चेतावनी : इस वेब साइट पर सभी कहानियां पाठको द्वारा भेजी गयी है। कहानियां सिर्फ आप के मनोरंजन के लिए है, कहानियां काल्पनिक हो सकती है। कहानियां पढ़ कर इसे वास्तविक जीवन में आजमाने की कोशिस ना करें। सेक्स हमेशा आपसी सहमति से करें।

चाचा के लड़के ने मुझे चोदकर अपने लंड की आग बुझाई और मेरी चूत को गीला किया

Sex Stories मेरा नाम रिया है और मैं अहमदाबाद की रहने वाली हूँ। और मेरी उम्र 19 साल.. मैं दिखने में बहुत ज्यादा हॉट नही हूँ लेकिन मेरा फिगर 34 – 27- 37 का था और मेरी चूचियां तो कमल की थी। मेरे घर में मैं मेरी दीदी और मेरी मम्मी पापा रहते है। कुछ साल पहले मेरी दीदी की शादी हो गई और वो अपने घर चली गई, दीदी के जाने के बाद धीरे धीरे मैं भी जवान हो रही थी और कुछ साल बाद मेरी भी शादी हो जाती। मैं शादी के पहले बहुत कुछ करना चाहती थी लेकिन मैं अपने मम्मी पापा के बारे में सोच कर अपने आप को रोक लेती थी। मेरा मन तो करता था कि मैं किसी लड़के को फसाऊँ और फिर वो मेरी खूब चुदाई करता, लेकिन अगर ये बात किसी को पता चल जाती तो मेरे पापा किसी को मुह भी दिखने लायक न रहते इसीलिए मैंने अपने आप को ये सब करने से रोक लिया था। लेकिन जैसे मैं और भी जवान हो रही थी वैसे वैसे मेरे अंदर की वासना मुझे चुदने के लिए मजबूर कर रही थी। बहुत बार तो मैंने अपने आप को शांत करने के लिए अपने दो तीन उंगलियाँ साथ में अपने चूत में डालने लगाती थी और कुछ देर तक ऐसा करने से मेरी चूत कुछ ही देर में गीली हो जाती थी।

जब दीदी की शादी हो गई और अपने घर से पहली बार घर आई, तो दीदी ने मुझे बताया “तुम्हारे जीजा जी तो बहुत ही जोशीले और काफी चुदकड़ टाइप के है। दीदी ने बताया मैं जितने दिन वहां थी वो मुझे बहुत चोदते थे”। उन्होंने मुझसे कोई भी बात सीधे सीधे नही की लेकिन मैं समझ गई कि दीदी चुदाई के ही बारे में बात कर रही है।
दोस्तों, जब मैंने जीजा और दीदी की चुदाई के बारे मे सुना तो मेरा मन भी चुदाई की तरफ बढ़ने लगा। मैं अपने आप को रोक नही पा रही थी, मैं अपने मन में ही सोच रही थी कि आखिर मैं किससे चुद सकती हूँ। पहले तो मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों न अपने चाचा के लड़के से चुद जाऊं घर की चुदाई घर में ही रह, लेकिन फिर मैंने सोचा उसको कैसे मनाऊं। मैंने सोचा कोसिस करने में क्या जाता है। इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम 
दुसरे ही दिन मैं अपने चाचा के घर आ गई, मैंने चाचा से पूछा – अनमोल कहाँ है??
तो चाचा ने कहा – “वो तो दिन भर अपने कमरे में ही रहता हा वहीँ होगा”। मैं उसके कमरे में चली गई और पहले तो उससे बातें करने लगी। अनमोल देखने में काफी स्मार्ट और थोडा शर्मीला टाइप का है और वो लगभग मेरे बराबर ही है। मैंने जान कर उस दिन थोडा ढीला कपडा पहना था जिस्स्से मैं उसको अपनी चूचियो को दिखा कर चोदने के लिए मजबूर करूँ। बातें करते हुए मैंने अपने अपना पर्स निचे गिरा दिया और फिर उसको उठाने लगी जिससे मेरी चूचियां आगे की और लटक गई क्योकि मैंने ब्रा भी नही पहना था। पहले तो अनमोल ने मेरी चूचियो को मुझसे नजर छुपा कर देख रहा था लेकिन कुछ देर बाद जब मेरे मम्मो को देख कर उसका पूरा मन बन गया तो उसने मुझसे कहा – “आज तुम बहुत अच्छी लग रही हो, क्या बात है?? उसकी बातें सुनकर मैं समझ गई उसने मेरी चूचियो को देखा है और उसका भी मूड बन रहा है।

