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भतीजे ने मेरी चूत पर खीर डाल कर चाटा और चोद कर मेरी प्यास बुझाई Part 1

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sex stories मेरा नाम शालिनी है मैं 21 साल की शादी सुदा औरत हूँ। सब से पहले indiansexkahani.com पढ़ने वाले सभी पाठक – पथिका को शालिनी का ढेर सारा प्यार। लड़के अपना लंड अंडरवियर से बाहर निकाल लें और लड़कियों चूत में ऊँगली डाल ले। अब मैं कहानी की सुरूवात करती हूँ।
मेरे पति का नाम प्रदीप है उनकी उम्र 51 साल है जब मेरी सादी प्रदीप से हुई मैं सिर्फ 18 साल की थी।
प्रदीप तलाक सुदा आदमी थे उनकी बीवी ने उनको तलाक दिया था। प्रदीप और उनका परिवार पैसे वाले है। मैं एक बहुत गरीब परिवार से थी। मेरे माँ बाप ने मुझे समझाया पैसे वाले घर में शादी करके तुम ज्यादा खुस रहोगी। मैं गरीबी से तंग आ चुकी थी मुझे भी एक अच्छी जिंदगी चाहिए थी इसलिए मैंने 48 साल के आदमी से शादी के लिए हाँ कर दी। सादी के बाद सब कुछ अच्छा था। सुहागरात का मुझे बेसब्री से इन्तजार था। मैं कुवारी कच्ची कली थी मुझे दूसरी लड़कियों की तरह अपनी सुहागरात यादगार बनानी थी। मैं बेड पर घूँघट डाल बैठी थी मेरे पति प्रदीप आये। उन्होंने मेरा घूँघट उठया और मुझे देख कर मेरी खूबसूरती की तारीफ़ करने लगे। प्रदीप ने मुझे चूमना सुरु किया मैं सरमा रही थी आज मेरी जिंदगी की एक नयी सुरुवात थी।

प्रदीप मुझेसे लिपट कर मुझे चूमते हुए बेड पर लेटा दिए। वो मेरे ऊपर चढ़ गए उन्होंने मेरी साड़ी ऊपर सरका दी। मेरी टांगो को फैला कर मेरी पेंटी उतार दी। मैं सरम से पानी – पानी हुई जा रही थी। मेरी धड़कने तेज चल रही थी। प्रदीप मेरी पेंटी एक झटके से निकाल कर दूर फेंक दिए वो मेरी कुवारी चूत को निहारने लगे। मैं उस समय पतली दुबली थी मैंने चूत को हेयर रेमोवेर से साफ़ किया हुआ था।
प्रदीप अपना पजामा उतार कर जल्दी से चड्डी निकाल फेंके। ऐसा लग रहा था उन्हें बड़ी जल्दी है।
प्रदीप मेरी कुवारी चूत में अपना लंड डाल कर मुझे चोदना चाहते थे उनका लंड मुझे काफी छोटा दिख रहा था। मैंने आज तक किसी लड़के को नंगा नहीं देखा था। मेरी शहेलियों ने बताया था लड़कों का लंड 5 – 6 इंच का होता है लेकिन मुझे ऐसा लगा जैसे इनका लंड केवल 3 इंच का होगा। छोटा और अगूंठे के जितना पतला है मेरे पति का लंड। प्रदीप मेरे ऊपर चढ़ गए और जोर से मेरी चूत पर लंड से वार किया उनका लंड एक बार में मेरी चूत की झिल्ली चीरता हुआ अंदर चला गया। प्रदीप मुझे तेजी से चोदने लगा। मुझे चूत में जलन और दर्द होने लगा। मेरी चूत से हल्का खून निकल रहा था। 10- 12 धक्कों के बाद प्रदीप ढेर हो गए उनका लंड पानी छोड़ चूका था।आज मेरी चुदाई का पहला दिन था मुझे कुछ खास महसूस नहीं हुआ सिवाए दर्द के। मेरी चूत शांत नहीं हुई थी अजीब सा महसूस हो रहा था। ऐसे कुछ दिन निकल गए हर दिन मेरे पति ज्यादा से ज्यादा 15 धक्के लगा कर चूत के अंदर ढेर हो जाते। तीन साल ऐसे निकल गए मुझे पैसे और किसी भी चीज़ की कोई कमी नहीं थी लेकिन एक औरत होने का सुख मुझे नसीब नहीं हो रहा था। मैं इसे अपनी ख़राब किस्मत समझ कर चुप रही किसी से कुछ बताने की हिम्मत नहीं हुई घर वालों से बोल नहीं सकती थी और मेरी शहेलियाँ मजाक बनाएंगी यही सोच कर मैं खामोश रही। हर दिन नहाने जाती तब बाथरूम में अपनी चूत के अंदर एक ऊँगली डाल कर तेजी से चूत रगड़ती थी मुझे थोड़ी संतुस्ती मिलती थी। आप यह स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे/रही है। तीन साल बाद मेरी जिंदगी की कहानी में नया मोड़ आया जिसने मेरी जिंदगी बदल दी। मेरे जेठ का लड़का जो मेरी सादी के समय 15 साल का था आज उसकी उम्र 18 हो गयी थी। घर में मेरे पति मैं और जेठ जेठानी उनका बेटा रवि इतने लोग है।

