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आंटी ने मुझे गुलाम बना दिया और मेरे मुँह में पेशाब की

हेलो दोस्तों मेरा नाम कबीर सिंह हे और मैं 22 साल का जवान लड़का हूँ. मैं नार्मल लुक्स वाला हूँ. वैसे ये चुदाई की स्टोरी रियल नहीं हे. लेकिन बस मेरी फेंटसी हे. पर मैंने उसे आप लोगो के लिए एकदम मस्त तरीके से लिखा हे इसलिए आप लोग जरुर एन्जॉय करेंगे. कहानी की हिरोइन नीलम आंटी हे. जो की हमारी फेमिली फ्रेंड हे. आंटी की उम्र 37 साल हे और इतनी उम्र की होने के बावजूद भी उसका बदन एकदम माशाल्लाह हे. मुझे उसको चोदने का बड़ा मन करता हे. वो मेरे साथ ही जिम करती हे और वहां पर उसके गदराये और भरे हुए बदन को देख के साला लंड खड़ा हो जाता हे.

एक दिन जिम में कम लोग ही थे. आंटी जी अपने जिम के टाईटस में बड़ी मादक और सेक्सी लग रही थी. उसकी 42 इंच की गांड मुझे जैसे बुला के उसके ऊपर हाथ घुमाने के लिए कह रही थी. और उसके 38 इंच के बड़े बॉल्स बहार आने के लिए मेरी मदद मांग रहे थे. मैं आंटी की गांड ताड़ रहा था वो उसने मिरर में देख लिया. मैं डर और शर्म की वजह से दूसरी तरफ घूम गया और एक्सरसाइज करने लगा. जिम के बाद जब मैं घर के लिए निकल रहा था तो नीलम आंटी ने कहा प्लीज़ मुझे अपनी कार में लिफ्ट दे देना. वो बोली, आज अंकल को जल्दी जाना था इसलिए मुझे छोड़ के निकल गए. वो मेरी कार में बैठ गई. मैंने कार चालू कर दी और आंटी ने अपनी बातें.

कुछ देर इधर उधर की बात करने के बाद नीलम आंटी बोली, भला आज मुझे इतना घुर क्यूँ रहे थे तूम?

मैंने कहा आंटी आप का टाईट बड़ा ही सेक्सी लग रहा था. आंटी ने मेरे गाल पर हलके से टच कर के कहा, बेटा अपने उम्र की कोई लड़की ढूंढे ले!

मैंने कहा, आंटी लडकियां सेक्सी और हॉट तो हे लेकिन आंटियों के साथ उनका कोई मुकाबला ही नहीं हे!

ये सुन के नीलम आंटी अपनी हंसी छिपा नहीं सकी. और शायद उसके अन्दर चुदास का सागर अपनी लहरें दौड़ाने लगा था. मेरा लंड भी आंटी के साथ ऐसी बातें करने से खड़ा हो गया था.

आंटी ने कहा, क्या हुआ गर्म हो गए क्या?

मैं कुछ नहीं बोला और सिर्फ स्माइल दे सका. लेकिन उसके बाद में आंटी ने जो किया वो मैंने कभी नहीं सोचा था! आंटी ने मेरा लंड पकड़ के उसे दबाया और बोली मेरे बारे में सोच के खड़ा हो गया हे ये

मैंने कहा आंटी प्लीज़ मेरा लंड छोड़ दो! दर्द हो रहा हे.

उसने कहा पहले बता की क्यूँ खड़ा हो गया हे ये फिर ही छोडूंगी!

मैंने कहा, आप के लिए ही खड़ा हो गया हे.

आंटी ने कहा कार रोक तो. मैंने कार रोकी वो बोली चलो मैं जाती हु पैदल. मैंने कहा, आंटी प्लीज़ किसी को मत बताना. मैं सच में डरा हुआ था की कही आंटी मेरी मम्मी वगेरह को बोल देगी तो प्रॉब्लम हो जायेगी. लेकिन शाम तक तो ऐसा नहीं हुआ. शाम को डिनर के बाद आंटी का मेसेज आया और उसने मुझे कॉल करने के लिए कहा. मैंने कॉल किया. उसने जैसे ही पिक किया मैं अपनी सोरी की मुरलियां बजाने लगा. आंटी ने कहा, चुप भोसड़ी के, हरामी साला!

मैंने एकदम चौंक गया. आंटी ने कहा, तू अब रिस्पेक्ट से बात करने के लायक नहीं हे. और उसने कहा मैं तो तुम्हे रोज गाली दे के ही बुलाऊंगी. फिर उसने कहा, कल सुबह मुझे जिम के लिए पिक करना. और तब मेरी जान में जान सी आई. रात को मैंने आंटी के बारे में सोच के ही लंड हिला लिया. दुसरे दिन सुबह मैं पौने 6 बजे ही आंटी के घर पहुँच गया. आंटी अपने जिम के ड्रेस में ही खड़ी थी. वो मुझे देख के बोली, साले कुत्ते लेट क्यूँ आया साड़े पांच बजे बोला था ना मैंने.

