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पड़ोस वाली आंटी को चोदकर चूत में मुट्ठी डाली

chudai stories हेल्लो दोस्तों मैं जगदीश आप सभी का इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम में बहुत बहुत स्वागत करता हूँ।
मेरा घर रांची (झारखंड) में पड़ता है। दोस्तों मेरे घर के सामने ही एक परिवार रहता था। वो लोग जाति के गुप्ता थे। गुप्ता जी वकील थे और रांची की कचेहरी में प्रैक्टिस करते थे। जबकि उनकी बीवी हाउस वाईफ थी। वो घर पर ही रहती थी। गुप्ता जी के 2 छोटे बच्चे थे जो अभी स्कूल में पढ़ते थे। ये लोग अभी जल्दी ही हमारे मोहल्ले में घर बनवाकर रहने लगे थे। हम सभी गुप्ता की जवान और चुदासी बीबी को वकीलिन कहकर पुकारते थे। मेरे मम्मी और पापा भी उनको वकीलिन कहकर पुकारते थे। पर वो मुझसे 15 साल बड़ी थी इसलिए मैं उनको आंटी जी कहकर बुलाता था। दोस्तों वकीलिन यानी आंटी बड़ी जोर का माल थी। मेरा घर ठीक उनके घर के सामने पड़ता था। इसलिए मैं उनको हमेशा देखा करता था। आंटी का फिगर बिलकुल सनीलिओन की तरह मस्त था और जब उनके दर्शन हो जाते थे, मेरा लंड सलामी देने लग जाता था।

कितनी बार मैं सोचता था की काश आंटी की रसीली चूत मारने को मिल जाए। आंटी जी का फिगर 40 32 36 का था। इतने बड़े बड़े रसीले मम्मे थे की किसी भी जवान लड़के का लंड खड़ा हो जाए। पर मैं आंटी को बहुत सुंदर शरीफ औरत समझता था। गर्मियों का मौसम आ गया था। इसलिए दोपहर में लू चलती थी। धूप तो बहुत तेज रहती थी। इसलिए दोपहर 12 से 4 बजे तक आस पड़ोस में कोई दिखता ही नही था। एक दिन दोपहर के 2 बजे मैंने एक जवान लड़के को आंटी के घर से निकलते देखा। वो बाहर निकला और उनसे अपनी जींस की जिप उपर खीची। वो गुप्ता आंटी को चोदकर निकला था। आंटी जी उसे घर के बाहर छोड़ने आई जो जल्दी से उस लड़के ने उनके गाल पर किस ले लिया। फिर चलता बना। वो लड़का हमारे मुहल्ले का सबसे आवारा लड़का था जो बस इधर उधर चूत के जुगाड़ में रहता था। उस दिन मैं जान गया की गुप्ता आंटी बहुत बड़ी चुदक्कड माल है और उनको रोज नया नया लंड खाना पसंद है। अब धीरे धीरे वो मुझे और अच्छी लगने लगी। एक दिन मैं जान बुझकर उनके घर गया। दोपहर का वक्त था। गुप्ता आंटी ने दरवाजा खोला। उन्होंने हरे रंग की मस्त साड़ी पहन रखी थी। उनकी उम्र 35 की थी पर जवानी उनकर भरपूर थी और देखने में वो 16 साल की फुलझड़ी माल लगती थी।
“कैसो हो बेटे जगदीश?? बोलो क्या काम है???” आंटी हंसकर बोली   इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम
“आंटी मेरे घर का दूध फट गया है। प्लीस 2 कप दूध दे दो। कल मैं आपको दे दूंगा” मैंने कहा

