच्चे नहीं आये?

कुलसुम भाभी: नहीं वो लोग सो रहे हे इसलिए मैंने नहीं उठाया.

मैंने हलके से ताली बजाई, 12 बजे से पहले ही भाभी ने केक काट दिया. मुझे एक पिस प्लेट में लगा के दिया भाभी ने. मैंने कहा आप भी खाओ न.

वो बोली, पहले तुम खा लो. ऐसा कह के वो मैं जहाँ बैठा था उसके एकदम करीब आ गई. उसकी जांघ के ऊपर वेलवेट की जो नाइटी थी उसका टच मुझे महसूस हो रहा था. मैं केक खाता रहा. फिर वो उठी और बोली, मैं शर्बत ले के आती हूँ.

जब वो वापस आई तो उसके हाथ में दो ग्लास थे. एक मुझे दे के वो फिर से मुझे टच करते हुए बैठ गई. मैंने शर्बत पी लिया और वो भी पी गई. फिर वो मुझे बोली, कैसा लगता हे लखनउ?

मैंने कहा अब तो काफी टाइम हो गया मुझे यहाँ पर.

वो बोली लेकिन ऐसे करीब से पूछने का चांस मुझे कभी नहीं मिला ना.

मैंने कहा अच्छा ही हे भाभीजान.

वो बोली, और लखनऊ वाले कैसे लगे आप को?

मैंने कहा सब लोग अच्छे हे.

वो बोली, सब को छोड़ो मैं कैसी लगती हूँ तुम्हे.

ये कह के उसने अपना चहरा मेरे एकदम करीब कर दिया. मेरा दिल जोर जोर से धडकने लगा था. मैंने कहा, आप भी अच्छी जो भाभिजान.

मैंने देखा की उसने अपने हाथ को मेरी जांघ पर रख दिया था. वो धीरे से उसे ऊपर ले गई. और मेरे और उसके चहरे में अब महज कुछ इंच का फासला था बस. मेरी साँसे उसे सुनाई दे रही थी और उसकी साँसे मुझे. फिर वो एकदम से अपने होंठो को मेरे होंठो से टच कर बैठी. मैंने एक पल के लिए तो कुछ नहीं कहा, लेकिन फिर मैंने उसके चहरे को हटा के कहा भाभी क्या कर रही हो आप?

वो बोली, वही जो मुझे अच्छा लगा.

मैंने कहा, भाभी नहीं ये अच्छी बात नहीं हे!

वो बोली, मुशीर मना मत करो, इस दिन के लिए मैंने बहुत दुवाएं मांगी हे. तुम्हारे भाई कुछ करते नहीं हे और करने देते भी नहीं हे!

मैंने कहा, क्या बकवास कर रही हो आप भाभीजान.

कुलसुम भाभी ने कहा, जो शंकर हे न तुम्हारे भैया का नौकर उसकी बीवी हे लाजो, उसके बुर में घुस गये हे भैया तुम्हारे.

लाजो को मैंने भी देखा था, वो भाभी से कुछ साल छोटी और पतली थी. और शंकर दूकान पर कम ही काम करता था. शायद भाभी की बात सच थी. भाभी ने अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ लिया. और वो बोली, आज बहुत महीनो से मुझे नंगा देखा तक नहीं हे तुम्हारे भैया ने, सेक्स की बात तो साइड पर ही रहने दो.

मैं भी भाभी की बातों में आ गया. भाभी ने अब बिना कुछ बोले मेरी पेंट की ज़िप खोल दी. और मेरे पेनिस को बहार निकाल के वो उसे हलाने लगी. मेरा लंड आधा खड़ा था अहले और भाभी के हाथ ने उसे पूरा खड़ा कर दिया. मेरी सांसे एकदम तेज हो गई थी. मैंने आजतक पहले कभी किसी औरत के साथ इतनी नजदीकी नहीं की थी. कुलसुम भाभी ने कहा, कभी किये नहीं हो क्या?

मैंने कहा नहीं.

वो बोली, इंग्लिश मूवी तो देखी हे ना?

मैंने हां में सर हिला दिया.

वो बोली, फिर उसने करते हे वो सब करो ना.

