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प्यासी चाची KI CHUT को शांत किया

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यह मेरी पहली Kahani है जो मैं आप सब को बताने जा रहा हूँ। अभी मेरी उम्र 30 वर्ष है पर यह कहानी 11 वर्ष पहले की है। यह मेरी पहली कहानी है, लिखने में कोई भूल हो तो माफी चाहता हूँ। मेरा नाम शान है और मैं सूरत में रहता हूँ। बचपन से ही मैं अपने दादा-दादी और चाचा के साथ बैंगलोर में रहा और वहीं पढ़ाई की, वहाँ पर दादा की स्थाई नौकरी थी और चाचा दुबई में नौकरी करते थे। चाचा की शादी को 8 साल हुए थे और उनकी 2 बेटियाँ थी। चाचा साल दो साल में एक बार आते और 1 महीना रहते थे।

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 जैसा कि मैंने आप को बताया कि चाचा दुबई में थे और साल दो साल में एक महीने के लिये आते थे। तो आप समझ सकते हैं कि चाची कि हालत क्या होती होगी जब चाचा वापस चले जाते होंगे। दादा -दादी साथ रहते थे इसलिए उन्हें कहीं बाहर जाने या किसी से मिलने का भी कोई मौका नहीं था, बस कभी कभी कुछ काम हो तो मेरे साथ जाती थी।

मेरी चाची के साथ अच्छी बनती थी, मैं काम में उनकी मदद भी कर दिया करता था। और जब चाचा दुबई जाते तो मैं चाची के कमरे में सोता था, सब कुछ सामान्य था। मैं चाची के साथ मस्ती भी बहुत करता था लेकिन कभी उन्हें वासना भरी नज़र से नहीं देखा था।

समय बीतता गया और मैं भी जवानी में कदम रख रहा था और कुछ दोस्तो के साथ मिलकर कभी कभी ब्ल्यू फिल्म देख लिया करता था और कुछ सेक्स की किताब भी पढ़ता था छुप-छुप कर और कभी कभी मुठ भी मार लिया करता था।

जैसे जैसे मुझे सेक्स के बारे में पता चलता गया मेरी नज़र बदलती गई और मेरी नीयत बदलती गई। अब मैं चाची के बारे में सोच-सोच कर मुठ मारने लगा और मन में उन्हें चोदने की इच्छा जागी। हमारे घर में दो बेड रूम थे, एक में दादा-दादी और चाची की एक बेटी सोते और दूसरे में मैं चाची और मेरी एक चचेरी बहन सोते थे। (मैं एक बेड पर और चाची और बहन एक बिस्तर पर सोते।  तब चाचा की शादी हुई थी और चाचा एक महीने के अंदर ही वापस चले गये थे, तब से मैं चाची के कमरे में ही सोता हूँ)

जिस दिन मैंने कोइ ब्ल्यू फिल्म देखी हो उस रात मुझे नींद ही नहीं आती, पूरी रात चाची को देखने में ही निकल जाती, कभी उनकी नाईटी ऊपर सरक आती और उनकी गोरी जांघ दिखाई देती तो कभी उनके स्तनों की झलक मिलती। नाईट लेम्प की रोशनी में ही मजे लेने पड़ते थे। कई बार सोचा कि उनके स्तन दबाऊँ, गोरी जांघ पर हाथ फेरूँ, पर डर लगता था कि कही चाची ने शोर मचाया और दादा दादी को बता दिया तो अंजाम बहुत बुरा होगा।

समय बीतता गया और धीरे-धीरे अब मैं सेक्सी किताबें और ब्ल्यू फिल्म की केसेट घर पर ही लाने लगा और जब भी मौका मिलता, छुप-छुप कर पढ़ता और फिल्म देखता था। जब भी मौका मिलता, मैं उनके गुप्त अंगों को देखने की कोशिश करता और मस्ती-मस्ती में उन्हें छू भी लेता था। चाची भी इसका कोइ विरोध नहीं करती थी, शायद उन्हें भी आनन्द आता था। लेकिन यह सब तभी होता था जब दादा-दादी कहीं बाहर गये हों।

