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मम्मी और अंकल का मुंबई में चुदाई खेल शुरू हुआ

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मेरा नाम रतन सिंह हे और मैं गुजरात के महसाना का हूँ. मेरे घर के अंदर तिन मेम्बर्स हे. मैं, ममेरी माँ और मेरे डेडी. मैं घर की इकलोती औलाद हूँ और बहुत लाड प्यार से पाला गया हूँ. मेरी मम्मी एकदम सेक्सी दिखती हे और जो भी उसे एक बार देखे तो बस उसे देखता ही रह जाए ऐसा भरा हुआ यौवन हे उसका. माँ के बूब्स इतने चौड़े और खुले हुए हे की वो उसके ब्लाउज में भी नहीं समां पाते हे.

मेरी माँ जब मार्किट में जाती हे तो सब्जीवाले भैया लोग  भी उसे देख के खुश हो जाते हे. माँ को लगता हे की वो उसे देख के रिस्पेक्ट करते हे. और वो लोग उसे सस्ते में सब्जी देते हे. लेकिन माँ नहीं जानती हे की ये भैया लोग उसके पीछे एक दुसरे से इशारे में बात करते हे और माँ के बदन की तारीफ़ करते हे. माँ जब सब्जी लेने के लिए झुकती हे तब वो उसके बूब्स को देख के अपने लंड खुजाते हे. मैंने अपनी बोर्ड की एक्साम्स पास कर ली थी. मुंबई में मेरे अंकल रहते हे तो उन्होंने पापा को कहा की रतन को यही पर पढाई के लिए भेज दो. पापा ने भी हाँ कर दी और मैंने एडमिशन की फोर्मलिटी पूरी कर दी. पापा ने हफ्ते के बाद मुझे पूछा की सब ठीक हे ना मुंबई में! और फिर माँ से मेरे से बात की. माँ ने कुछ देर के बाद कहा की अंकल को देना फ़ोन. मैंने अंकल को रिसीवर दिया और माँ को बाय बोल दिया.

करीब 20 मिनिट के बाद मैं निचे आया तो मैंने देखा की अभी भी अंकल और माँ लगे हुए ही थे. मेरे मन में शंका का कीड़ा कुलबुला और मैंने दुसरे कमरे में जा के पेरेलल लाइन के रिसीवर को बिना आवाज किये हुए उठा लिया.

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जो मैंने सुना वो आप को बता दूँ.

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अंकल: गया क्या शशांक (मेरे पापा का नाम).

माँ: हां अभी जस्ट गए हे वो.

अंकल: तो तुम कब आ रही हो यहाँ पर यार?

माँ: बस कुछ दिनों में ही मैं आ जाउंगी.

अंकल: और मेरी अमानत कैसी हे सब की सब?

माँ: क्या?

अंकल: अरे तुम्हारे बूब्स, चूत और गांड संभाल के रखे हे ना मेरे लिए.

माँ हंस पड़ी और मुझे अनकरीब दिल का दौरा ही पड़ने को था. माँ अंकल से कैसी गन्दी बातें कर रही थी.

माँ: शशांक के ऑफिस का काम निकल आये फिर मैं वहां आउंगी. ताकि मैं अकेली आ सकूँ.

अंकल: मेरी रानी बड़ी स्मार्ट हे!

माँ: मैं आई तो मजे करवाओगे ना?

अंकल: अरे मैं आज से ही अपने लौड़े को तेल पिलाना चालू कर दूंगा. तुम आओगी तो बहुत एन्जॉय करेंगे हम दोनों मेरी जान!

और फिर दोनों ने बात ख़त्म कर दी.

और उसके अगले हफ्ते ही माँ का कॉल आया की मैं आ रही हूँ. वैसे मुझे खुश होना चाहिए था पर साला मुझे टेंशन सा था की माँ चुदवाने ही आ रही हे, ना की अपने बेटे की खबर देखने के लिए. माँ आ गई और अंकल उस वक्त घर पर ही थे. माँ के सामने बैठे हुए वो बार बार अपने लंड को मसल रहे थे. माँ भी स्माइल देते हुए तिरछी नजरों से उन्हें देख रही थी. फिर माँ मेरे से बोली, रतन तुम्हारे कोलेज का वक्त हो गया की नहीं?

मैं: मम्मी आज तो आप आई हो, आज नहीं जाता.

माँ: नहीं नहीं बेटा पढाई मन लगा के करों.

मैं समझ गया की मेरी माँ की चूत में लंड लेने की खुजली उमड़ पड़ी थी और मैं कबाब में हड्डी बना हुआ था! मैंने बेग लिया और निकल पड़ा. लेकिन मैं दरवाजे के पास खड़े हो के उन दोनों की बातें सुनने लगा.

माँ: अरे आप तो बड़े नोटी हो, रतन के सामने ही अपना हथियार मसलने लगे.

अंकल: अरे तुझे देख के साला कंट्रोल ही नहीं रहता हे बॉडी के ऊपर.

माँ: अरे उसे कही शक हुआ तो वो कैसे सोचेगा मेरे लिए.

अंकल ने माँ का हाथ पकड के कहा, जानेमन कुछ नहीं सोचेगा वो और तुम भी बहुत कुछ दिमाग में मत घुमाओ. और चलो अब जल्दी कपडे खोलो अपने.

माँ: अरे मुझे शर्म आ रही हे.