इतना कह के उसने अपनी नाईटी में से एक चुन्ची बहार निकाली और मुझे दे दी. मैंने बड़े ही जोर जोर से उसे दबाने लगा. उसे हल्का सा दर्द हुआ और वो चिहक उठी. मैंने निपल को अपनी उँगलियों से दबाई. वो कस के लंड को हिलाने लगी. और फिर अगले ही पल वो निचे झुक के पेनिस को अपने मुहं में डाल के चूसने लगी.

आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह मेरे मुहं से सिसकियाँ निकल गई. मैंने सपना भी नहीं देखा था की भाभी कभी मेरा लंड अपने मुहं में लेगी. मैंने भाभी की कमर पर हाथ रख दिया. और उनकी नाइटी में शानदार गांड को देख के हाथ वहां ले गया. गांड की दरार पर हाथ फेरने लगा मैं. भाभी ने कहा, उतार दूँ इसे.

मैं कुछ बोल नहीं पाया, गला सुख चूका था मेरा इस मजे की वजह से. हलकी सी आवाज भी न निकल सकी तो मैंने मुंडी हिला दी.

कुलसुम भाभी ने खड़े हो के नाइटी उतार दी. फिर वो वापस लंड चूसने लगी. भाभी ने बदन के ऊपर कपडे के नाम पर सिर्फ नाइटी ही पहनी थी जिसके हटने से वो एकदम न्यूड हो गई थी. मैं गांड से खेलने लगा उसकी. और फिर ऊँगली उनकी चूत पर ले गया. वो एकदम गीली हो गई थी. मैंने धीरे से उसे सहलाया और भाभी ने एकदम कस के सकिंग चालु कर दिया. सच में ये ओरल सकिंग इतना सेक्सी था की मैं एक मिनिट और नहीं झेल पाया उसे. भाभी के मुहं में ही मेरे गाढे वीर्य की पिचकारी निकल गई. भाभी ने सब पी लिया. फिर वो खड़ी हो गई. उसकी चूत एकदम साफ़ थी बिना बाल की. मैंने कहा. भाभी मैं भी इंग्लिस मूवी के जैसे आप की चूत चाटूंगा वो बोली आजा फिर.

कुलसुम भाभी अपनी जांघे और टाँगे फैला के बिस्तर में लेट गई. मैंने अपनी जगह बना ली और उसके चूत के खुले होंठो को अपनी जबान से प्यार देने लगा. भाभी की चूत एकदम खारी खारी यानि की नमकीन सी थी. मैंने उसके अन्दर जबान डाली तो वो एकदम मस्ती से बोली, अह्ह्ह्ह मेरे राजा तू तो बड़ा इंग्लिश हीरो हे! चाट अपने भाभी के बुर को जोर जोर से और सब खुजली को दूर कर दे.

मैंने चूत में जबान डाली हुई थी और फिर मैं अपनी एक ऊँगली को भी अअन्दर डाल के हिलाने लगा. भाभी मस्तियाँ गई. वो बोली, अह्ह्ह अह्ह्ह्ह ह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्ह उईईइ माँ मेरी!

मैंने चूत में ऊँगली अन्दर तक कर दी और उसे जोर जोर से घिसने लगा. भाभी के बदन में एक झटका सा लगा और मेरे मुहं में उसके चूत से सफ़ेद प्रवाही निकल के आ गया. वो झड़ गई. लेकिन अब उसकी कामवासना और भी बढ़ गई थी. वो बोली ला मैं फिर से चुसुं तेरा लंड.

और उसने लंड को एक मिनिट में फिर से कडक कर दिया. और वो बोली, मुशीर जल्दीस इ मुझे अपना लंड दे दे नहीं तो मैं मर जाउंगी.

मैंने कहा मेरी जान को ऐसे थोड़ी मरने देंगे हम.

ये कह के मैंने उसकी चूत को ऊँगली से थोड़ा हिलाया. और फिर अपने लंड को चूत पर लगा दिया. वो बोली, यहाँ नहीं यहाँ. ऐसा कह के उसने लंड को सही छेद पर लगा दिया. और फिर अपनी आँखों से उसने इशारा किया.

मैंने जैसे ही धक्का लगाया हम दोनों के बदन एक हो गए. मेरा लंड उनकी ढीली चूत में घुस गया. और वो मेरे से लिपट गई. कमरे के अन्दर बस फच फक की आवाजें और भाभी की मादक सिसकियाँ गूंजी उसके बाद. रात भर मैंने इसी अंदाज में कुलसुम भाभी के साथ उनका बर्थ डे सेलेब्रेट किया!!!

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