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दोस्त की माँ को गाँव में चोद दिया, उसने मुझे मुठ मारते हुए पकड़ लिया था

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मेरी उम्र 19 साल हे और ये बिलकुल सच्ची सेक्स की कहानी आज मैं आप को हिंदी में बताने के लिए आयाहूँ. मेरा दोस्त दुबई में रहता हे. घर में माँ के अलावा उसका बाप जो की  अब रिटायर्ड हे. आंटी की उम्र 38-40 के करीब हे.,मैं अक्सर अपने इस दोस्त के घर आता जाता था. सितम्बर 20, 2016 को मेरे दोस्त के पापा किसी दोस्त की बेटी की शादी में जा रहे थे. उन्होंने मुझे बुला के कहा अमित प्लीज़ मैं जाऊं तो भेंस को चारा और पानी दे देना, मैं दो दिन में आ जाऊँगा.

21 सितम्बर को मैं सुबह 11 बजे उनके घर गया तो दोस्त की माँ बाथरूम में नाहा रही थी. मैंने उनकी भेंसो को पानी पिलाने लगा. मैं भेंसो को पानी पिलाने के लिए पानी की पाइप लगाने के लिए बाथरूम के पास गया. वहां मैंने देखा की बाथरूम में नहाती हुई आंटी साफ़ दिख रही थी. उसका गोरा बदन देख के मेरा लंड खड़ा हो गया. मैं आंटी को देखा तो उसने अपने बूब्स और चूत के ऊपर साबुन से झाग किया और वो मस्त ऊँगली कर के पानी से धोने लगी अपनी चूत को. भेंसो को पानी पिलाने के बाद मैंने उन्हें चारा डाला. इतने में आंटी भी नहा के बहार आ गई. मेरी आंखो के सामने आंटी का संगेमरमर सा नंगा बदन घूम रहा था,

आंटी मेरे लिए चाय बनाने लगी और मैं बाथरूम में हाथ पाँव धोने के लिए चला गया. यहाँ पर एक कौने में आंटी की ब्रा टंगी हुई थी. आंटी की ब्रा को देख के मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. मैं वही पर अपने लंड को निकाल के मुठ मारने लगा. अभी तो मैंने शरु ही किया था की आंटी भी बाथरूम में चली आई. वो चाय के बर्तन धोने के लिए आई थी. उसने मुझे मुठ मारते हुए पकड़ लिया. मेरा शरीर कांपने लगा और मेरा लंड एकदम बेजान सा हो गया. आंटी भी ये सब देखकर एकदम गुस्सा गई.

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वो मुझे डांटने लगी: छी कितने गंदे हो तुम, यहाँ मेरे बाथरूम में ये सब कर रहे हो.

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आंटी को देख के मैंने कहा माफ़ करना आंटी.

वो बोली, ऐसा क्या देख लिया तूने जो लंड खड़ा हो गया.

पहले तो मैं कुछ नहीं बोला लेकिन फिर जब वो बहुत बोली तो मैंने कहा आप को नहाते हुए देखा इसलिए खड़ा हो गया!

आंटी ये सुन के थोड़ी ढीली सी हुई और बोली, मैं तुझे अच्छी लगती हूँ?

मैंने कहा आंटी आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो!

वो अपनी हंसी रोक नहीं सकी और बोली, चल चुप कर अन्दर चल के चाय पी ले.

मै समझ गया की आंटी को अच्छा लगा की मैं उसके नाम की मुठ मार रहा था. चाय पीते हुए मैं आंटी को देखने लगा तो वो बोली, तेरी कोई सहेली नहीं हे?

मैंने कहा नहीं हे कोई भी आंटी.

आंटी बोली, तुम्हारी उम्र के लड़के तो अब सब कुछ कर लेते हे और तू हिलाने में ही रह गया.

मैंने कहा आंटी कोई मिला ही नहीं.

वो बोली, कैसी चाहिए तुझे?

मैंने कहा, बस खुश कर सके मुझे.

मैं आंटी के घर से निकलने को ही था की वो बोली, रुक जाओ दोपहर का खाना खा के ही जाना.

मैंने कहा आप अंकल के साथ नहीं गई शादी में?

वो बोली, नहीं वो जल्दी में थे और मैं रात में किसी और के घर रुकना पसंद नहीं करती हूँ.

आंटी मुझे घर में बिठा के किचन में रोटी बनाने के लिए चली गई. पहले थोड़ी देर मैं टीवी देखता रहा. और फिर आंटी के पास किचन में गया. आंटी ने देखा तो वो बोली, क्या हुआ?

मैंने कहा, कुछ नहीं.

वो बोली, फिर यहाँ क्यों आ गये?

मैंने कहा आप को देखने.

अच्छा, क्या देखना हे?

मैंने कहा सब कुछ!

वो बोली, हिम्मत हे?

मैंने कहा अभी कुछ देर पहले ही देखा तो हे.

मैं जान गया था की आंटी भी होर्नी हो चुकी थी जब मैंने उसे बोला की आप के नाम की मुठ मार रहा था. और इसलिए ही उसने मुझे खाने के लिए रोका था. वो भी शायद मेरे लंड से अपनी चूत की चुदाई करवाना चाहती थी.

आंटी ने बोला यही देखेंगा?

मैंने उसके पास चला गया और पीछे से उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया. मैंने आंटी के बालों में हाथ घुमाते हुए उसके होंठो के ऊपर किस कर दिया. इस उम्र में भी आंटी का बदन एकदम सेक्सी था और उसका फिगर किसी लड़की के जैसा सुडोल था. मेरा लंड पीछे से उसकी गांड को टच हो रहा था. वो भी मस्तियाँ उठी थी. उसने किस छुड़ा के मुझे कहा, बहुत बड़ा हे तुम्हारा. जब हला रहे थे तब मैंने देखा था.

