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ढाबे पर मैंने तीन लंड अपनी चूत, गांड और मुँह में एक साथ लिए

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New Sex Stories दोस्तों मेरा नाम निशा है और मैं एक मेरिड लेडी हूँ. मेरी शादी को 4 साल हो चुके है और मेरे पति एक सेल्समेन है और यही वजह से वो कभी कभी दुसरे शहरो में ही रात बिताते है और उन दिनों में मेरी चूत को ठंडा होने का मौका नहीं मिलता है. मैं स्वभाव से काफी होर्नी यानी की चुदक्कड हूँ और मेरे को हमेशा लंड लेने की जल्दी रहती है. शादी के पहले भी मैंने बहुत लोगों के साथ सेक्स किया था. और मैं नए नए लंड से चुदने की फेंटसी रखती हूँ. जब भी मेरे पति अपने सेल्स के काम से बहार हो तो मैं अय्याशी वाले काम चालू कर देती हूँ. और यही वजह से मैंने पति को कह के जो फ्लेट ख़रीदा वो शहर के एंड एरिया में था ताकि मैं अपनी अय्याशी करती रहूँ! इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम
ऐसे ही एक दिन पति घर पर नहीं थे और मेरी चूत गरम हुई. पहले सोचा अनिकेत को बुला लूँ जो मुझे बहुत बार चोद चुका है. लेकिन फिर सोचा की आज कुछ नया करती हूँ.

मैंने अपने घर के पहने कपडे निकाले और स्कर्ट पहन ली, टॉप के ऊपर एक शाल डाल के निकल पड़ी मैं. मैंने अंदर ना ब्रा और ना ही पेंटी पहनी थी. भला कौन पेंटी और ब्रा को खोलने में समय बर्बाद करे, सोचा कोई मिला तो जल्दी से उसका लंड ले के निकल लुंगी. घर में पति के ड्रावर से एक सिगरेट का पेकेट और शराब की छोटी बोतल ले ली. और लंड को खोजने मैं घर से निकल गई. घर के सामने एक गली हैं वहां अक्सर कुछ बदमाश जैसे लोग शराब पीते है. मुझे लगा वहां कोई मिल गया तो ज्यादा घूमना नहीं पड़ेगा. लेकिन साला आज कोई नहीं था जब मेरी चूत गरम थी. इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम
मैंने सिगरेट सुलगा ली और कस खींचते हुए शराब पिने लगी. फिर मैं मेन सडक की तरफ बढ़ी की कोई बाइक वाला या कार वाला मिला तो लिफ्ट के बहाने लंड ले लुंगी.
लेकिन ठंडी की वजह से आज वहां पर भी कोई बाईक नहीं दिखा. सिर्फ बड़े मालवाहक ट्रक की आवाजही चालू थी. मैं वही मुतने के लिए बैठ गई अपने स्कर्ट को ऊपर कर के. मेरे को पता था की जब कोई ट्रक निकलेगा तो उसकी लाईट में मेरी गांड ड्राईवर को जरुर दिखेगी. और तभी एक ट्रक की ब्रेक की आवाज आई. ट्रक को देख के मैं मूतना ख़तम कर के खड़ी हुई. ड्राईवर और उसका चेला मेरे पास आया लेकिन मैंने जैसे उन्हें देखा ही ना हो वैसे पेश आई और सिगरेट के कस खींचती रही.
ड्राईवर ने मेरे को बोला: मेडम कहाँ जाना है आप को, हम छोड़ दे?
मैंने उसे देखा और कहा, आगे ढाबे पर जाना है, छोड़ दोगे?
ड्राईवर मेरे को ऊपर से निचे तक देख के बोला, चलो चढ़ जाओ गड्डी में.