जिसदिन से मैं सादी होकर इस घर में आयी थी रवि मेरा बहुत ख्याल रखता था। हम दोनो दोस्त की तरह थे। रवि हमेशा मेरे साथ होने और मुझेसे बात करने का मौका ढूंढ़ता था मुझे भी उसका साथ अच्छा लगता था। एक दिन मैं सुसु करने बाथरूम गयी रवि बाथरूम से बाहर निकल रहा था दोपहर का समय था। मेरे वहाँ पहुंचने से पहले रवि अपने कमरे में चला गया मैं बाथरूम का दरवाजा बंद कर सुसु करने बैठ गयी। मेरी नजर फर्श पर गिरी हुई सफ़ेद चिकने शैम्पू जैसे चीज़ पर गयी। मै पेशाब करने के बाद उठ कर वो देखने गयी। मैं हैरान थी वो शैम्पू नहीं था। बाथरूम की फर्श पर ढेर सारा लंड का सफ़ेद पानी गिरा हुआ था। मैं समझ गयी रवि ने अपना लंड शांत करने के लिए किया होगा।
रवि पानी डाला था लेकिन उसका सफ़ेद स्पर्म अभी तक पानी के ऊपर तैर रहा था। ये सब देख कर मेरी चूत में गुद गुदी होने लगी।रवि का सफ़ेद स्पर्म देख कर मुझे याद आया यही स्पर्म एक औरत को बच्चा देता है लेकिन ये सुख भी मेरे नसीब में नहीं था मुझे आज तक बच्चा नहीं हुआ। मैं बहुत पहले समझ गयी थी मेरे पति को उनकी पहली बीवी ने क्यों छोड़ा है। एक तो प्रदीप औरत को संतुस्ट करना नहीं जानते दूसरा उनके स्पर्म में बच्चा पैदा करने की ताकत नहीं है। मैं रवि का लंड देखना चाहती थी मेरे दिमाग में नाजायज सम्बन्ध बनाने की सोच पैदा होने लगी। मैं खुद को एक सम्पूर्ण औरत बनाना चाहती थी ऐसा सिर्फ मेरी चुदाई की संतुस्ती और एक बच्चा होने से हो सकता था। मैं कैसे भी करके रवि का लंड देखना चाहती थी मुझे डर था कहीं रवि का लंड भी उसके अंकल के जैसा छोटा पतला तो नहीं। मैं रात होने का इन्तजार कर रही थी। रात का खाना होने के बाद मेरे नामर्द पति सोने लगे मैं सेक्सी nighty पहन कर मोबाइल में सेटिंग ख़राब होने का बहाना करते हुए रवि के कमरे गयी। रवि मोबाइल में कुछ देख रहा था। मुझे देख कर हड़बड़ाते हुए कहा अरे शालू आंटी आप यहाँ ? मैं बोली हाँ रवि मेरे मोबाइल में सेटिंग्स ख़राब हो गयी है स्लो चल रहा तुम देख लो। मैं रवि के पास जाकर बैठ गयी। मेरे nighty से मेरे बूब्स आधे दिख रहे थे रवि की नजर बार बार मेरे बूब्स पर जा रहे थे रवि ने ऐसे मुझे आज पहली बार देखा था। रवि नजरें चुरा कर बार बार मेरी गोरी चूचियों को ताड़ रहा था।
18 साल की दुबली पतली लड़की 21 साल की कामुक सुन्दर औरत हो चुकी है। मेरी ब्रा का साइज 34 है आप अंदाजा लगा सकते है अगर मैं ब्रा उतार दूँ तब आप को क्या देखने मिलेगा। आप यह स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे/रही है।