वो मुझे अंदर ले गयी। आज मैं उनके घर में उनको चोदने के मकसद से आया था। आंटी के बच्चे स्कूल गये थे। घर पर कोई नही था। अगर वो चुदने को राजी हो जाए तो कितना अच्छा हो, मैं सोच रहा था। वो अंदर रसोई में दूध लाने चली गयी। जैसे ही वो आई तो मैंने दूध ले लिया। फिर दो कदम मैं चला और झूठ मूठ मैंने अपना दायाँ पैर मोड़ दिया।
“ओ ओ ओ….लगता है पैर में मोच आ गयी ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….” मैंने बहाना मारा। मैं किसी तरह गुप्ता आंटी के पास कुछ देर रहना चाहता था।
“अरे जगदीश बेटे क्या हुआ?? आओ इधर सोफा पर बैठो। लाओ तुम्हारे पैर में मूव लगा दूँ। आओ इधर बैठो” गुप्ता आंटी बोली
मैं तुरंत सोफा पर बैठ गया। जब आंटी दूसरे कमरे से मूव लाने जाने लगी तो पीछे से मैं उनका भरा हुआ जिस्म देखा। क्या मस्त माल थी वो। उनकी साड़ी से उनके पेट का गोरा रंग मुझे दिख रहा था। घर पर भी वो बैकलेस ब्लाउस पहनती थी जिसमे पूरी चिकनी, सेक्सी पीठ साफ़ साफ़ दिखती है। एक बार फिर से मेरा लंड खड़ा हो गया था। मैंने जान बूझकर अपने शर्ट की सामने की बटन खोल दी थी। मेरे सीने की काले काले सेक्सी बाल उनको दिख जाए। आंटी मूव ले आई मुझे सोफे पर लिटा दिया। फिर मूव लगाने लगी। मैं जानबूझकर सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….” की आवाज निकाल रहा था। जिससे मेरी चोट असली लगे। इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम
गुप्ता आंटी मेरे पैर की एड़ी में मूव अपने हाथ से लगाने लगी। धीरे धीरे उनके हाथ मेरे पैरो पर फिसलने लगे। फिर मैंने मौक़ा पाकर उनको पकड़ लिया और बाँहों में भर लिया। वो कुछ बोल पाती उससे पहले मैंने उनको सोफे पर पीछे की तरफ झुका दिया। उनके रसीले होठ पर मैंने अपने अपना मुंह रख दिया और जल्दी जल्दी उनके सेक्सी होठो को चूमने लगा। मैंने आंटी को बोलने ही नही दिया। वो हाथ छुड़ाने लगी तो मैंने उनकी दोनों कलाई को कसके पकड़ लिया। उसके बाद मैंने 5 मिनट तक उनके उपर झुका रहा और उनके ताजे रसीले होठ चूसता रहा। फिर आंटी पट गयी और उन्होंने विरोध करना बंद कर दिया। हम दोनों मुंह चला चलाकर एक दूसरे के होठ चूसने लग गये। उनके बाद गुप्ता आंटी मुझे ही देखने लगी। मैं भी उनको ताड़ने लगा। उनकी दोनों आँखों पर मैंने प्यार भरा किस कर लिया। अब वो मुझसे पट गयी थी।

