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पड़ोसी का लंड मेरी चूत में

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Hindi Sex Kahani घर में दाखिल होते ही मैंने देखा शान्ति भाभी आज घर पे नहीं थी. Story घर में विक्रांत भाई अख़बार ले के बैठे थे. ये sex जोड़ी हमारी पडोसी हैं और अंदर की बात बताऊँ तो मैं विक्रांत जी से चुदती रहती हूँ. मेरे पति के करीबी दोस्त ऐसे विक्रांत ने मुझे अपने लंड का दीवाना बनाया हुआ हैं. घर में शान्ति भाभी ना होने का मतलब था मुझे अपने लंड की खुराक मिलनी थी. मुझे देख के ही विक्रांत खड़े हुए और फट से मेरे पास आ गए.

सीधा मेरी चुंची के ऊपर हाथ रख के विक्रांत बोले, “क्या बात हैं भाई आजकल तो हमारी याद आप को आती ही नहीं हैं.?”

“क्या करूं आप की बीवी घर में ही रहेती हैं पुरे का पूरा दिन. मौका ही नहीं मिलता. मेरी मोबाइल ख़राब हैं, आप के दोस्त रिपेर करवा के नहीं देते.” मैंने अपने पल्लू को हटाते हुए कहा.

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विक्रांत ने ब्लाउज के बटन खोले और चुंची को बहार निकाली और बोला, “बड़ा चूतिया हैं मेरा दोस्त तो. वो सही होता तो आप हम को मिलते भी नहीं.”

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मुझ से हँसे बिना रहा नहीं गया. और वैसे उसकी बात सही थी, मेरा पति एक नंबर का लपूझन्ना था जिसे चूत का असली मजा आजतक मिला ही नहीं. 4 मिनिट की चुदाई कर के खुद को शहंशाह समझ लेता था. उसे क्या पता की मर्द तो विक्रांत जैसे लोग होते हैं जो चूत के कुँए को आधे घंटे तक खोदते हैं और फिर ऊपर से अपने लंड का पानी उसमे निकालते हैं. मैं यह सोच रही थी उतने में तो विक्रांत ने मुझे चुंचो के आगे नंगा कर दिया था. उसके गरम और कडक हाथ अब मेरी चूंचियों के ऊपर थे. मेरी साँसे फूलने लगी थी. मैंने उसके कंधे पे हाथ रख के कहा, “दरवाजा तो बंध कर दीजिए कोई आ गया तो….!”

विक्रांत ने हंस के कहा, “रुक जाओ मेरी रानी. तुम्हारी चुंचिया देख के जाने का मन नहीं हो रहा हैं….!”

मैंने गुस्सेवाला मुहं बनाने की एक्टिंग की और विक्रांत ने मेरे निपल्स के उपर हलकी बाईट ले ली. फिर वो दरवाजे की और बढ़ा और उसने बहार झाँक के दरवाजे को बंध कर दिया. वो आते आते अपनी पतलून को खोल रहा था. मैं उसकी यह सेक्स उत्सुकता देख के अपने आप को हंसने से नहीं रोक पाई. मुझे हँसता देख के विक्रांत बोला, “क्या बात हैं डार्लिंग, आज तो बड़ा मुस्कुरा रहे हो. लंड लेने की बेताबी हैं या हमारी मजाक उड़ा रहे हो…!”

मैंने अपने चुंचो को मसलते हुए कहा, “दोनों ही हैं एक साथ.”