अंकल: अब पचासों बार तो लिया हे तुमने मेरा, अब कैसे शर्म?

माँ: पहले आप देखो रतन गया की नहीं.

अंकल: अरे वो कब का चला गया, तुम बहाने मत दिखाओ.

अंकल खड़े हो गए और मा के पीछे आ गए. माँ की साड़ी और पेटीकोट को उठा के उसकी गांड को देखने लगा. माँ की सेक्सी बड़ी गांड को अंकल अपने हाथ से हिला रहे थे. माँ मस्तियाँ रही थी और वो आह्ह्ह अह्ह्ह्ह ओह ओह्ह्ह्ह की आवाज निकाल रही थी.

माँ बोली, चलो अब जल्दी से निकालो ना.

अंकल ने अपनी पेंट को खोल दी और अपना बड़ा लंड बहार निकाला और उसे माँ के मुहं के पास रख के बोले, चल चाट ले इसे मेरी जान.

माँ ने बिना कुछ कहे एकदम से लंड को अपने मुहं में भर लिया. और वो उसे चाटने लगी. अंकल ने अपनी एक ऊँगली को माँ के गांड के छेद में डाल दी और हिलाने लगी. माँ सिसकियाँ लेते हुए लंड को चूस रही थी और गांड में ऊँगली डलवा के उछल भी रही थी.

माँ के कपडे पकड़ के फाड़ दिए अंकल ने और बोले, आज तो चालु ही पीछे से करना हे मेरी डार्लिंग.

माँ: अरे आप को पता नहीं पीछे क्यूँ इतना मजा आता हे.

अंकल: तेरे पीछे के छेद में जो मस्ती हे वो आगे नहीं हे मेरी जान.

और फिर अंकल ने माँ को एकदम नंगा कर दिया. और उसकी गांड में उन्होंने अब की दो ऊँगली डाल दी और उसे हिलाने लगे. माँ सिसकियाँ रही थी. माँ ने अपनी एक ऊँगली को चूत में डाली और वो हिलाने लगी. अंकल ने बोला: साली रंडी तेरी सब खुजली आज मैं दूर कर दूंगा.

फिर माँ के मुहं में एक बार और लंड डाल के उन्होंने उसे चोदा. माँ अब एकदम चुदासी हो गई . वो अंकल को बोली, अब मेरे से रहा नहीं जाता हे चलो डाल दो.

माँ को पकड़ के अंकल बोले: चल घोड़ी बन जा मेरी रानी.

माँ अंकल के सामने अपनी गांड दिखाते हुए घोड़ी बन गई. अंकल ने माँ की में एकदम से लंड डाल दिया और माँ उछल सी गई. अंकल ने पूरा लंड एक ही झटके में उसकी गांड में दे दिया था. माँ के बूब्स को मसलते हुए वो उसकी गांड मारने लगे. पहले पहले माँ को बहुत दर्द हुआ और वो छटपटा रही थी. लेकिन अंकल ने जोर जोर से अपना काला लंड माँ की गांड में धकेलना चालू ही रखा. माँ के छेद में पूरा लंड घुस के बहार आ रहा था और सिर्फ सुपाड़ा अन्दर रहता था. शायद गांड छिल रही थी पर कुछ देर में माँ को भी मजा आ रहा था. वो भी कुछ देर में अपनी गांड को हिला के चुदवाने लगी.

और 5 मिनिट की मस्त एनाल फकिंग के बाद अंकल ने लंड को निकाल लिया गांड से. अंकल ने लंड को हिला के वीर्य छुडवा दिया. और सब वीर्य को उन्होंने माँ की चूत पर छिडक दिया. अंकल आह्ह आह करते हुए निचे बैठ गए. माँ ऐसे ही उलटी लेट गई. अंकल ने एक सिगरेट सुलगा ली. पहले उन्होंने दो कश खींचे और फिर माँ के तरफ सिगरेट को बढ़ा दिया. मुझे आज अपनी माँ के बड़े अलग अलग रंग देखने को मिल रहे थे माँ को सिगरेट पिने का बड़ा अनुभव लग रहा था क्यूंकि वो नाक से धुंआ निकाल रही थी और फिर स्मोक के रिंग भी बना रही थी.

सिगरेट ख़तम करने के बाद माँ ने कहा, अब आगे.

फिर उसने अंकल के लंड को पकड के हिलाया. एक मिनिट में ही लंड फिर से खड़ा हो गया. अब अंकल ने माँ को निचे लिटा दिया और मिशनरी पोस में चुदाइ चालू कर दी. माँ की टाँगे उठाई और अपना लंड चूत के अन्दर धकेल दिया. माँ आह आह कर के चुदवा रही थी. और अंकल जोर जोर से चुदाई कर रहे थे.

10 मिनिट तक माँ ने मस्त चुदवा लिया और अंकल का दुबारा छटक गया. माँ शांत हो गई और अंकल भी उसके ऊपर ही सो गए.

फिर माँ ने खड़े होते हुए कहा, तुमने तो कपडे फाड़ दिए मेरे. अब बेग से निकालने पड़ेंगे… अंकल बोले, अब नहीं फाडुंगा मेरी जान. रात को ब्ल्यू फिल्म लगा के करेंगे ना?,, माँ हंस के दरवाजे की तरफ बढ़ी और मैं वहां से निकल गया!

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