मैं उसकी ट्रक में चढ़ी और वो भी मेरे पीछे पीछे ऊपर चढ़ा और मैंने देखा की वो बार बार मेरी गांड को टच कर रहा था चढ़ते वक्त. और फिर उसने मेरे को नाम पूछा तो मैंने बताया की मेरा नाम निशा है.
मैंने उसको उसका नाम पूछा तो उसने बोला मेरा नाम बिट्टू है और आगे ड्राईवर साहब है उनका नाम कुंदन सिंह है.
मेरे से ट्रक में सही ढंग से चढ़ा नहीं गया, तो मैंने उसे बोला. तो उसने कहा की रुको मैं मदद करता हूँ. और ये कह के उसने मेरी गांड पर हाथ रख के मेरे को ऊपर धकेला. अंदर देखा तो ड्राईवर एक मच्योर सरदार जी था जिसकी बॉडी एकदम हट्टी कट्टी थी. उसके मुहं से देसी दारु की स्मेल आ रही थी. उसने मेरे को देख के पूछा मेडम किधर जाना है?
मैंने कहा, आगे ढाबे पर.
ड्राईवर कुंदन ने लुंगी पहनी हुई थी और वो काला लेकिन एकदम मोटे बांधे का आदमी था. शक्ल से ही हरामीपन टपक रहा था उसके. मैंने उस से पूछा, क्या मैं यहाँ सिगरेट पी सकती हूँ?
कुंदन बोला: पी ले हम लोग बड़े दिलवाले है, पीछे बिट्टू को भी एक दे देना.
मैंने और बिट्टू दोनों ने एक ही माचिस से सिगरेट जलाई और वो साला टॉप में से मेरे बूब्स को झाँक रहा था. तभी ढाबा आ गया और ड्राईवर ने ट्रक की ब्रेक लगा दी और हम सब निचे उतर पड़े. और जब ड्राईवर ने मेरे को हाथ दे के निचे उतारा तो उसने मेरे बूब्स को जोर से दबा दिए. और फिर हम तीनो ही ढाबे की तरफ चल पड़े. कुंदन जा के ढाबेवाले से बातें कर रहा था. और वो दोनों ही बड़े हरामीवाली स्माइल से मेरे को देख रहे थे. और सालों की आँखे बार बार मेरे बूब्स पर ही आ रही थी. मैंने भी सिगरेट के धुंए को हवा में उड़ाते हुए उसे किसी पेशेवर रंडी के जैसे देखा.
अब वो ढाबेवाला मेरे पास आ के बोला: कितने पैसे चाहिए वो बता.
मैं कहा पैसे नहीं शौकिया करना है.
और वो लोग अब मेरे को ले के ढाबे के पीछे आ गए. वो कमरा काफी छोटा और गन्दा था और साइड में एक पलंग पड़ा हुआ था जिसके ऊपर एक मैली चद्दर पड़ी हुई थी. ढाबेवाले ने मेरे को वहां बिठाया.
कुछ देर में बिट्टू शराब की बोतल और ग्लास ले के आया. मेरे को उन्होंने पेग बनाने को कहा. और फिर हम सब लोग मिल के पिने लगे. हम लोगो ने वो गन्दी स्मेल वाली देसी दारु गटक ली और फिर वो लोग मेरे साथ गन्दी गन्दी बातें करने लगे. और साथ में मेरी चूत भी अब गरम होने लगी थी.

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अब ढाबेवाला जिसका नाम संतोष था वो अपनी लुंगी और चड्डी को निकाल के मेरे पास आ गया. उसका लंड एकदम मोटा और काला था और कम से कम 6 इंच का तो होगा ही, वो कहते है ना गबरू लंड वैसा ही. इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम
उसने लंड को मेरे मुहं के पास रख के कहा, चल रंडी चूस मेरा लोडा, मादरचोद.
उसके लंड से पेशाब और पसीने की स्मेल आती थी और उस स्मेल की वजह से मेरी चुदास जैसे और ही बढ़ने लगी थी. मैंने अपने मुहं को खोल दिया और इस बड़े लंड को आधे से ज्यादा भर के चूसने लगी. वो लंड इतना मोटा था की आधा चूसने पर भी मेरे को दर्द सा होने लगा था.
और उतने में कुंदन सिंह भी अपना लंड निकाल के मेरे पास आ गया. बिट्टू भला पीछे कैसे रहता ये सब देख के. मैं एक लंड को चूस थी और बाकी के दो लंड को मैंने अपने हाथ में पकड लिए थे. मैं उनेह हिला रही थी.
कुंदन का लंड संतोष के जितना लम्बा नहीं था लेकिन वो काफी मोटा था. और बिट्टू तो अभी 20 साल का जवान लौंडा था जिसका लोडा 5 इंच का था. वो तीनो के लंड मैंने एक एक कर के चुसे और खूब हिलाए. बिट्टू काफी उत्साहित हो चूका था. वो मेरे बोबे दबाता था और मेरे बालों में भी अपने लंड को घिसता था.
सब से पहले मेरी गरम चूत में लंड डालने का मौका संतोष को ही मिला, शायद इसलिए क्यूंकि वो इस जगह का मालिक था. वो निचे चद्दर के उपर लेट गया. और मेरी चूत को कुंदन ने ऊँगली से हिला हिला के चिकनी कर दी. मैं अपनी गीली चूत को ले के उसके लंड पर बैठ गई. बाप रे कितना गबरू लंड था वो तो! मेरे को तो जैसे एकदम से झुनझुनी सी हुई चूत के अंदर. बिट्टू ने मेरे बूब्स को मुहं में लिया और वो उन्हें चूसने लगा.
कुंदन भी अपने लौड़े को मेरे सामने हिला हिला के जैसे दिखा रहा था की कुछ देर में मेरे को उस से भी चुदना है. और फिर साले मादरचोद हरामी ने मुहं को कस के खुलवा दिया और मुहं में भर दिया मेरे.

