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कबाड़ीवाले ने मुझे चोदकर चूत का मैल साफ किया

Sex Stories दोस्तों मेरा नाम जोया ठाकुर है। मैं 32 साल की शादी शुदा औरत हो। मुझे सेक्स करन बड़ा पसंद है। जब मैं साड़ी पहनकर और कसा ब्लाउस पहनकर पूरा श्रृंगार करके बजार जाती हूँ तो सारे मर्द मुझे ही ताड़ने लग जाते है। मैं हूँ ही इतनी आकर्षक। मेरी आँखें बहुत सुंदर है। बड़ी बड़ी झील सी नीली आँखे है। सारे मर्द मेरी आखो में देखकर फ़िदा हो जाते है। दोस्तों शादी के बाद ही मुझे चुदने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
मैं श्रावस्ती में रह रही हूँ। मेरे पति पुलिस में नौकरी करते है। उनकी पोस्टिंग ***** में है। मैं अभी अपने देवर के साथ किराए के मकान में रहती हूँ। मेरे सास ससुर गाँव में रहते है जो मेरे घर से 40 किमी दूर है। अभी इतिहास से MA भी कर रही हूँ। आपको क्या बताऊं अपनी जिन्दगी के बारे में। एक तो मेरी शादी नही हो रही थी। मैं जवान और खूबसूरत तो खूब थी पर पापा बहुत गरीब थे। दहेज़ था नही। शादी नही हो रही थी और कोई चोदने वाला भी नही था। अपनी चूत में ऊँगली करके ही काम चला लेती थी। फिर दुर्जोय मुझे देखने आये और पसंद कर लिया। जब मुझसे अकेले में बात करने आये तो मैंने कह दिया की शादी में आपको पैसा नही मिलेगा। सिर्फ मैं ही मैं मिलूंगी। मैं उनको कुछ जादा ही पसंद आ गयी। बिना एक पैसा लिए दुर्जोय ने मुझसे शादी कर ली। सुहागरात पर मुझे खूब चोदा। चोद चोदकर मेरी चूत का मक्खन और पानी निकाल दिया। 2 महीने तक हम दोनों ने खूब जवानी के मजे लूटे। मैंने तो सोचा था की शादी के बाद लंड की कभी कमी न होगी पर दुर्जोय का ट्रांसफर सहारनपुर हो गया। ये जिला हरिद्वार के पास है और मेरे घर से 700 किमी दूर है।

दुर्जोय अपनी नौकरी पर चला गया। अब तो मेरे दिन और राते रेगिस्तान जैसी बंजर हो गयी। दूसरे मेरा किराए का मकान ऐसे जगह था की दूर दूर कोई घर ना था। अपने देवर अनिल से बात करके दिन काटती थी। दोस्तों आप लोगो को तो पता ही होता है की पुलिस वाली नौकरी में एक मिनट को चेन नही मिलता है। चार चार दिन बीत जाते मेरे पति का फोन ही नही आता। हर रविवर एक कबाड़ीवाला मेरे घर के सामने से निकलता।  आप यह चोदने की स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है। 
“पुराना टीन कबाड़ बेच डालो!! रद्दी लोहा बेच डालो!!” वो मुंह चबा चबाकर कहता। धीरे धीरे मेरी उससे अच्छी दोस्ती हो गयी। वो अभी लड़का ही था। शायद अभी अभी 18 साल का हुआ था। बच्चा जैसा लगता था। मैंने उसे कई बार रद्दी अखबार बेचा था। तभी मेरी उससे दोस्ती हो गयी। अगली रविवार मेरा देवर अनिल सुबह की कोचिंग पढने चला गया। घर पर अब कोई नही था। कितना अजीब लग रहा था। कितना सन्नाटा था सब तरफ।
“पुराना टीन कबाड़ बेच डालो!! रद्दी लोहा बेच डालो!!” मैंने फिर से आवाज सुनी। जल्दी से बाहर निकल आई।