मैंने आंटी को कहा, आप ने भी तो अपनी लाइफ में बड़े बड़े लिए ही होंगे ना.

ये कहते हुए मैं उसके बूब्स को दबाने लगा. वो हंसने लगी और बोली, तेरे अंकल के एक दोस्त थे जब हम लोग आर्मी क्वार्टर में रहते थे. उसका 10 इंच का था जिस से मैं चुदी थी दो बार. और उस लंड के बाद में तेरा नम्बर आता हे. मेरा लंड आंटी की गांड के खड्डे में चिभ रहा था. वो आह आह करते हुए अपनेआप को आगे कर रही थी.

मैंने उसके दोनों बूब्स को पकड़ लिए और उसे वही पर जकड़ लिया. आंटी ने मुझे कहा, चलो न जल्दी से निकालो ना इसे बहार.

मैंने बूब्स को जोर से पकड के कहा, आप खुद ही निकाल लो ना!

आंटी ने मेरी जिप खोल के लंड को बहार निकाला और उसे हाथ से हिलाने लगी. मैंने आंटी की सलवार को पकड़ के फाड़ दिया. अन्दर उसने गुलाबी पेंटी पहनी हुई थी. आंटी की पेंटी को भी मैंने फाड़ दिया. फटी हुई सलवार और पेंटी के कुछ निशान ही बाकी थे आंटी के बदन पर. फिर मैंने उसे अपना लंड पकडवा के फिर से उसके बूब्स को मसल के चुसे.

आं टी मस्तियाँ रही थी और बोली, मुझे मुहं में लेना हे.

मैंने कहा, ले लो न किसने रोका हे.

मैंने उसे छोड़ दिया और वो घुटनों के ऊपर आ बैठी. मैंने आंटी के मुहं के पास लंड को रखा और आंटी उसे अपने मुहं में भर के चूसने लगी. आंटी बड़े ही सेक्सी अंदाज में मुझे ब्लोव्जोब दे रही थी. पुरे लंड को वो अपने मुहं में भर के चुस्से लगा रही थी. मैंने आंटी के बाल पकड़ लिए और उसके मुहं को चोदने लगा. आंटी को भी बड़ा मजा आ रहा था पुरे लंड को गले तक भर के.

पुरे 10 मिनिट तक मैंने आंटी के मुहं को चोदा. और फिर मुहं के अन्दर ही मलाइ छोड़ी. आंटी सब पी गई और बोली, बड़ा गाढ़ा हे तेरे लंड का पानी तो.

अब मैंने आंटी को प्लेटफॉर्म के ऊपर चढ़ा दिया और उसकी टाँगे फैला दी. सलवार का एक टुकड़ा अभी भी लटक रहा था जिसे मैंने खिंच के दूर किया. और फिर मैंने आंटी के बुर को अपनी जबान से चाटना चालू कर दिया. आंटी को बड़ा मजा आ गया चूत चटवा के. मैंने भी जबान अन्दर तक डाल के ऐसे चूसा की आंटी एकदम पागल हो गई. वो जोर जोर से कराह रही थी और मुझे लंड चूत के अंदर डालने के लिए कह रही थी.

आंटी: अब जल्दी से डाल दे अपने लंड को मेरी बुर के अन्दर और फाड़ दे इसको अपने लम्बे लौड़े से.

मैंने आंटी को वही प्लेटफोर्म पकडवा के खड़ा किया और पीछे से अपने लंड को उसकी चूत के अन्दर डाल दिया. आंटी कराह उठी मेरे लंड के धक्के से. मैंने भी पूरा जोर लगा के आधे से उपर लंड एक ही बार में अन्दर कर दिया था. फिर मैंने आंटी के बूब्स पकड लिए और उसे चोदने लगा. आंटी को अभी मैं सिर्फ आधे लंड से ही चोद रहा था. आंटी जब मेरे आधे लंड से सेट हो गई तो मैंने उसकी गांड को पकड़ के पूरा लंड अन्दर धकेल दिया. आंटी भी अपनी गांड के धक्के देते हुए चुदवा रही थी. मैंने आंटी की हिलती हुई गांड को देखा तो उसे भी चोदने का मन हो गया. मैंने अपनी एक ऊँगली को गांड में डाल दी और आंटी की चूत को और भी जोर जोर से चोदने लगा. मैंने लंड को निकाल के आंटी की गांड में देना चाहा. लेकिन आंटी को गांड नहीं मरवानी थी इसलिए मैंने लंड को निकाल के वापस चूत में डाल दिया.

और फिर बड़े जोर जोर से धक्के लगा के उसे चोदने लगा. आंटी भी एकदम मस्तियाँ उठी थी. और अपनी गांड को हिलाने लगी थी. मेरा होने को ही था. मैंने आंटी को कहा तो उसने कहा की मेरी चूत के अन्दर ही अपना पानी छोड़ दो. मैंने लंड को और जोर से चूत में ठोकने लगा. आंटी की आह आह्ह अह्ह्ह्ह ओह ओह निकल रही थी. मैं आंटी की गांड को चांटे लगाते हुए उसकी बुर के अन्दर झड़ गया. आंटी को भी हाश हुई और मुझे भी आजादी के जैसा लगा. फिर मैं और आंटी साथ में ही नहाने के लिए चले गए. बाथरूम में आंटी ने मुझे वापस ब्लोजॉब दिया. अंकल को आने में काफी घंटे बाकी थे अभी. और आंटी ने साफ़ कह दिया जब तक तेरे अंकल नहीं आते हे तब तक यही पर रह जा. वैसे मैं भी तो वही चाहता था.

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