“जगदीश बेटा!! साफ साफ बता तुम क्यों यहाँ आये थे???” आंटी हसंकर बोली
“आंटी जी !! आपकी रसीली चूत चोदने” मैंने कहा
उसके बाद गुप्ता आंटी चुप हो गयी। जैसे मन ही मन वो खुश थी की आज एक और मोटे लंड का जुगाड़ हो गया था। उसके बाद मैंने उनकी साड़ी का पल्लू उनकी छाती से हटा दिया। सामने उनका ब्लाउस था। उनकी 40” की लार्ज और फुल साइज की चूचियां मुझे साफ़ साफ़ दिख रही थी। मैंने तुरंत आंटी के ब्लाउस पर हाथ रख दिया और दबाने लगा। वो “ओह्ह माँ….ओह्ह माँ…आह आह उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ….” करने लगी। उनकी कामुक सिसकियाँ मैं सुन रहा था। फिर मेरे हाथ और तेज तेज उनके ब्लाउस पर नाचने लगे। ओफ्फ्फ गॉड!! कितनी सेक्सी, नर्म और मुलायम चूचियां थी। दोस्तों मुझे बहुत आनंद आ रहा था। जिस चुदासी औरत को मैं रोज देखा करता था आज उसकी चूत का इंतजाम हो गया था। मैं और तेज तेज गुप्ता आंटी की चूचियां दबाने लगा। वो बार बार अपना मुंह खोल देती थी और “ओहह्ह्ह…ओह्ह्ह्ह आआआअह्हह्हह…अई..अई. .अई… उ उ उ उ उ…”की आवाज निकालती थी।   इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम
फिर मैंने दोनों दूध पर अपने हाथ रख दिए और दबाने लगा। मुझे भरपूर सुख मिल रहा था। कुछ ही देर में आंटी सरेंडर हो गयी थी। उन्होंने मुझे बाहों में भर लिया और हम दोनों फिर से चुम्मा छाती करने लगे। उनके गुलाबी होठो पर मैंने कई बार अपनी उंगलियाँ दौड़ाई। उनके होठ किसी ताजे गुलाब की पंखुड़ी की तरह थे। उनके बाद मेरा बायाँ हाथ नीचे की तरफ दौड़ गया। मैंने उनके घुटनों के पास थे गुप्ता आंटी की साड़ी पेटीकोट के साथ उपर उठा दी। मेरा हाथ उनकी चिकनी जाँघों को सहलाते हुए उनकी रसेदार चूत पर पंहुच गया। मैंने आंटी की चड्डी के उपर से उनकी चूत की दरारों को सहलाना शुरू कर दिया। उसके बाद जो वो 5 मिनट में गर्म हो गयी थी। पर मैं और मजा लेना चाहता था। इस वक़्त मैंने आंटी को सोफे पर सीधा लिटा दिया था। मुझे उनकी चूत की गर्मी का अहसास हो रहा था। उनकी चुद्दी किसी भट्टी की तरह गर्म थी। मैंने बार बार आंटी की चूत पर हाथ घुमा रहा था। चूत की दरार में हाथ लगा रहा था। मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था और आंटी को तो भरपूर आनंद की प्राप्ति हो रही थी। इसलिए मैंने 10 मिनट तक उनकी चूत पर हाथ घुमा दिया।

आंटी जी “आआआअह्हह्हह…..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्हह्ह….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….” की सेक्सी आवाज निकालने लगी।
“आंटी जी बोलो कमरे में चलकर चूत दोगी की यही पर???” मैंने सवाल किया
“अब बेटा यही चोद लो मुझे” गुप्ता आंटी बोली
“तो फिर अपने कपड़े उतार दो” मैंने कहा
उसके बाद हम दोनों पूरी तरह नंगे हो गये। गुप्ता आंटी किसी देसी रंडी की तरह लग रही थी। जब उन्होंने अपना ब्लाउस और ब्रा उतारा तो उनका हुस्न तो देखते ही बन रहा था। फिर उन्होंने साड़ी, पेटीकोट और पेंटी निकाल दी। वो बड़े वाले सोफे पर सिर के नीचे तकिया लगाकर लेट गयी। मैंने नंगा होकर उनके उपर लेट गया। फिर मैंने उनके 40” के दूध हाथ में ले लिए और जल्दी जल्दी दबाने लगा। वो “सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” बोलकर। दोस्तों आंटी के दूध तो बहुत ही खूबसूरत थे। मैं बार बार उनके दूध को सहलाए जा रहा था। फिर मैंने दबाने लगा। आंटी भी मुझे बार बार किस कर रही थी। फिर मैं लेटकर उनके मम्मो को मुंह में लेकर चूसने लगा। आज तो मेरी लोटरी की निकल पड़ी थी। धीरे धीरे मुझ पर वासना पूरी तरह से हावी हो गयी और मैं आंटी के मम्मो को दबा दबाकर चूसने लगा। वो मम्मे नही बड़े बड़े आम थे जो की बहुत मीठे थे। मैं आंटी की जवानी का भरपूर मजा ले रहा था और मुंह लगाकर उनके दूध को चूस रहा था। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
उधर आंटी भी धीरे धीरे चुदासी हो रही थी। वो बार बार अपनी कमर को उठा रही थी। मेरे सिर पर बार बार वो अपने हाथ से सहला रही थी। साफ था की उनको भी भरपूर सुख मिल रहा था। मैंने फिर उसकी पीठ में अपने दोनों हाथ हाथ डाल दिए। मैंने उनको पकड़ कर करवट ली तो आंटी उपर आ गयी और मैं नीचे चला गया। मैं बार बार उनकी चिकनी पीठ को सहला रहा था। मुझे बहुत आनंद प्राप्त हो रहा था। मैं आँखें बंद करके उनके 40” के गोल गोल सुंदर दूध को चुसे जा रहा था। वो भी अपनी आँखें बंद करके मुझे अपनी रसीली गोल छातियां पिला रही थी। आज आंटी जी खुद चुदवाने के मूड में थी। दोस्तों उसकी छातियों के चारो पर 5 सेमी के आकर वाले गोल गोल घेरे थे जो बहुत ही सेक्सी लग रहे थे। मेरा तो लंड खड़ा हो चुका था और उसमे से रस भी निकलने लगा था।

