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भाईजान का बेरहम लंड

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Hindi Sex मेरे निकाह को अब कोई एक महिना बीत चूका था. Stories मेरा पति रहीम दिन मे तीन तीन बार मेरी चुदाई कर देता था. मेरे अन्दर भी लंड की भूख बहुत बढ़ गयी थी. मेरे हाथ अब रहीम के लंड से दूर नहीं रह पाते. हम जब भी अकेले होते तो मैं उसका लंड अपनी मुठी मे ले लेती और उसके सुपारे को दबा दबा कर मज़े लेती. रहीम भी मेरे हुस्न का दीवाना बन गया था. वो अक्सर मुझे किचिन में ही पीछे से आ कर दबोच लेता और मेरी चुचिओं को दबा देता. मैं उसके लंड को जोर से पकड़ लेती तो एक बार वो बोला? हमी, साली तू बड़ी छिनाल हो गयी है, तेरा कभी लंड लेने से मन नहीं ऊब जाता, हर वक़्त मेरे लंड की प्यासी रहती है मेरी चुदास बीवी, कभी तो दिल करता है के यहीं रसोई में ही चोद दूं, पर डर लगता है कही आस्मा न आ जाये, चल मेरे लंड को चूस डाल जल्दी से.? मैंने उसके लंड को पजामे से निकाल कर अपने होंठ रख दिए और उसकी सांसें तेज़ हो गयी. मैं उसके अंडकोष को सहला रही थी और ५ मिनट्स मे ही वो झड़ने वाला हो गया. तभी आस्मा के आने की आवाज़ सुनाई दी और मैंने जल्दी से लंड मुहं से निकाल दिया और रहीम का लंड वापिस पजामे मे डाल दिया.रहीम किचिन से बाहर चला गया.
आस्मा मेरे पास आई और मुझे आलिंगन मे लेने के बाद मेरी चूची दबाते हुए बोली? क्या माजरा है भाभिजान, भाई जान के साथ मज़े किये जा रहें है और वो भी रसोई मे, साली मेरा ख्याल कौन रखे गा, बहनचोद, अपनी पुरानी यार आस्मा को भूल गयी क्या, चल भाई के जाने के बाद हम अपना खेल खेलते हैं, मेरी तो चूत में खुजली हो रही है, मुझे पहले पता होता तो तेरा निकाह कभी भाईजान से न करवाती, मैंने तो सोचा था की मेरी यार सदा के लिए मेरे घर मे आ जाएगी, मुझे के पता था की भाई तुझे अपने लिए ही पूरी तरह से रख लेगा, साली तू है ही इतनी सेक्सी की हम भाई बहन दोनों का दिल तुझ पर आ गया है.? मैंने कहा, ठीक है. मेरा और आस्मा का सम्बन्ध मेरे निकाह के बाद कुछ धीमा हो गया था क्योकि रहीम मुझे छोड़ता ही नहीं था. मैंने आस्मा से कहा? यार अब तेरी शादी भी कर देनी चाहिए, कोई है तेरी नज़र मे ताकि तू भी लंड के मज़े ले सके, मेरी जान लंड का भी अलग ही मज़ा होता है, मुझे तेरे साथ बहुत मज़ा आता है पर रहीम के साथ भी मज़ा आता है, चल आज मैं थोड़ी देर बाद तेरे कमरे मे आती हूँ और तेरी चूत की गर्मी निक्कालती हूँ,? आप लोग यह कहानी indiansexkahani.com पर पढ़ रहे है |

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रहीम के जाने के बाद मैं और आस्मा ने जम कर अपनी लेस्बियन चुदाई करी और आस्मा की चूत पानी छोड़ चुकी थी और मेरी उंगलियाँ अभी उसकी चूत के अन्दर ही थी और मेरे होंठ उसके रसीले होंठो पर थे. वो पूरी तरह निढाल हो चुकी थी तो मैंने उससे पूछा,? मेरी जान अब बतायो क्या ख्याल है निकाह के बारे मे, तू कहे तो जल्द ही तेरे लिए लंड का इंतजाम कर दूं.?? वो सीरियस हो गयी और बोली? हां, मैं निकाह नहीं कर सकती, मुझे लंड से बहुत डर लगता है, असल मे जब मैं दस बरस की थी तो मेरे टीचर ने, जो के कोई ३० साल का था, ज़बरदस्ती चुदाई कर डाली थी, मैं रोती रही, लेकिन उसने मेरा रेप करदिया और मुझे बहुत दर्द हुआ, मेरी चूत फट गयी, बहुत खून निकला और मैं बहुत रोई, उस दिन के बाद मुझे लंड के भयानक सपने आते रहे, अब भी आते हैं और अपनी इज्ज़त की खातिर मैंने किस्सी को नहीं बताया. ये है मेरी कहानी, मेरी जान मैं तो सादी ज़िन्दगी तेरे साथ ही बिताना चाहती हूँ? मैं सुन कर परेशान हो गयी और फिर मेरे मन मे आस्मा के इलाज का एक प्लान बना.
उस रात को जब रहीम घर आया तो मैंने उससे आस्मा की शादी की प्रॉब्लम के बारे बताया. वो भी गंभीर हो गया और बोला ? अब हमें क्या करना चाहिए.?? मैंने सुझाव दिया? सब से पहले हमें आस्मा के दिल से लंड का डर निकालना होगा, और ये एहसास दिलाना होगा की लंड और चूत एक दूजे को मज़ा देने के लिए बने है, फिर वो अपने आप ही लंड की दीवानी हो जाएगी, किओं कैसा लगा मेरा प्लान?? वो बोला?प्लान तो ठीक है पर ये सब होगा कैसे?? ?वो तुम मुझ पर छोड़ दो मेरी जान, बस जैसे मैं कहती हूँ, करते जाओ? मैं बोली और वो मान गया. आप लोग यह कहानी indiansexkahani.com पर पढ़ रहे है |
अगले दिन सन्डे था और मैंने रहीम के साथ चुदाई का प्रोग्राम दोपहर को बनाया. हमारा कमरा आस्मा के कमरे की बगल मे था. हम सब ने बाथ लिया, और मैंने सुझाव दिया, ? किओ न एक एक बीअर हो जाये, ? सभी को सुझाव अच्छा लगा और हम अपने अपने ग्लास ले कर कमरे में बैठ गए. हम बीअर पीने की आदत में नहीं थे इस लिए हमें सरुर चढ़ना लगा और रहीम गरम होने लगा, और उसका लंड पजामे के अंदर सर उठाने लगा. मैंने जन बुझ कर अपनी चूची को आधे से ज़यादा नंगा कर दिया और आस्मा के साथ गंदे मजाक करने लगी और एक दो बार तो मैने उसके चुतर पर करारी चपत मारी और वो कराह उठी,? साली ये किओं मारा मुझे?? मैं हंस दी और कहा, ? तू मेरी सहेली भी है और ननद भी, और मेरी गर्लफ्रेंड भी, मैं जो चाहूं करूँ मेरी जान? रहीम का हाल बुरा हो रहा था. हमारा सेक्सी खेल उसकी आँख से बचा नहीं था बल्कि उससे उतेजित कर रहा था.

उसने मुझ को इशारा किया के कमरे मे चलो. मैंने उससे धीरे से कहा तुम अन्दर जाओ मैं आस्मा को उसके कमरे मे छोड़ कर आती हूँ,? और मैंने उसका लंड जोर से दबा दिया. उसकी आह निकल गयी और वो अपने कमरे मे चला गया.

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