“दीदी!! कुछ बेचना है क्या” वो कबाड़ीवाला बोला
“अरे इधर आ छोटू!!” मैंने कहा।
मैं उसे प्यार से छोटू कहकर बुलाती थी। वो मेरे पास आ गया। मैं उससे बात करने लगी। छोटू की माँ बचपन में गुजर गयी थी। बाप शराब पीने लगा। इसलिए पेट पालने के लिए उसे स्कुल जाने की उम्र में कबाड़ बेचने वाला काम करना पड़ा। मैं छोटू के लिए चाय बनाने लगी। उसे कुर्सी पर बैठने को कहा। मैंने नीली मैक्सी पहनी थी। मैं सुंदर और हॉट माल लग रही थी। मेरा फिगर 36 30 34 का था। आप लोग तो जानते है की 36” के दूध कितने बेताब होते है गेंद की तरह। मैक्सी के उपर से मेरे आकर्षक बूब्स छोटू को साफ़ साफ़ दिख रहे थे। मैंने उसे चाय लाकर दे दी। वो कप उठाकर पीने लगा। मैं उसके सामने इधर उधर आ जा रही थी। छोटू मेरे दूध को घूर घूर कर देख रहा था। फिर मैं उसके लिए दालमोट भी ले आई।
“और बता छोटू!! तेरी जिन्दगी कैसे कट रही है???” मैंने पूछा
“कुछ ख़ास नही दीदी!! बस ऐसी ही। पर आपकी तो मस्त होगी” वो बोला
“कहा मस्त है। तुम्हारे भैया तो सहारनपुर में है। और मैं अकेली हूँ कोई बात करने वाला भी नही। देवर तो सुबह शाम कोचिंग ही आता जाता रहता है” मैंने कहा
“तब तो दीदी रात में मजा भी नही आती होगी” छोटू बोला
मैं तो सुनकर चौंक गयी।   आप यह चोदने की स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है। 
“बदमाश!! शरम नही आती। मैं तुजसे उम्र में कितनी बड़ी हूँ। ऐसी बात करता है” मैंने कहा और उसका कान पकड़ लिया। ऐठने लगी।
“दीदी!! वैसे अब मैं भी जवान हो गया हूँ” छोटू फिर शरारत करके बोला
मुझे गुस्सा आ गया। तभी वो जल्दी से खड़ा हो गया और मुझे भी खड़ा कर दिया और खींचते हुए एक दिवार के किनारे जाकर खड़ा कर दिया। उसने मेरे हाथ पकड़ लिए और मेरे मुंह पर अपना मुंह रख दिया। जल्दी जल्दी किस करने लगा। मेरी नीली मैक्सी के उपर उसने हाथ रख दिया और दूध जल्दी जल्दी दबाने लगा। बहनचोद!! मैं तो उसे बच्चा समझ रही थी।

वो तो असली चोदू मर्द निकला। उसने मुझे बोलने ही नही दिया और 10 मिनट तक मेरे रसीले होठ चूसने लगा। मेरे 36” के दूध पर अपने हाथो को गोल गोल घुमा रहा था। मैं तो “ओह्ह माँ….ओह्ह माँ…उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ….” करने लगी। उस बहन के लौड़े ने मेरी मैक्सी उपर उठा दी और अंदर हाथ डाल दिया। और चड्डी के उपर से चूत की सीधी दरार में हाथ से उपर नीचे ऊँगली करने लगा। वो सहला रहा था।
“भैया तो पता नही कब तुम्हारे पास आएँगे दीदी। आपको चुदना हो तो बताओ!!” छोटू सीधा मेरी आँखों में देखकर बोला
“नही!! ऐसी कोई बात नही है!!” मैंने कहा
अंदर से मेरा भी चुदने का बड़ा दिल था। वो फिर से चड्ढी के उपर से चूत घिसने लगा। उपर से नीचे और नीचे से उपर घिसता गया। मैं सरेंडर हो गयी।
“बोलो चुदोगी दीदी??” वो बोला और सीधा किसी चुदासे मर्द की तरह मेरी आँखों में देख रहा था