संतोष ने मेरी चुदाई कुछ 10 मिनिट तक की और उसके लंड का पानी निकल पड़ा. वो लंड को निकाल के खड़ा हो गया. अब कुंदन सिंह निचे लेट गया और मैं उसके ऊपर. मैं अब की अपनी छाती उसकी तरफ कर के लेटी हुई थी उसके ऊपर. उसका मोटा लंड मेरे अंदर गया और मैंने कराह दिया. पीछे बिट्टू आ गया और वो निचे हो के मेरी गांड के साथ खिलवाड़ करने लगा. उसका लंड एक मिनिट के बाद मेरे गांड के होल पर टच होने लगा था और फिर साले ने मेरी गांड के अंदर लंड को धकेल दिया. उसका लंड 3 इंच जितना मेरी गांड में हो गया था. आगे से कुंदन सरदार मेरे को चोद रहा था. और पीछे से उसका हेल्पर मेरी गांड मार रहा था. वो दोनों जोर जोर से अपने लंड को मेरी होल में अंदर बहार कर रहे थे. तभी संतोष का भी फिर से खड़ा हो गया और वो मेरे को लंड मुहं में देने के लिए आ गया. इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम
संतोष को ब्लोव्जोब देने लगी थी मैं अब. और वो दोनों तो अभी भी जोर जोर से मेरी ठोकने में लगे हुए थे. और दोनों में पहले बिट्टू का पानी छूटा. उस साले ने आधा पानी मेरी गांड में और आधा मेरे कूल्हों के ऊपर निकाला. मेरी गांड पर उसके गरम गरम वीर्य का स्पर्श बड़ा मादक था. और वो जैसे ही हटा की संतोष आ गया मेरी गांड मारने के लिए.
उसका लंड गांड में लेना मेरे लिए बहुत ही पेनफुल था. लेकिन बिट्टू के वीर्य से चिकनी हुई गांड में लंड घुस ही गया उसका भी. वो अब जोर जोर से मेरी गांड मार रहा था. निचे कुंदन सिंह आराम से लेटा हुआ था बस. वो हिल नहीं रहा था. ऊपर संतोष गांड मार रहा था वही झटको में वो चूत चुदाई कर जो सकता था.

संतोष अब जोर जोर से मेरी गांड ठोकने लगा था. और पांच मिनिट के अंदर वो भी मेरी गांड में ही झड़ पड़ा. उसने अपने लंड को बहार निकाला और एक एक बूंद को मेरे बदन पर ही छोड़ दिया. निचे कुंदन सिंह को भी अब ताव आ गया था. वो भी मेरे को जम्प करवा करवा के चोदने लगा था.
और दो मिनिट के बाद उसके लंड ने भी मेरी चूत की आग को शांत सा कर दिया. वो अब उठा और बोला, बिट्टू जा और शराब ले के आ, आज पूरी रात इस रंडी को चोदेंगे.
संतोष ने मेरे को कहा, कुछ खाएगी तू, मंगवाऊ क्या?   इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम
मैंने हा कहा तो उसने आगे ढाबे से कुछ खाना  मंगवा लिया. 
बिट्टू शराब और खाना ले के आ गया. मैंने शराब नहीं पी और और सिर्फ खाना ही खाया. पांच मिनिट के बाद वो लोग एक बार फिर से ड्रिंक कर के रेडी हो गए मेरी चुदाई के लिए. और मैंने खाते हुए ही कुंदन के लंड को चूसा. और फिर वो तीनो ने सुबह के पांच बजे तक मेरे को ना जाने कितनी बार चोदा और मेरी गांड भी मारी.
फिर कुंदन सिंह और बिट्टू अपनी ट्रक ले के चले गए और संतोष अपनी कार में मेरे को घर छोड़ गया. और उसने अपना नम्बर मेरे को दिया और बोला, जब भी तेरा मन लंड लेने को हो टी मेरा को बुला लेना या मेरे ढाबे पर आ जाना!

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