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मकान मालकिन को चोदकर सुहागरात से ज्यादा मजा दिया

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हाय फ्रेंड्स कैसे हो आप लोग! मेरा नाम लखन हे और मैं जोधपुर के पास से एक कसबे का हूँ. आज मन आप लोगों को अपने सेक्स की एक कहानी बताने जा रहा हूँ. और वैसे कहानी पढ़ के आप खुद ही समझ लेंगे की ये एकदम खरी यानी की सच्ची बात हे 😉 मेरी इम्र्पेशन स्टार्ट से ही एक अच्छे लड़के और स्टूडेंट की रही हे. मेरी बॉडी और लुक्स अच्छे हे ये मुझे तब पता चला जब मैं हाईस्कुल में आया और लडकियां मेरी तरफ मंडराने सी लगी. 12वी साएन्स की पढाई की बाद मैं कोटा चला गया आगे की पढ़ाई और कोचिंग के लिए. कोटा में मैं एक कमरे के अन्दर रह रहा था, पीजी के तौर पर. जो मेरी मकानमालिकिन थी वो शरु से ही मुझे लाइन देने लगी थी. वो देखने में बड़ी अच्छी थी और उसका बाँधा यानी की फिगर भी सही था. उसके बूब्स का साइज़ कम से कम 36 का तो होगा ही. और उसकी गांड भी बहार आई हुई थी. वो भी 38 के ऊपर ही होगी. भाभी जी के भरे हुए बदन को देख के मेरे लंड में सांस भर जाती थी. मैं उसके नाम की मुठ बाथरूम में जा के मार लेता था. मेरा लौड़ा काफी तगड़ा हे और अब मैं उसे हिला हिला के थक गया था. मैं अपने लौड़े के लिए भाभी ही जैसी किसी सेक्सी और अनुभवी औरत की चूत को खोज रहा था. यही वजह थी की मैं उसके अन्दर ज्यादा इंटरेस्ट ले रहा था. मैं उसे एक बार देखने के लिए कभी कभी पुरे आधे घंटे तक छत पर तो कभी घर के बहार दूकान के पास खड़ा रहता था.

कुछ दिनों तक तो सिर्फ देखा देखी ही चली हम दोनों के बिच में. लेकिन फिर हम लोग धीरे धीरे मिक्स होने लगे. वो मुझे खाने के बारें में और कोई और तकलीफ तो नहीं हे ये सब पूछती रहती थी. एक दिन भाभी ने मुझे कहा, लखन मुझे अपना नम्बर तो दो. मैंने उसे देखा तो फुदक रही थी! मैंने नम्बर दे दिया. और फिर वो मुझे मेसेज करने लगी उसी दिन से. कभी कभी वो पति से छिप के फोन भी कर देती थी. मेरी भाभी को चोदने की बेताबी एकदम से बढ़ रही थी यारो!

एक दिन हम लोग ऐसे ही लाइफ की बातें कर रहे थे. मैं उसे अपने घर वगेरह की बात कर रहा था. हम लोग डाइनिंग टेबल पर ही थे. उस वक्त उनका पति जॉब पर था. कुछ देर में तो भाभी ने बैटन को अपने ट्रेक पर चढ़ा दी. और बात बात में उसने कहा की दो प्रेग्नन्सी के बाद अब पति मेरे में उतना ध्यान नहीं देता हे! वैसे भाभी की बात दुःख वाली थी. लेकिन मैं अन्दर से अच्छा फिल कर रहा था. क्यूंकि पति से खुश होती तो मेरा लंड थोडा लेती! मेरे बदन में हवस की ज्वाला भड़क रही थी. मैं मन ही मन खुद को बोला, लखन कुछ भी हो इस भाभी के बुर को ख़ुशी और अपने लंड को ठंडक देनी हे.

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उस दिन तो भाभी के साथ चांस आगे नहीं बढ़ा क्यूंकि उस वक्त साली एक बूढी आंटी कही से आ गई. मैं लंड को पुचकार के निकल गया. भाभी भी अपनी चुन्चियों का और पिछ्वाडे का उभार दिखा के मेरा लंड खड़ा कर देती थी. अब हम दोनों एक दुसरे के काफी करीब से हो गए थे और मैंने उसके दिल में भरोसा बना लिया था. भैया मैं गाँव का छोकरा हूँ मुझे पता हे की औरत का भरोसा कैसे पाना हे! और फिर वो दिन आ गया जिसका मुझे कब से वेट था. भाभी के कमरे में मैं मच्छर की कोई लेने गया तो वो अपनी नाइटी में थी. मुझे देख के उसके अन्दर की वासना जैसे सुलग गई. उसने मुझे पकड लिया और बोली, लखन आज मेरे बुर की सब प्यास को मिटा दो. अब मेरे से नहीं रहा जाता हे! काफी दिनों से तुम्हे अपना बदन दिखा के बुला रही हूँ, पर तुम हो के जैसे समजते ही नहीं.