“नही !! मेरा मन नही है” मैंने फिर कहा
अंदर से चुदने का मन था।
इस बार वो भोसड़ी का पगला गया। उसने अपनी उँगलियों को मुंह में लगाकर गीला किया और हाथ मेरी मैक्सी के अंदर चड्डी में डाल दिया। मेरी चूत का रसीला छेद उसने ढूढ़ लिया और अपनी सीधे हाथ की 2 ऊँगली मेरी रसीली चूत में डाल दी। मैं असहाय होकर दीवाल के सहारे खड़ी थी। छोटू कबाड़ीवाला मेरी चूत फेटने लगा। जल्दी जल्दी अपनी उँगलियाँ अंदर बाहर करने लगा। मैं “ओहह्ह्ह…ओह्ह्ह्ह…अह्हह्हह…अई..अई. .अई… उ उ उ उ उ…”करने लगी। मुझे बड़ा मजा आ रहा था। छोटू बड़ा ठरकी मर्द था। जानता था की किसी औरत को चोदने के लिए कैसे पटाना है। वो रुका ही नही और जल्दी जल्दी दीवाल के सहारे खड़ा करके मेरी भोसड़ी में ऊँगली अंदर तक करने लगा। बाप रे!! मैं तो काँप ही गयी। धीरे धीरे मैं भी पट गयी। छोटू जल्दी जल्दी किसी कामुक आदमी की तरह चूत फेंट रहा था। मेरी बुर अपना सफ़ेद मक्खन छोड़ रही थी। छोटू मुंह में लेकर चाट जाता था। उस गांडू ने 5 मिनट मुझे दीवाल के सहारे खड़ा करके मैक्सी उठाकर चूत में ऊँगली की।
“अब बोलो दीदी!! मैं रुको जा जाऊ???” वो अपनी भवे उठाकर बोला
“तू बड़ा होशियार लौंडा है रे!! चल कमरे में चल” मैंने कहा
उसे लेकर बेडरूम में आ गयी। जबसे मेरा पति दुर्जोय अपनी ड्यूटी पर गया था, मैं इस बेडरूम में नही आती थी। क्यूंकि उसकी यादे ताजा हो जाती थी। इसी कमरे में मैंने दुर्जोय के साथ कितनी बार चुदाई की थी। इसलिए नही आती थी।  आप यह चोदने की स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है। 
“चलो दीदी लेट जाओ!! मैं कबाड़ी वाला हूँ। आज तुमको चोद चोदकर तुम्हारी चूत का सारा मैल साफ़ कर दूंगा” छोटू बोला
उसने मेरी मैक्सी बिलकुल उपर उठा दी।

“गांडू!! बाते तो बड़ी बड़ी कर रहा है। अगर मुझे सही से चोद ना पाया तो मेरे लंड में लाल मिर्च पाउडर भर दूंगी!! याद रखियो” मैंने भी कहा और अपनी सफ़ेद ब्रा के हुक खोल दिए। ब्रा उतार दी। छोटू ने मेरी मैक्सी बिलकुल उपर बूब्स के उपर समेट दी और मेरे आकर्षक दूध के दर्शन करने लगा। वो फटी हुई आँखों से दूध देख रहा था। मेरे बूब्स किसी गेंद की तरह उभरे हुए थे गोल गोल, सेक्सी और बेहद रसीले। छोटू देखकर पागल हो गया। हाथ लगाकर दूध को दबाने लगा। मैं “आआआअह्हह्हह…..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….” करने लगी। मेरी निपल्स भी बहुत सुंदर थी। छोटू निपल्स को चाटने लगा। फिर ऊँगली से मरोड़ने लगा। मेरे दूध को वो कसके दबा देता था और फिर मुंह में लेकर चूसने लगा। वो जल्दी जल्दी मुंह चला चलाकर चूसने लगा। मुझे पुराने दिन याद आ गये। मेरा पति दुर्जोय भी इसी तरह मेरे दूध पीता था। छोटू तो और बड़ा हरामी था। बहनचोद!! दबा दबाकर पी रहा था जैसे मैं उसकी रंडी रखेल हूँ। पर दोस्तों मजा भी खूब आ रहा था। उसने 10 मिनट मेरे बूब्स मुंह में लेकर चूसे।