मैंने कहा, सोरी!

आंटी बोली, चल साले तुझे चाय पिलाती हूँ.

मैंने कहा, जिम नहीं जाना हे?

वो बोली, नहीं पहले अन्दर चल! आज पहले बिस्तर में ही कसरत करेंगे थोड़ी.

मेरा लंड ये सुन के एकदम कडक हो गया. आंटी मेरा कान पकड़ के घर में ले गई. वहां पर उसने मुझे बिठाया और खुद मेरी बगल में आ बैठी. फिर उसने मुझे कहा, अब बता मेरे बारें में गन्दी सोच कब से हे तेरी! मैं बोला नहीं तो वो बोली, अबे कुत्ते जल्दी से भौंक ना, साले चक्षु चोदन करते हुए शर्म नहीं आती हे और अब बोलते हुए अपनी माँ चुदने जितनी लिहाज रख रहा हे रंडी का बेटा साला!

मैंने कहा, आंटी मैं तो पहले से ही आप को पसंद करता हूँ.

आंटी ने कहा, कैसे चोदना चाहता हे मुझे वो बता.

मैंने कहा, मैं आप का मालिक और आप मेरी गुलाम बनो और फिर मैं आप को जम के पेलू दूँ.

आंटी ने मुझे देखा और बोली, सच में गुलाम बनाएगा क्या मुझे?

फिर उसने मुझे कस के एक थप्पड़ लगाया और बोली, साले बेन के लौड़े आज बताती हूँ तुझे की गुलाम क्या होता हे.

वो खड़ी हो के फटाक से नंगी हो गई. और उसने मुझे कहा, चल अपने कपडे खोल हरामी.

मैं खड़ा हुआ और जैसे ही मैंने कपडे खोले वो लंड को देखने लगी. फिर वो बोली, साले मादरचोद, इस नूनी से तू मुझे अपनी गुलाम बनाना चाहता था.

मैंने कहा, साली कुतिया, कब से चुप हूँ इसका मतलब ये नहीं की तू मेरी बाप बनेगी, भोसड़ी की अपने बुर में डलवा के देख ये नूनी हे या नुना. साली बहुत बोली तो गांड में ही कर दूंगा तुन्ना तुन्ना.

उसने फिर से एक थप्पड़ मारा और बोली, चुप जबी बोलने को कहूँ तभी बोलना हे तुम्हे.

फिर उसने मेरी जबान से अपनी जबान को लगा दी और चूसने लगी. और साथ में उसने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ के उसे बड़ी ही जोर जोर से दबाना चालू कर दिया. मुझे पेनिस के अन्दर बड़ा दर्द हो रहा था. क्यूंकि वो उसे दबा रही थी और जोर जोर से पिंच भी कर रही थी.

फिर आंटी निचे घुटनों के ऊपर बैठी. उसने लंड को अपने हाथ में मुठ मारने वाले पोस में पकड़ के हिलाना चालू कर दिया. फिर एक ही मिनिट में वो लौड़े को मुहं में भर के चूसने भी लगी.

पांच मिनिट आंटी ने लंड को ऐसा कस कस के चूसा की मेरी वीर्य एकदम धार पर आ गई. उसने लंड बहार निकाला और बोली, क्या हुआ बेटे का पानी निकल पड़ा?

मैंने कहा, आंटी जल्दी से इसे अपने मुहं में ले लो वरना सब गंदा हो जाएगा. वो बोली, चुप मादरचोद, बहार ही पिचकारी मार मैं देखूंगी.

और ये कह के वो मेरे चिकने बने लंड को हिलाने लगी. एक धार वीर्य की निकली जो कम से कम 5 फिट ऊपर तक उठी. आंटी की आँखों में उस को देख के चमक आ गई.

मेरा वीर्य निकलने के बाद आंटी बोली, चल कुत्ता बन मेरा.

मैं घोड़ी बन के खड़ा हुआ तो आंटी ने तेल लगाया मेरी गांड पर. और फिर वो गांड को तपाक तपाक कर के मारने लगी.

वो गांड पर इतनी जोर से मार रही थी की बहुत दर्द हो रहा था मुझे. वो बोल रही थी, साले कुत्ते लोग सब आंटियों को अपनी बाप की माल समजते हो. आज ये आंटी तेरी माँ चोदेंगी.