मैंने उसके कहा – कुछ खास बात नही है बस यूँ ही। बातें करते हुए मैंने अपने पैर को अनमोल के पैरो पर रख दिया और धीरे धीरे अपने पैरो से ही उसके पैरो को सहलाने लगी।
पहले तो कुछ देर उसने कुछ नही किया लेकिन कुछ देर बाद उसने अपने हाथ को मेरे हाथ पर रख दिया और मेरे उंगलियो को दबाने लगा। मैं समझ गई अब इसका भी पूरा मूड है। मैंने समय का फायदा उठाते हुए उसके हाथ को उठा कर अपने जांघ पर रख दिया और अपने हाथो से ही उसके हाथ को हिलाने लगी। कुछ ही देर में अनमोल ने जल्दी से कमरे के दरवाज़े को मिला दिया और फिर उसने मुझको दीवार के किनारे सटा दिया और अपने हाथो को मेरी जांघो से होते हुए मेरी चूत में लगते हुए मेरे मम्मो को दबाने लगा और साथ में मेरे होठो को को चूमने लगा पहले तो मैंने उसको चूमने दिया लेकिन कुछ देर बाद मैंने भी उसके होठो को पीना शुरू किया। कुछ देर तक हम एक दुसरे के होठो को पीते रहे। अनमोल तो मेरे होठो को पीने के साथ मेरी चूचियो को जोर जोर से दबा भी रहा था। इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम 
कुछ देर में मैं तो बिलकुल चुदासी हो गई और मैंने उसे किस करते हुए ही उसके हाथ को अपने लैगी के अंदर डाल दिया और वो अपने हाथ की उंगलियों को मेरी चूत के छेद में धीरे धीरे डालने लगा। मुझे काफी मज़ा आ रहा था लेकिन कुछ देर बाद चाचा ने अनमोल को बुला लिया। उस दिन मेरा चुदने का पूरा मूड था लेकिन मेरी चुदाई पूरी न हो पाई। मैने अनमोल से कहा – “कल मंगलवार है, पापा तो सुबह ही चले जाते है और मम्मी कल सुबह मंदिर जायेगी। तो तुम कल सुबह मेरे घर आ जाना मैं अकेली रहूंगी”। फिर मैं वहां से चली आई।

दुसरे दिन का मैं बेसब्री से इंतजार कर रही थी, क्योकि मैं चुदने के लिए बहुत ही बेताब थी। सुबह हुई पापा काम पर चले गए और मम्मी के मंदिर जाने से पहले ही अनमोल घर आ गया। मम्मी ने कहा मैं मंदिर जा रही हूँ और तुम लोग घर पर ही रहना कहीं जाना मत। जैसे ही मम्मी घर से गई मैंने जल्दी से दरवाजा बंद कर दिया और फिर मैं अनमोल के लेकर अपने कमरे में चली गई। इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम 
पहले तो अनमोल ने मुझे बिस्तेर पर लिटा दिया उर खुद भी लेट गया और फिर मेरे हाथो को अपने हाथो में जकड़ कर मुझसे चिपक गया और मेरे गाल पर पप्पी लेते हुए मेरे होठ को चूमने लगा। और देखते ही देखते उसने मेरे होठो को अपने मुझ में भर लिया। वो मेरे मुलायम और रसीली होठो को अपने मुह में लेकर चूसते हुए काटने लगा। और मैं बेकाबू होने लगी और उसे कसकर अपने बाँहों में भर लिया और उसके होठो को बहुत मस्ती से पीने लगी।
जब मै उसकी होठो को पी रही थी तो ऐसा लग रहा था की जैसे कोई शराब का प्याला हो और मुझे नशा सा चड रहा था। बहुत देर तक हम एक दूसरे के होठो को पीते रहें।
बहुत देर के बाद उसने मेरे होठो को पीना बंद कर दिया और फिर अपने हाथो को मेरे टॉप के अंदर डाल कर मेरे मम्मो को मसलने लगा। और कुछ ही देर में मेरे टॉप को निकाल दिया और मेरे चूचियो के बीच में अपने सिर को लगा कर चूमने लगा और फिर देखते ही देखते मेरे चूचियो को अपने हाथो से दबाते हुए पीने भी लगा। और मै जोर जोर के सिसक सिसक कर मचलने लगी। फिर उसने मेरे मुलायम सफ़ेद संगमरमर दूध को मुंह में भरकर चूस चूसने लगा, मुझे भी मजा दे रहा था और खुद भी वो अपना भी मजा ले रहा था। “……आहहहह्ह्ह्ह… अई…अई……दबाओ!… दबाओ….. बहुत मजा आ रहा है” मैंने कहा। ये सुनकर तो अनमोल ने तो मेरे मम्मो को और तेज से मेरे मम्मो को हाथ में पकड़कर दबाने लगे और मुंह में लेकर चूसने लगे। मेरी तो जैसे जान ही निकली जा रही थी।“ आह्ह्ह अह्ह्ह …. माँ… उनहू उनहू …. उहह्ह्ह्हह…. उ उ उ…चूसो चूसो…..और चूसो…मेरे मम्मो को….अच्छे से चूसो” मैं बार बार यही कह रही थी।
लगभग 30 मिनट तक मेरे मम्मो को पीने के बाद अनमोल धीरे धीरे मेरे चूत की तरफ बढ़ने लगा। जैसे जैसे वो मेरी चूत तरफ बढ़ रहा था मैं जिस्म की आग में जल रही थी। अनमोल मेरे पेट को चुमते हुए मेरे चूत तक पहंच गया और मेरे लोवर को निकाल दिया और मेरी काली पैंटी को अपने हाथो से सहलाते हुए मेरे पैंटी को भी निकाल दिया। मेरी चमकती हुई चूत को देख कर वो देखता ही रह गया। उसने पहले तो मेरी चूत को अपने हाथो से सहलाते हुए अपनी उंगली को मेरे चूत के अंदर धीरे धीरे से डालते हुए मेरी चूत को मसलने लगा जिससे मैं भी और भी कामुक गई थी और अपने मम्मो को जोर जोर से दबाने लगी और सिसिकने लगी। अनमोल मेरी फुद्दी में बार बार अपनी उंगली को डाल रहा था, पहले तो कुछ देर मुझे बहुत मज़ा आ रहा था लेकिन कुछ देर बाद जब अनमोल अपनि दो और तीन उंगलियों को मेरी चूत में डालने लगा तो मैं तड़पने लगे और ऐसा लग रहा था जैसे मैं पागल हो जाउंगी क्योकि मेरे चूत से पानी निकलने वाला था और मैं मैं सिसकते हुए तड़प रही थी और कुछ देर बाद मेरी चूत से पानी की धारा निकलने लगी और अनमोल ने मेरे चूत के पानी को पीते हुए  लेने लगा।