विक्रांत जब मेरे करीब आये तो उनकी पतलून बदन पे नहीं लेकिन फर्श पे पड़ी थी और उनका देसी लंड जैसे की अंडरवेर को फाड़ने वाला था. मैं अपने घुटनों के उपर जा बैठी और उस अंडरवेर को लौड़े के प्रेशर से आजाद करने लगी. विक्रांत का मुर्गा वही पोजीशन में था जैसे मैं उसे लास्ट बार छोड़ के गई थी, तना हुआ और चूत फाड़ने के लिए बिलकुल सटीक पोजीशन में. मैंने अंडरवेर को घुटनों तक खिंचा और विक्रांत के लौड़े पे एक प्यार भरा चुम्मा दे दिया. विक्रांत ने मेरे बालो को पीछे से पकड़ा और मुझे अपने लंड की तरफ खींचने लगा. मैंने अपना मुहं खोला और उसका सुपाड़ा मेरे होंठो से टकरा गया. बड़ा मीठा हैं विक्रांत का लंड तो. ऐसा लगता हैं जैसे की शहद में भिगो के अंडरवेर में छिपा के रखता हो वो. मैंने मुहं को थोडा और खोला और लौड़ा मेरे मुहं में मस्त पेला जा चूका था. विक्रांत ने मेरे बालो को पकडे हुए ही मुझे आगे पीछे करना चालू कर दिया. मैंने भी अपने दांतों का हल्का हल्का प्रेशर उस शाफ्ट के ऊपर डाला और विक्रांत की आँखे बंध हो गई.

मैंने लंड की साइड में अपनी जबान लगाई और फिर एक झटके में उस गिरगिट जैसे लौड़े को मुहं से बहार कर दिया. उसके बाद मैंने जो चेष्टा की उस से तो विक्रांत के मोर ही उड़ने लगे थे. मैंने अपनी जबान बहार निकाली और मैं उसके मुतने के छेद को जबान से लपलपाने लगी. मुझे पता हैं की ऐसा करने से मर्दों को बहुत गुदगुदी होती हैं और ऐसा ही कुछ विक्रांत के साथ भी हुआ. वो आह आह कर के मीठी आहें भरने लगा. वो मेरे माथे को पीछे से पकड के अपने लौड़े से दूर करना चाह रहा था लेकिन मैंने अपना लपलपाना जारी रखा. वो बहुत ही उत्तेजित हो चूका था और उसने मुझे फट से दूर कर दिया.

मैंने जबान को होंठो के ऊपर फेरते हुए उसे पूछा, “क्या बात हैं इतनी जल्दी मुहं हटा दिया मेरा अपने लंड से आज तो.”

विक्रांत बोला, “अरे अगर नहीं हटाता तो सभी पानी अभी निकाल देता मेरा तोता. ऐसे जबान चलाती हो तो जैसे कुछ अजीब सी फिलिंग होती हैं मेरे दिल मैं. जैसे की बदन की सारी की सारी उत्तेजना लंड के सुपाडे में आके समा जाती हैं.”

मैं हंस पड़ी और खड़ी होके नग्न होने लगी. विक्रांत मेरे पीछे आ गया और उसने अपने लंड को मेरी गांड के ऊपर घिसना चालू कर दिया. वो पीछे से मेरी जांघो और गांड के कूल्हों पे अपना गरम लंड घिस रहा था. सच कहूँ मेरे बदन में उसके ऐसा करने से जैसे की करंट दौड़ रहा था. मैंने विक्रांत को गले से पकड के अपनी तरफ खिंचा और उसके होंठो के ऊपर अपने होंठ जमा दिए. विक्रांत ने मुझे एकदम डीप किस किया और फिर छोड़ा.

उसने मेरी चुंचिया हाथ में पकड़ी और बोला, “रानी आज तो मैं तुम्हारी चूत का स्वाद चखना चाहता हूँ. पिछली बार तो तुम्हारे पीरियड्स की वजह से मैं मुहं नहीं लगा पाया था लेकिन आज मैं उसे जरुर चखना चाहूँगा.”

विक्रांत चूत चूसने का बड़ा आशिक था और वो लंड से ज्यादा तृप्ति तो अपने मुहं से देता था. मेरे कपडे जमीन पर गिर चुके थे. विक्रांत ने मुझे उठा के बेड पे पटका और मुझे टाँगे खोलने के लिए इशारा कर दिया. मैं जान गई थी की वो अब चूत में गोता लगाने वाला हैं.