और फिर आंटी ने अपनी एक ऊँगली मेरी गांड में डाली. मैं दर्द से छपट उठा. वो बोली, साले गांडू अभी तो एक ऊँगली डाली हे ज्यादा हिला तो पूरा हाथ दाल दूंगी अंदर.

फिर आंटी ऊँगली को जोर जोर से गांड में हिला के मेरी गांड को दर्द देने लगी. फिर मैंने कहा, आंटी बहुत दर्द हो रहा हे. मैं बात खत्म करता उसके पहले तो आंटी ने मेरे बॉल्स मुठी में पकड़ के नोंच लिया. मेरा दर्द एकदम बढ़ गया था. फिर आंटी ने कहा, चल अब मेरी गांड को चाट. ये कह के उसने अपनी गांड का हिस्सा मेरे मुहं के ऊपर जोर से दबा दिया. मेरी सांस लेनी भी मुश्किल हो रही थी. पर आंटी ने सच में मुझे गुलाम बना लिया था क्यूंकि मैं चाह के भी कुछ कह नहीं पाया. आंटी ने गांड को मेरे मुहं पर जोर जोर से दबाया और घिसने लगी. उसका एस्होल चाट के मैंने उसे खुश किया.

फिर वो बोली, चल अब मेरी पुसी को चाट दे.

मैंने वहां पर भी अपनी जबान की कमाल दिखाई. आंटी ने मुझे चूत चटवाते हुए भी बहुत मारा. जब उसकी चूत से एक बार पानी निकल गया तो वो बोली, अब तेरी नूनी का टेस्ट लेते हे.

और ये कह के उसने लंड को पकड़ के हिलाया. और फिर वो खड़े लंड के ऊपर बैठ गई. लंड एकदम आसानी से उसके बुर में घुस गया. आंटी बोली, ये तो एकदम अंदर घुस गया मुझे दर्द भी नहीं हुआ. मैंने मन ही मन कहा, मादरचोद अभी तेरी गांड पकड़ के चोदुंगा तो दर्द होगा.

आंटी ने मेरी छाती के ऊपर दोनों हाथ से पूरा वजन लगाया और वो अपनी बिग एस को हिलाने लगी. मेरा लंड आराम से उसकी चूत में घुस रहा था. फिर उसने पता नहीं कैसे लेकिन अपनी पुसी के मसल को खिंचा. उसके बुर पर अब लंड की ग्रिप बढ़ गई. मैंने उसे पकड के चोदना चालू कर दिया.

आंटी ने अपने बूब्स मेरे हाथ में पकडवा दिए और बोली, ये ले उन्हें दबा और चोद मुझे.

मैंने ऐसा ही किया.

मैं अब निचे से आंटी के बूब्स को जोर जोर से दबा के ऐसे छोड़ रहा था की बस उसके बुर को खत्म कर देना हो. आंटी भी कम सेक्सी नहीं थी. वो अपनी गांड को जोर जोर से ऐसे लंड के ऊपर मार रही थी की मुझे बहुत मजा भी आ रहा था. और दर्द भी हो रहा था एआंटी के वजन की वजह से.

आंटी कुछ 10 मिनिट मेरे लंड के ऊपर ऐसे ही उछली. और फिर वो बोली, अब तू बता कैसे चोदना चाहता हे?

मैंने कहा आप घोड़ी बन जाओ.

आंटी उठी. अपनी गांड मटकाते हुए वो बेड  के कौने को पकड के घोड़ी बन गई. मैंने अपना लंड पीछे से उसकी चूत में घुसेड दिया. अब की उसे दर्द का अहसास हुआ. क्यूंकि इस पोस में लंड अन्दर तक घुस जो रहा था. मैंने उसकी गांड को दोनों तरफ से दबा के चोदना चालू कर दिया. वो जोर जोर से सांस लेते हुए बोली, अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अय्ह्हह्ह याह्ह्ह्हह्ह याआह्ह्ह्ह फक मी! अब उसे लंड से मजे मिलने लगे थे. मैंने कस कस के ऐसे चोदा की आंटी को फुल मजे मिले. और फिर मैंने अपने लंड का जल आंटी के बुर में ही प्रवाहित कर दिया. आंटी ने कहा, अह्ह्ह्हह मजा आ गया!!!! फिर मैंने लंड को निकाला और हम दोनों साथ में नाहने के लिए चले गए. आंटी ने नाहते हुए ही मेरे लंड को फिर से खड़ा कर के शावर के निचे अपनी चूत और गांड चुदवाई. और वो बोली, मेरे हसबंड हफ्ते में 3 दिन जल्दी जॉब पर जाते हे सुबह 4 बजे, अगर तुम चाहो तो हफ्ते में मेरे गुलाम बन सकते हो!

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