अब मैं भी उसके लंड की प्यासी हो गयी। मैंने उसकी जींस खोली और उतार दी। उनका लंड कबसे पानी पानी हो रहा था। मैंने उसका अंडरवियर उतार दिया। उसे बिस्तर पर अपने बगल ही लिटा दिया। अब मैं उसकी जांघ को किस करने लगी। उसका लंड चूसने का बड़ा दिल था। छोटू का लंड 6” लम्बा और 2.5” मोटा था। मैं भी झुक गयी और उसकी गोलियों को हाथ से दबाने लगी। छोटू सी सी सी सी.. हा हा हा करने लगा। मैं उसकी गोलियों को बार बार दबा रही थी। मैं वासना से भर गयी और मुंह में लेकर रसगुल्ले की तरह चूसने लगी। छोटू का लंड काला था पर बहुत मोटा ताजा था। मेरी कामवासना को मिटाने के लिए काफी था। मैं जल्दी जल्दी मुंह दबाकर उसकी गोलियों चूस रही थी।
“अरी दीदी!! तुम तो हबशिन निकली। बजार की रंडियां भी इतनी गर्म नही होती” छोटू बोला
मैंने उसकी बात ही नही सुनी। और जल्दी जल्दी उसकी गोलियां चूसती रही। फिर 6” लंड को जल्दी जल्दी फेटने लगी। छोटू कई लड़कियों को चोद चूका था। उसका लौड़ा किसी 40 साल के मर्द की तरह था। सुपाडे की खाल पीछे की तरफ खिंची हुई थी जो बता रही थी की उसने बहुत चूत चोदी है। मैं भी असली रंडी बन गयी और जल्दी जल्दी फेटने लगी। छोटू हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” करने लगा। फिर मैं झुक गयी और लंड को मुंह में लेकर जल्दी जल्दी चूसने लगी। मैं सिर उठा उठाकर उपर नीचे होकर चूस रही थी। खूब आनन्द लिया। फिर मैं उसकी कमर पर बैठ गयी। उसके सांप जैसे लौड़े को पकड़कर मैंने ही चूत में डाल लिया।

धीरे धीरे लंड अंदर घुस गया। मैं ही उपर नीचे उछलने लगा। मैं चुदने लगी। छोटू ने मेरी मैक्सी को उपर उठा दिया। मेरे दूध लटक रहे थे। छोटू ने उसे हाथ में ले लिया और दबाने लगा। अब मुझे और नश मिलने लगा।     आप यह चोदने की स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है। 
मैं अपनी कमर को आगे पीछे करके चुदाने लगी। “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” मैं कहे जा रही थी और चुदाये जा रही थी। छोटू आआआअह्हह्हह….. कर रहा था। उसकी हालत बता रही थी की उसे बराबर के टक्कर वाली औरत मिली है। धीरे धीरे उसके 6” असलहे की मेरी गहरी चूत से दोस्ती हो गयी। अब तो मैं किसी बाजारू रंडी की तरह उछल उछल कर चुदवाने लगी। मैं काफी ऊँचा उछल रही थी। मेरे काले बाल खुले थे और हवा में लहरा रहे थे। इससे छोटू का लंड झटके से चूत में घुसता और निकलता था। दोस्तों जैसा आप लोग इंग्लिश ब्लू फिल्म में देखते है बिलकुल वैसा ही समा बन गया था। मैंने खुब उछल उछल कर चुदवाया। बेड भी चर चर करने लगा। लगा की अभी टूट जाएगा। आधे घंटे छोटू के लंड की सवारी की। वो लेटा रहा और मैं उसके लंड पर घोड़ी की तरह सवार होकर चुदवाती रही। 15 मिनट की मेहनत के बाद छोटू माल चूत में ही छोड़ दिया। अब तो मैं उसकी रखेल बन गयी हूँ। हर रविवार चुदवा लेती हूँ।

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