विक्रांत ने सीधे मेरे चूत के ऊपर अपने मुहं को लगाया और वो उसे चूसने और चाटने लगा. कभी वो मेरी चूत के होंठो पे अपनी जबान लगा रहा था तो कभी उसकी वो सटीक जबान मेरे चूत के दाने के ऊपर लपलपा रही थी. विक्रांत सच में चूत को चूसने का बड़ा रसिया था और शायद उसे लंड पेलने से ज्यादा भोसड़ी को मुहं से ख़ुशी देने में ज्यादा मजा आता था. मैंने उसके बालों को नोंचना चालू कर दिया क्यूंकि वो सुख मेरे लिए भी असीम लेकिन असह्य सा था. विक्रांत ने अपनी ऊँगली से मेरे निचे के होंठो को कुचलना चालू किया, और जैसे सेक्स के रस का एक झरना मेरी चूत से बहने लगा. विक्रांत अपनी ऊँगली से जैसे की खरोंच रहा था और मैं ऐसा बड़े आनंद से करवा रही थी.

चूत में डाल दी ऊँगली
विक्रांत ने कुछ 5 मिनिट और मुझे ऐसा सुख दिया और फिर उसने उस ऊँगली को दरार के ऊपर रख दिया. एक झटका और आधी ऊँगली उसने अंदर डाल दी. ख़ुशी के मारे मैं उछल पड़ी. उसकी गरम गरम ऊँगली मेरी चूत को बड़ी उत्तेजना देने लगी, ख़ासकर जब विक्रांत उसे दिवालो में रगड़ता था. विक्रांत ने मुझे अंदर से जैसे की भिगो डाला था और मैं जैसे की पिगलने लगी थी. और उसकी यही बात मुझे बहुत उत्तेजित करती हैं की उसे पता हैं की एक औरत को चोदना कैसे हैं और चोदने के लिए तैयार कैसे करना हैं…!

मैंने अपने दोनों हाथ अब विक्रांत के कंधो पे रख दिए और वो मुझे अभी भी उँगलियों से बड़ी मस्ती से चोद रहा था. उसने ऊपर देख के मुझे कहा, “क्यों मेरी रानी कैसा लग रहा हैं? मजा तो आ रहा हैं ना?”

मैंने टूटी हुई आवाज में उसे कहा, “आप के होते ही तो मैं जान पाई हूँ की यौन सुख क्या होता हैं. आप सच में एक सही चुदक्कड हैं. कभी कभी मैं आपकी बीवी से बहुत जलती हूँ. वो कितनी भाग्यशाली हैं जिसे आप के जैसा पति मिला जो औरत की हरेक छेद को प्यार देता हैं.”

इतना सुनते ही विक्रांत ने तो और भी बड़े प्यार से मेरे छेद को खुरेदना चालू रखा. मैं यह भी जानती थी की वो अगली ऊँगली गांड में भी जरुर डालेंगा. मुझे यह पता था क्यूंकि मैं विक्रांत के लंड से कितनी बार चुद चुकी हूँ और एक सेक्स करनेवाला अपने पार्टनर की हिलचाल पता होती हैं. और जिसका मुझे अंदेशा था वही हुआ, विक्रांत ने अपनी ऊँगली को चूत से हटा के अब मेरी गुदा के पास रख दी. पहले उसे वो टाईट छेद को धीरे से सहलाया और फिर एक हलके झटके से ऊँगली अंदर डाली. मैं ऊँगली के दर्द से उछल पड़ी. विक्रांत ने मेरी जांघ पकड़ी और मुझे उठने नहीं दिया. वो अपनी ऊँगली को कुछ देर चलाते रहा और फिर वो उठ खड़ा हुआ. मैंने अपनी टाँगे उसके लंड के आगमन के लिए फैला दी. विक्रांत मेरी बाहों में आया और उसने अपने लंड को जानबूझ के मेरी चूत की पलकों के ऊपर रख दिया. उसके लंड की गर्मी उस वक्त मुझे क्या मजे दे रही थी यह लिखने की तो कोई जरुरत ही नहीं हैं.