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मैंने कहा, अरे भाभी जी आप के नाम के मुठ इतनी मारी हे की पूरा टेंकर भर जाए. पर क्या करूँ डर भी तो लगता हे ना.

भाभी बोली, आई लव यु लखन चोदो मुझे.

मैंने कहा आज नहीं भाभी, भैया आ गए तो प्रॉब्लम होगी. मैंने कहा मैं कल दोपहर में कोचिंग से जल्दी आ जाऊँगा और फिर आप जो कहेंगे वो हम करेंगे. अगले दिन कोचिंग से निकलते ही मैंने भाभी को कॉल किया और कहा, अपने बुर को गर्म कर लेना तुम्हारा लखन आ रहा हे.

भाभी ने कहा जल्दी आओ मैं तो कल से ही गर्म कर रही हूँ!

जैसे ही मैं घर पहुंचा तो देखा भाभी ऊपर बालकनी में ही खड़ी थी. मेरे जाते ही वो दरवाजे को खोल के मुझे अन्दर खिंच गई. उसने अंदर ले के मुझे जकड़ लिया अपनी मोटी बॉडी में और बोली, बड़ी वेट करवा दी लंड देने में!

मैंने कहा, अब तो आ गया हूँ ना मैं, अब जो करना हे वो कर लो!

मैंने भी भाभी के सेक्सी गुलाबी होंठो के ऊपर अपने होंठो को लगा दिया. और साथ में मैं उसकी चुन्चियों को पकड के उन्हें मसलने लगा. साथ में भाभी के लिप्स को भी मैं मस्त किस कर रहा था. भाभी भी मुझे मस्त किस दे रही थी और मेरी गांड को पकड़ के उसे दबा रही थी अपनी तरफ ताकि मेरे लौड़े की गर्मी का अहसास उसे हो सके! और साथ में मैं भाभी के गांड की फांक को अपने हाथ से पकड के मसल रहा था. इस सेक्सी भाभी की गांड बड़ी ही सॉफ्ट सॉफ्ट थी! मेरे हाथ और होंठो के जादू से भाभी भी एकदम हॉट बन गई थी. वो खड़ी हुई और उसने धड धड अपने कपडे निकाल के फेंकना चालू कर दिया. और साथ में मैं भी भाभी के सामने अपने कपडे निकाल के न्यूड होने लगा. भाभी ने अपने हाथ को आगे कर के मेरा लिंग अपने हाथ में दबा लिया. अभी मेरा लौड़ा पूरा खड़ा नहीं हुआ था. भाभी के टच से मेरे लौड़े के अन्दर जैसे एकदम जान आ गई और कम्पन भी होने लगे.

मैंने अपने होंठो से भाभी की एक चुन्ची को जकड़ ली और उसकी निपल को चूसने लगा. और साथ में मैं भाभी की चूत पर एक हाथ से मसाज करने लगा. भाभी की फांक को खोल के मैंने अन्दर के जी-स्पॉट पर अपना हाथ लगा दिया था. भाभी की सब अन्तर्वासना एक ही स्पर्श में जैसे बहार आ रही थी जी स्पॉट को टच करने से. भाभी मेरे लौड़े को स्ट्रोक देते हुए बोली, लखन मुझे इतना मजा तो अपनी सुहागरात में भी नहीं आया था. और तुम्हारा लंड तो कितना बड़ा हे, मैंने अपनी पूरी जिन्दगी में इतना बड़ा लौड़ा नहीं देखा था.

मैंने कहा, भाभी जी हम विलेज से हे और हमारे लौड़े जानदार और जानलेवा दोनों होते हे!

अब मैं भाभी को पकड के उसे सोफे के ऊपर ले आया. और मैंने उन्हें ऐसे बिठाया की मेरे सामने उसकी चूत आ जाए. वो सोफे की सिट को पकड के बैठी हुई थी. मैंने अपनी जबान को भाभी के चूत के होंठो पर रख दी और चाटने लगा. भाभी निचे को झुकी तो मैने उसके दोनों बड़े बूब्स को हाथ में पकड़ लिए और जोर जोर से दबाने लगा. भाभी चरमबिंदु पर पहुँच गई और एकदम से झड़ भी गई.

