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ननदोई और ननद के साथ गर्मा गर्म ग्रुप सेक्स किया

sexy stories हेल्लो दोस्तों मेरा नाम रुचिका है। मैं आंबेडकर नगर में रहती हूँ। मेरी उम्र 30 साल है। मै देखने में बहुत ही जबरदस्त माल दिखती हूँ। मेरी शादी हो चुकी है। मेरी एक ननद भी है जिसका नाम अनुपमा है। वो तो मुझसे भी जादा हॉट और सेक्सी लगती है। उसकी चूंचिया बहुत ही लाजबाब है। उसकी भी शादी हो चुकी है। उसकी शादी को अभी 2 साल हुए है। ननदोई जी भी कुछ कम नहीं है। उनका नाम निर्मल है। वो भी बहुत हैंडसम है। उनका लंड बहुत ही आकर्षक है। जब कभी वो मेरे यहाँ आते थे तो नहाकर बाथरूम से निकलते थे। मै उनके लंड पर ही नजर गड़ाए रहती थी। उनका तौलिया उठ जाता था। मुझे उनका तना लंड देख कर चुदने का मन करता था। मै अपनी ननद की खूब मजा लेती थी। वो भी मुझसे कुछ नही छिपाती थी। अनुपमा मेरी सहेली जैसी है। वो मुझे इतना तक बता देती थी वो की किस प्रकार उसने सुहागरात मनाई। उसे अपने ससुराल से आये हुए अभी दो तीन दिन ही हुआ था। मेरी सास ससुर को तीर्थ यात्रा पर जाना था। वो मिलने आई थी। आप यह चुदाई स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है। 
अनुपमा- “भाभी देखना निर्मल जी मुझसे दो दिन भी दूर नहीं रह सकते। वो आने ही वाले होंगे”
मैं- “क्यों अनुपमा तुम्हारे भैया तो हफ़्तो दूर रहते है मुझसे”
अनुपमा- “वो कहते हैं मैं तुम्हारे बूब्स को ना देखू तो मुझे चैन ही नहीं मिलता”
मै- “तब तो वो तेरी चुदाई भी खूब जमकर करते होंगे”
अनुपमा- “भाभी कहो मत मुझे याद आता है तो मेरी रुहे काँप उठती हैं”
मै- “क्यों”

अनुपमा- “भाभी वो मुझे कुत्ते की तरह चाट चाट कर चोदते है। उनका लंड खीरा जैसा बड़ा और मोटा है”
मै- “फिर तो तुझे चुदवाने में खूब मजा आता होगा”
अनुपमा- “नहीं भाभी मजे के साथ साथ मेरी चूत की जान निकल जाती है”
मै- “काश तुम्हारे भैया का लंड भी उनकी तरह होता तो मुझे भी ये आनंद मिल पाता”
अनुपमा- “भाभी तुम भी खेलना चाहोगी उनके लंड से”
मै- “पागल हो गई हो क्या अनुपमा!!! भैया तुम्हारे जान गए तो वो मेरी चूत चीड़ फाड़ डालेंगे”
अनुपमा- “कैसे जानेंगे?? हम सब उन्हें बताएँगे ही नही”
मै- “अगर ननदोई जी ने कह दिया तो”
अनुपमा- “अरे भाभी मैंने आप से एक बात छुपाई भी थी। वो तुम्हे चोदना चाहते है। कई बार मुझसे तुम्हारी तारीफ कर चुके हैं’

मै मन ही मन बहुत खुश हो रही थी। मेरे पतिदेव दूसरे दिन अपने कही मीटिंग में चले गए थे। वो दो तीन दिन बाद आने वाले थे। अनुपमा ने फ़ोन करके ननदोई जी को सब बता दिया। ननदोई जी उनके जाने के बाद ही आ गए। मै उनके सामने जाने में शर्म कर रही थी। घर आते ही मेरे चुदने की सिफारिश ननदोई से अनुपमा कर रही थी। वो तो चोदने के लिए बेकरार ही थे। हम लोग बैठ कर साथ ही बात कर रहे थे। वो मुझे बड़ी ही हवस की नजरों से देख रहे थे। लग रहा था मेरी चूत का आज वो भोषणा बना डालेंगे। अनुपमा भी पास ही बैठी थी। टेबल के नीचे से वो मेरी टांगों में अपनी टाँगे लगा रहे थे। मुझे उनका छूना बहुत ही जोश दिला रहा था। मैं उनके मोटे काले खीरे को देखने को व्याकुल हो गई। धीरे धीरे ऐसे तैसे पूरा दिन कट गया। शाम का खाना खाया। मैंने अपनी नाइटी उठाई और पहन ली। अब तो मैं और भी लाजबाब लगने लगी। मै सनी लियॉन की तरह बहुत ही हॉट लग रही थी। मुझे देख कर उनका लंड पैजामे में खड़ा होता जा रहा था। वो मुझे ताड़ रहे थे। उन्होंने अनुपमा को बुलाया। मुझे चोदने के लिए अनुपमा को तेल लगाया। अनुपमा ने मुझसे आकर सारी बात बताई। आप यह चुदाई स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है। 
अनुपमा- “क्या बताऊँ भाभी!! वो तो तुम्हे नाइटी में देखते ही फ़िदा हो गए है। उनका पड़ा खंभा खड़ा हो गया है”