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वो अब धीरे धीरे अपने हथियार को मेरे बदन के ऊपर रगड़ने लगा. मेरे पुरे बदन में बहुत ही गुदगुदी होने लगी और मुझ से अब जरा भी रहा नहीं जा रहा था. मैंने विक्रांत के डंडे को अपने हाथ में पकड़ लिया और उसे कहा, “अरे मेरी जान इतना क्यों तडपा रहे हो. अब तो निचे से आवाज आणि ही बाकी हैं की अंदर आ जाओ.”

मेरे ऐसा कहते ही विक्रांत भी अपनी हंसी रोक नहीं सका. उसने अपने हथियार को हाथ में पकड़ा और उसे मेरे छेद के ऊपर सेट कर दिया. मैं समझ गयी के छेद सेट हो गया हैं. मैंने अपने हाथ से उसके लंड को पकड लिया. ऐसा कर के मैं मेक स्योर करना चाहती थी की चुदाई का असली झटका लगे तो पूरा अंदर घुस जाएँ.

विक्रांत ने मजे दे दिए
विक्रांत ने हलके से अपनी गांड को पीछे किया और एक झटका आगे मार दिया. मेरे मुहं से आह निकल गई और लंड मेरी चूत के अंदर फट से जा घुसा. फिर तो कुछ कहने को बाकी ही नहीं रहना था. विक्रांत ने अपने लंड से मेरी चूत के रोम रोम को सँवारना चालू कर दिया. वो पुरे लंड को सुपाडे तक बहार निकाल देता था और फिर धीरे से एक ही झटके में उसे पुरे तह तक डाल देता था. मैं अपनी आँखे बंध कर के उसके झटको को अपने अंदर समाती रही और वो और भी जोर जोर से मुझे नए झटके देता रहा.

विक्रांत ने अब मेरी टाँगे अपने हाथ से अपने कंधे पे रख दी और मुझे लगा की उसका लंड मेरे पेट तक घुस आया हैं. और फिर वो हलके हलके अपने झटको को बढाने लगा. विक्रांत बीच बीच में अपने होंठो को मेरे होंठो से लगा रहा था जिस से मेरी उत्तेजना सीमा के बहार बढ़ने लगी थी. मैं उसके कंधे को, होंठो को और गालों को बेतहाशा चूमने लगी और वो पागलो की तरह मेरी चूत में डंडा देने लगा.

दो मिनिट की ही होती हैं वो बेतहाशा उत्तेजना और फिर एक या दूसरा बंदा ढेर होता ही हैं. ज्यादातर इसमें पुरुष हारते हैं और ऐसा ही विक्रांत के साथ भी हुआ. उसके लंड से धार छुट के मेरे छेद को भर बैठी. वो फिर भी मुझे शांत करने के लिए झटको पे झटके मारता ही रहा. 1 मिनिट के भीतर मेरा बदन भी टूटने लगा और मैंने विक्रांत को जोर से अपनी बाहों में दबोच लिया. चूत और लंड का अटूट मिलन हुआ जैसे की कभी वो जुदा होने वाले ही नहीं हैं. दुसरे ही पल दूसरी कहानी बनी जब विक्रांत ने अपने लंड को बहार किया. मैंने खड़े हो के अपने कपडे पहन लिए. विक्रांत ने खड़े खड़े मुझे फिर से चूमा और वो दरवाजा खोल के बहार देखने लगा. उसने मुझे इशारा किया की बहार कोई नहीं हैं. और मैं उस कमरे से संतुष्ट मन और चूत को लेकर निकल गई….!

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