वो मुझे मना कर रही थी. पर मैंने अपने होंठो से चूत को चाटना चालु कर दिया. भाभी की साँसे गर्म हो गई थी और वो अपनी चूत को मेरे होंठो पर घिसने लगी थी. मैंने चूत को फिर भी नहीं छोड़ा और चूसता ही गया. अह्ह्ह अह्ह्ह लखन करते हुए भाभी और एक बार झड़ गई. भाभी ने अपनी चूत का रस छोड़ दिया और फीर दुसरे ही सेकंड भाभी ने मेरे लंड को अपने कब्जे में ले लिया और उसे मुहं में भर लिया. भाभी जोर जोर से लंड को हिला के खड़ा कर रही थी. भाभी ने कहा, जल्दी से इसे डाल दो मेरे बुर में और उसे फाड़ दो जल्दी से. मैंने कहा, अभी देता हूँ तुझे गांड के लंड का सवाद. मैंने भाभी के कूल्हों को सोफे पर टिका के उसकी टाँगे खोल दी. भाभी की चूत थोड़ी काली सी थी लेकिन बड़ी ही सेक्सी थी!

मैंने भाभी के बुर पर अपने लौड़े को रख दिया. और भाभी की तरफ देखा. भाभी ने इशारे से पेनिस अन्दर डालने को कहा. अब भला मैं कैसे रुकता. एक ही धक्के में मैंने भाभी की चूत में अपने लंड को आरपार कर दिया. भाभी मुझसे लिपट गई और बोली, अह्ह्ह्ह बहुत दर्द हो रहा हे, कितना बड़ा हे!

भाभी की आँखे फट गई और वो मुझसे लिपट के बोली, आह अच्छा लग रहा हे!

मैं कुछ देर के लिए रुक गया और फिर एक साथ सात आठ धक्के लगा दिए अपने लंड के. भाभी अपनी गांड को हिला हिला के मस्त चुदवा रही थी. और वो इतनी सेक्सी ढंग से चुदवा रही थी की मुझे डर था की कहीं मैं झड़ ना जाऊं!

भाभी का उसका पानी भी चूत से बहार आने की कगार पर था. जिसकी पुष्टि उसकी चूत की एक्स्ट्रा चिकनाहट बता रही थी. मैंने चोदते हुए भाभी को कहा, मेरा होनेवाला हे.

भाभी ने कहा, लखन आज मैं अपनी चूत को तुम्हारे लंड के पानी से नहलाना चाहती हूँ!

मैंने अपने लंड के धक्के और भी तेज कर दिए. और 1 मिनिट के अन्दर ही मेरा गाढ़ा वीर्य भाभी के बुर में छटक गया.

मैंने कुछ देर तक अपने लंड को भाभी की चूत में ही रहने दिया. फिर वो खड़ी हुई और मेरी तरफ देखा उसने. उसकी आँखों में संतोष और शुक्रिया के भाव थे. मैंने कहा, भाभी अभी तो मैं स्टार्ट हुआ हूँ अभी तो बहुत कुछ बाकी हे! और मैंने फिर से भाभी को लिप किस करना चालू कर दिया. भाभी के बड़े बूब्स को भी अपने हाथ में पकड़ के मैं दबा रहा था और दूसरी तरफ अपनी एक ऊँगली को भाभी की चूत में भर दी. भाभी का बुर एकदम चिकना हो गया था मेरे वीर्य की चिकनाहट की वजह से! एक तरफ भाभी के बदन में फिर से गर्मी चढ़ी और दूसरी तरफ मेरे लौड़े में भी फिर से उसे चोदने की ताजगी आ गई थी!

मैंने एक बार फिर से चूत-प्रवेश करा दिया अपने लौड़े को. अब की भाभी बड़ी सिसकियाँ रही थी. वो जोर जोर से कम ओं लखन, चोदो मुझे और जोर जोर से कह रही थी. अब की बार भाभी डोमिनेंट रही पूरी चुदाई में और मैं सपोर्ट एक्टर की तरह बस अपने लौड़े को उसकी चूत में हिलाता रहा. दोस्तों दूसरी चुदाई भी कुछ 12 मिनिट चली. और मैंने अपने लौड़े के पानी को फिर से भाभी के बुर में छोड़ दिया. भाभी भी चुदाई के दौरान 2 बार झड़ गई थी. और उसे भी बड़ा मजा आ रहा था कस कस के चुदवाने में.

दोस्तों मैंने कोटा में 3 साल कोचिंग की और इस भाभी को मैंने पचासों बार अपने लंड का मजा दिया!

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