मैंने सबको एक ही रूम में लेटने को कहा। हम लोग एक ही बिस्तर पर लेट गए। निर्मल जी बीच में ही लेट गए। चुदाई का मौसम बनने लगा। अनुपमा ने उनके पैजामे पर हाथ रख कर शुरुवात की। हम एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे। वो कहने लगे- “मैने तुम्हे जब से देखा है मेरा लंड बहुत बेकरार था तुम्हे चोदने को। मैंने कई बार अनुपमा से सिफारिश भी की। एक बार ही दिला दो अपनी भाभी की चूत। मै तुम्हारे मम्मो के साथ खेलना चाहता हूँ”

मै- “मै भी तो तुम्हारा लंड देखने को बेकरार हो रही थी। अनुपमा ने नही बताया क्या??”
निर्मल- “बताया है तभी तो मैं आज तुम्हे चोदने के लिए आया हूँ”
अनुपमा- “आज तुम दोनो ही बात करोगे या मेरा भी कुछ होगा”
मै- “तुम तो रोज खाती हो आज मुझे ही खा लेने दो”
अनुपमा- “नही भाभी मैंने भी कई दिनों से नहीं खाया है। तुमने तो कल ही भैया से चुदवाया था”
मै- “ठीक है!! इतना कहकर मै गुस्से में उठ कर चलने लगी”

निर्मल ने मुझे पकड़ लिया और खींच लिया। वो कहने लगा- “अरे मेरी जान तुम लोग क्यों परेशान होती हो। मुझमे इतनी ताकत है कि मैं तुम दोनों को मैं आज चुदने का सुख दे सकता हूँ”
इतना कह कर मुझे अपने बगल में लिटा लिया। उसके बाद मेरी चूत के ऊपर हाथ रख कर मसलने लगा। किसी को एक भी चूत नसीब नहीं होती और ननदोई जी की किस्मत देखो। उनके पास दो दो चूत चोदने का ऑफर था। निर्मल का लंड मै देखने को बेचैन हो रही थी। मैंने निर्मल के पैजामे का नाडा खोला। धीरे से सरका कर निकाल दिया। उन्होने नीचे अंडरबियर नहीं पहना था। मैं तो देखते ही डर गई। उई माँ इतना बड़ा लंड!!! लग रहा था मोटा डंडा उसके पैजामे में छुपा कर रखा था। काला काला सिकुड़ा हुआ लंड लगभग 5 इंच का रहा होगा। आप यह चुदाई स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है। 

मै यही सोच कर परेशान थी की ये खड़ा हुआ तो कितना बड़ा होगा। मेरी तो चुद्दी ही फट जायेगी। मैने धीरे से खीरे जैसे उसके औजार को छुआ। वो अब धीरे धीरे खड़ा होने लगा। लगता था ननदोई जी का पप्पू जग गया था। बच्चो के उठने पर उनकी आँखे खुलती है वैसे ही उनके लंड के टोपे से खाल धीरे धीरे नीचे सरक रही थी। काले लंड पर गुलाबी रंग का टोपा बहुत ही शानदार लग रहा। मैंने उनके लंड को अपने मुह में भर लिया। सिकुड़ा हुआ उनका लंड मेरे मुह में अपना आकार बढ़ा रहा था। अनुपमा ने कब अपना कपड़ा निकाल कर नंगी हो गई। मैंने देखा ही नहीं। देखा तो वो अपनी चूत में ऊँगली कर रही थी।

मेरा मुह तो फटा जा रहा था। काला 5″ का लौड़ा अब खीरा बन चुका था। मैंने झट से उसे बाहर निकाल कर चैन से सांस ली। अह… आह.. उफ्फ्फ ….उफ्फ्फ…सूँ…सूँ…की आवाज निकाल कर हांफ रही थी। मैंने उनके लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू किया। अब वो खीरा लगभग 4″ मोटा हो गया। अब उनकी बारी आ गई। उन्होंने मेरी नाइटी निकाल कर मेरे खूबसूरत बदन को ब्रा और पैंटी में निहारने लगे। आँखे फाड़ फाड़ कर मेरे बड़े बड़े नींबुओं को ताड़ रहे थे। अब उनका पारा ऊपर जा रहा था।