मेरी फुद्दी के पानी निकालने के बाद उसने अपने लंड से मेरे चूत को चूमने लगा और फिर कुछ देर बाद उसने अपने लंड को मेरी फुद्दी में डालने लगा, लेकिन मेरी कुवारी चूत बिलकुल भी खुली नहीं थी, जिससे अनमोल का लंड मेरे चूत के अंदर नही जा रहा था। उसने फिर से अपने लंड को मेरी चूत में डाला लेकिन उसका लंड बार बार मेरी चूत से फिसल जाता। कुछ देर बाद अनमोल ने लंड को पकड़ कर मेरी चूत में लगाते हुए जोर का झटका दिया जिससे उसका लंड अंदर चला गया लेकिन मेरे और अनमोल दोनों के मुह से चीख निकल पड़ी। मैंने अपने फुद्दी को छुआ तो मेरी चूत से खून निकलने लगा। मैं थोडा डर गई लेकिन फिर अनमोल ने मेरे चूत से खून को पोछा और फिर उसने मुझे फिर से चोदना शुरू किया। पहले कुछ देर उसने धीरे धीरे से मेरी चुदाई की क्योकि मेरी चूत बहुत टाईट थी और मुझे दर्द भी बहुत हो रहा था। लकिन कुछ देर बाद जब मेरी चूत कुछ ढीली हुई तो वो मेरी चूत की खूब तेजी से चुदाई करने लगा। उसका लंड मेरी चूत को फाड़ते हुए मेरी फुद्द्दी के अंदर तक जा रहा था ऐसा लग रहा था की वो मेरी चूत की गहरे को नाप रहा था। कुछ देर बाद मेरी चूत से सफ़ेद पदार्थ निकला और अनमोल के लंड में पूरी तरह से लग गया और फिर वो मुझे बड़ी तेजी से चुदाई करने लगा। अनमोल ट्रेन की रफ़्तार से मेरी चुदाई करने लगा जिससे मैं अपनी चूत को मसलती हुई जोर जोर से …,… आऊ….. आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह….सी सी सी सी.. हा हा हा…..ही ही ही ही ही…..अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह…. उ उ उ.. …..ऊऊऊ ….ऊँ..ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ….. ओह्ह ओह्ह ओह्ह्ह…… मम्मी आः अआहह्ह्ह …. उउम उम उम … उफ़ उफ़ उफ़ उफ्फ्फ्फ़…. करने चीखने लगी। मैं तो दर्द से पागल हो रही थी लेकिन अनमोल लगातार मेरी चुदाई किये जा रहा था। कुछ देर बाद अनमोल का माल निकालने वाला था तो उसने अपने लंड को मेरी चूत से निकाल लार अपने लंड को मेरे चुचियों के बिच में रख कर मेरे मम्मो को दंबा कर मेरे मम्मो को पेलने लगा। कुछ देर लगातार मेरे मम्मो को चोदने से उसके लंड से उसके शुक्राणु निकल कर मेरे गले पर गिर गया। इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम 
मेरी चुदाई के बाद भी उसने बहुत देर तक मेरे मम्मो और चूत से खेला। दोस्तों मैं उम्मीद करती हूँ आप सभी को मेरी कहानी पसंद आई होगी।

कहानी शेयर करें :