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रवि मेरे मोबाइल को चेक किया और उसने सेटिंग्स सुधर दी। मैं मोबाइल लेकर इठलाती मटकती हुई उसके कमरे से बाहर आयी आज मैं जान बुझ कर रवि को अपनी और रिझा रही थी। मैं अपने कमरे में जाने की जगह छत पर चढ़ गयी ऊपर की जाली वाली खिड़की से झुक कर देखने पर रवि के कमरे का कुछ हिस्सा दिखाई देता था। मैं अँधेरे में थी रवि मुझे नहीं देख सकता था मैं रवि को देख रही थी रवि कुछ देर तब अपने मोबाइल पर कुछ देखता रहा। उठ कर उसने कमरे का दरवाजा बंद किया और मेरे देकते देकते वो अपने कपडे उतारने लगा। उसने अपनी अंडरवियर उतारी और मेरी आँख फटी रह गयी उसका लंड मेरे पती से तीन गुना बड़ा और मोटा था। जैसे मेरी शहेलियों ने बताया था बिल्कुल वैसा मोटा लम्बा लंड मेरी आंखों के सामने था। रवि बेड पर लेटा हुआ था मुझे उसका आधा नंगा सरीर दिख रहा था। उसका लंड मेरे सामने था उसने अपने लंड की चमड़ी नीचे की अंदर पिंक कलर का लंड था। मेरी साँसें तेज चलने लगी मेरा पूरा सरीर काँप रहा था। मेरी चूत से पानी रिसने लगा रवि अपना लंड दोनों हाथों से मसल रहा था 10-12 मिनट रवि अपने लंड से खेलता रहा। अहह अह्ह्ह अह्ह्ह शालू मेरी जान बोल रहा था मेरी समझ में आ गया था वो मुझे सोच कर खुद से सेक्स कर रहा। उसका लंड पिचकारी की तरह स्पर्म छोड़ने लगा। रवि का स्पर्म निकल कर उसके पुरे पेट और छाती तक गिरा रवि उठ कर खुद को कपडे से पोंछने लगा। रवि खुद को साफ़ करने के बाद वैसे ही नंगा लेता हुआ था। मैं खुद को सम्हाल नहीं सकती थी। मैं भाग कर बाथरूम गयी और कमोट पर बैठ कर चूत जोर जोर से रगड़ते हुए रवि को याद करने लगी 4 -5 मिनट जोर जोर से झटकों के साथ मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया। आज चूत रगड़ने और खुद को संतुस्ट करने का एक जरिया मिला था मैं खुस थी। अब सिर्फ एक दुरी थी रवि और मेरे बीच मैं रवि से चुदवाने का प्लान बनाने लगी और मौके का इंतजार करने लगी। आप यह स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे/रही है।

कुछ दिन निकल गए उसके बाद मौका मिला और मैंने अपनी चाल चली। मेरे पति के एक व्यापारी दोस्त के बेटी की सादी थी सब को जाना था। हम लोगो ने पूरी तैयारी की कपडे पैकिंग हो चुकी थी। गिफ्ट ले लिया था। शाम को निकलना था और रात को शादी पूरी होने के बाद सुबह बिदाई के बाद हम लोग वापस घर आने वाले थे। चुदाई की आग ने मेरे दिमाग के सोचने की पावर 4 गुना ज्यादा बढ़ा दी थी। मैं सादी में निकलने के 2 घंटे पहले पेट दर्द होने का नाटक करने लगी। 1 घंटे के अंदर मैं 3 बार टॉयलेट गयी और कमजोरी और चक्कर आने का नाटक करने लगी। मेरे पति मुझे डॉक्टर के पास लेकर गए। डॉक्टर ने मुझे गोली दी और आराम करने को कहा। घर वापस आकर मैं अपने कमरे में सो गयी। जेठ जी जल्दी निकलने के लिए बोल रहे थे सादी में जाने के लिए देर हो रही थी। तभी मेरी जेठानी ने कहा रवि बेटा तुम यही चाची के पास रुक जाओ उसको अकेला कैसे छोड़ सकते है। हम तीनो जाते है जाना जरुरी है। मेरा प्लान कामयाब हुआ था मैं जानती थी अपनी जेठानी को मुझे पूरी उम्मीद थी वो ऐसा ही कुछ बोलेगी। वो तीनो चले गए रवि मेरे बगल में आकर लेट गया। मैं सोने का नाटक कर रही थी। आगे की कहानी अगले भाग में  DMCA.com Protection Status

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