उन्होंने मेरी चूंचियो को ब्रा निकाल कर स्वतंत्र कर दिया। लटकती हुई चूंचियो को उठा कर खेलने लगे। मैं भी अपने हाथो से उनको सहला रही थी। ननदोई जी तो छोटे बच्चे की तरह मेरी चूंचियों को उछाल उछाल कर खेल रहे थे। मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैं उनके गालो पर मसाज अपने मुलायम हाथो से मसाज कर रही थी। वो मेरे चुच्चो को दबा दबा कर पीने लगे। निप्पलों को काटते ही मैं “……अई…अई….अई…… अई….इसस्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की सिसकारियां भरने लगी। मेरी चूत में खुजली बढ़ती जा रही थी। अनुपमा बहुत जोर जोर से चूत में ऊँगली अंदर बाहर कर मुठ मार रही थी।

मै ये सब देख देख कर बहुत ही गर्म हो रही थी। उन्होंने मेरी पैंटी को झट से निकाल कर मुझे नंगा कर दिया। मेरी चिकनी चूत को देखकर वो बौखला गए। ननदोई कुत्ते की तरह मेरी चूत पर टूट पड़े। वो मेरी चूत की चटाई कर रहे थे। मुझे चटवाने में बहुत ही मजा आ रहा था। मै उनका सर चूत में दबा रही थी। मेरी चूत के टुकड़ो को होंठो से खींच कर ननदोई जी ने मुझे बहुत ही गर्म कर दिया। मै उनका सर अपनी चूत में दबा कर पेलने लगी। वो भी समझ गए मै बहुत ही गर्म हो चुकी हूँ। उन्होंने भी सोंचा लोहा गर्म है मार दूं हथौड़ा!! तुरन्त ही एक पल अपना लंड चूत से सटा कर लगा दिया। मेरी चूत तो दुप दुप कर रही थी। फिर भी उनके खीरे जैसे लंड को खाने की हिम्मत करके अपनी आँखे बंद कर ली। वो मेरी चूत में अपने पप्पू डालकर सैर करा के मुझे तड़पा रहे थे। मै हाथो से चादर को मरोड़ रही थी। आप यह चुदाई स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है। 

वो समय आ गया जब मेरी चूत में उनका लंड घुसा। मैंने “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….” की आवाज के साथ स्वागत किया। वो मेरी चूत को चीरते हुए आगे लंड को बढाते रहे। जैसे कोई वीर सिपाही भयंकर तूफान के सामने चलता चला जाए। वो भी मेरे भोसड़े में घुसते चले जा रहे थे अंदर तक। तेज और गहरे धक्के दे रहे थे। मेरी चूत को फाड़कर उन्होंने अपना लंड जड़ तक घुसा दिया। पूरा लौड़ा अंदर बाहर करके जबरदस्त चुदाई करने लगे। उधर अनुपमा भी उनकी गांड पर हाथ मार मार कर उन्हें उत्तेजित कर रही थी। वो और जोर जोर से लंड पेलने लगते। मै भी “ओह्ह माँ….ओह्ह माँ…उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ….” की आवाज के साथ चुदवा रही थी। अब मेरी चूत उतना मोटा लंड सहने के काबिल हो चुकी थी।वो मेरी दोनों टांगो को उठाकर सम्भोग कर रहे थे। मजा लूट रहे थे। उन्होंने मुझे उठा लिया और मेरी टांगो को फैलाकर खूब जबरदस्त चुदाई कर रहे थे। कुछ देर बाद मुझे और अनुपमा दोनों को कुतिया बना दिया। अपना लंड कभी मेरी चूत में डालते कभी अनुपमा की चूत चोद रहे थे। हम दोनों लोग इसका आनंद उठा रही थी। बार बार ऐसा करके उन्होंने मेरी चूत से पानी निकलवा दिया। मै बार बार झड़ रही थी।

अनुपमा अभी तक एक भी बार नहीं झड़ी थी। मेरी चुदने की तड़प तो ख़त्म हो रही थी। लेकिन ननद ननदोई दोनों ही काम पर लगे थे। मै भी ननदोई जी को सहला कर जोश में ला रही थी। हचक हचक कर अपना लंड वो पेलने लगे। कुछ ही देर में स्पीड बहुत ही बढ़ गई। अनुपमा बहुत जोर जोर से “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह.. अई… अई…अई…..” की आवाज निकाल कर चुदवा रही थी। ननदोई ने सारा माल ननद की ही चूत में स्खलित कर दिया। लंड के निकलते ही सारा माल उसकी चूत में धार बनाकर किसी सफ़ेद नदी की तरह बहने लगा। मैने ऊँगली में उनके माल को लगाकर चखा। मुझे बहुत अच्छा लगा। मैंने जीभ लगाकर सारा माल चाट लिया। हम तीनो लोग थक कर बिस्तर पर लेट गए। रात में ननदोई जी ने उठ कर फिर से कई बार हम भाभी ननद की चुदाई की। दो तीन दिन रुक कर हमें बहुत ही मजा दिया। मै आज भी उनका लंड याद करती हूँ।

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