मेरे हाथ आंटी की नंगी कामुक पीठ को बार बार सहला रहे थे। उनके गोरे जिस्म की त्वचा बहुत चिकनी और रेशमी थी। आज भी 35 साल की होने के बादजूद उसका बदन कसा हुआ था। मैं एक चूची पीता, फिर कुछ देर बाद उसे चूसकर दूसरी चूची मुंह में ले लेता और चूसने लग जाता। आधा घंटा तो यही खेल चला। इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम
फिर मैंने आंटी के दोनों पैर खोल दिए और अपना 7” लम्बा लंड उनकी रसीली चूत में डाल दिया। उसके बाद दोस्तों मैंने गहरे धक्के देना शुरू कर दिया। गुप्ता आंटी चुदने लगी। उन्होंने खुद बिना कहे अपने दोनों पैर खोल दिए। मेरा लंड उनकी चूत में पूरा भीतर तक घुसा हुआ था। मैंने उनको चोदने लगा तो वो “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” की कामुक आवाजे निकालने लगी। मुझे उनकी सेक्सी आवाजे बहुत आकर्षित कर रही थी। मैं जोर जोर से अपनी कमर नचा रहा था और आंटी की चूत ढीली कर रहा था। आंटी के चेहरा तो अजीब तरह से रंग बदल रहा था। चुदाई के यौवन सुख को उनके चेहरे पर साफ साफ़ देखा जा सकता था। धीरे धीरे मेरे धक्के की रफ़्तार बढ़ रही थी। आंटी बार बार आगे को खिसक जाती थी क्यूंकि मैं तेज तेज उनको पेल रहा था। उन्होंने मुझे बाँहों में भर दिया
ये सब देखकर मुझे अच्छा लगा की गुप्ता आंटी आज खुलकर बिना किसी शर्म और संकोच के चुदवा रही थी। मैं इसी तरह उनकी चुद्दी मारना चाहता था। 10 मिनट मैंने उनको किसी रांड की तरह चोदा, फिर लंड चूत से बाहर निकाल लिया। मैंने बड़ी देर तक आंटी का गुलाबी बड़ा सा भोसड़ा देखता रहा। गुप्ता आंटी काफी चुदी चुदाई माल थी। उनका भोसड़ा पूरी तरह फटा हुआ था।

उनके बाद मैंने उनके भोसड़े में अपना हाथ डालना शुरु कर दिया। आंटी जी “…….उई. .उई..उई…….माँ….ओह्ह्ह्ह माँ……अहह्ह्ह्हह…” की आवाज निकालने लगी। फिर मैंने धीरे धीरे अपने सीधे हाथ की पूरी मुट्ठी उनके भोसड़े में डाल दी। दोस्तों मुझे इस तरह औरतो की चूत में मुट्ठी डालना बहुत पसंद था। ये मेरा फेवरेट शौक था। कुछ देर में मेरी सीधे हाथ की मुट्ठी उनके भोसड़े में चली गयी। मुझे बहुत सुख मिला। मैंने बार बार मुट्ठी अंदर डालता, फिर निकाल लेता। इस तरह 5 मिनट मैंने गुप्ता आंटी के फटे भोसड़े में मुट्ठी की। उनके बाद लंड चूत में डालकर उनको आधे घंटे मैंने चोदा। फिर माल उनकी फटी चूत में गिरा दिया।
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