तभी हमारे एक रिशतेदार की मृत्यु हो गई और दादा-दादी को 15 दिनों के लिये सूरत जाना पड़ा। अब घर पर मैं, चाची और उनकी 2 बेटियाँ रह गये। दोनों बेटियों दे स्कूल दोपहर के थे और मेरी सुबह में ! यानि मैं घर आता तो वो दोनों स्कूल गये होते थे और शाम को 5.30-6.00 बजे आते थे।

दादा-दादी को गए दो दिन हो गये थे और इन दो दिनों में मैंने देखा कि चाची कुछ बदली-बदली सी लग रही थी। मतलब एक दम बिंदास, मस्ती ज़्यादा और काम कम !

और घर पर कोई बुजुर्ग नहीं होने की वजह से उनके कपड़े भी अस्त-व्यस्त रहने लगे थे, लेकिन इससे मुझे भी आनन्द मिलने लगा और मैं उनके गोरे सेक्सी बदन को देखने और छूने का कोई मौका नहीं छोड़ता।

मैं अपने दोस्त से ब्ल्यू फिल्म की एक केसट ले आया और कमरे में ही छुपा दी, जो मुझे देख कर लौटानी थी। सोचा घर पर कोई नहीं हो और मौका मिले तो देख लूंगा।

 

अगले दिन मैं कॉलेज़ से लौटा, चाची ने कहा- चलो जल्दी से कपड़े बदल ले, मैं खाना लगाती हूँ और वो रसोई में चली गई। मैंने कपड़े बदले और खाना खाना खाने बैठ गया। खाना खाकर चाची पास ही कुछ सब्जी लेने चली गई और मैं घर पर अकेला !

मैंने सोचा कि मौका अच्छा है फिल्म देखने का, और मैं वो केसेट लेने कमरे में गया। वहाँ जाकर देखा तो केसेट वहाँ से गायब था। मैं एकदम चिन्ता में पड़ गया। एक तो केसेट दूसरे का और कहीं चाची के हाथ में आ गया तो दादा-दादी को बताने का डर !

मैंने सब सामान इधर उधर कर दिया पर वो केसेट नहीं मिला। थोड़ी देर में चाची वापस आ गई तो मैंने जल्दी-जल्दी सब सामान वापस रख दिया और कुछ बाहर ही रह गया।

चाची आई तो पूछने लगी- यह सब क्या कर रहे हो? और सामान क्यों निकाला?

मैंने कहा- कुछ नहीं ! एक किताब रखी थी मैंने अंदर ! वही ढूंढ रहा हूँ, मिल नहीं रही है।

मेरी चिन्ता मेरे चेहरे पर साफ नज़र आ रही थी और चाची जिस तरह मुझे घूर रही थी वो देख कर मुझे लग रहा था कि वो केसेट उनके हाथ लग गई है। वो वही बैठ गई और थोड़ी देर मेरी हरकतों को देखती रही, मेरी चिन्ता देख वो बोली- चिन्ता मत कर, तूने और कहीं रख दी होगी, बाद में आराम से ढूंढना, मिल जायेगी। अपने घर में से कहाँ जायेगी।

उस रात मुझे नींद नहीं आई, पूरी रात सोच में ही निकल गई कि अब क्या होगा?

खैर रात बीत गई और सुबह हुई। सुबह से ही मैंने चाची में कुछ बदलाव देखे ! चाची बहुत खुश नजर आ रही थी और वो मुझमें भी बहुत दिलचस्पी दिखा रही थी। किसी न किसी बहाने से मेरे गाल पकड़ती तो कभी प्यार से बालों में हाथ फेरती। खैर मैं कॉलेज़ चला गया पर वहाँ भी मन नहीं लगा। दोपहर 12.15 बजे घर वापस आया, चाची अपने काम में व्यस्त थी तो मैं फिर से विडियो केसेट ढूंढने मे लग गया क्यूंकि घर पर मेरे और चाची के अलावा और कोई नहीं था।

“तुम क्या ढूंढ रहे हो? मैं कुछ मदद करूँ तुम्हारी?”

यह सुनकर मुझे थोड़ा और यकीन हो गया कि वो केसेट चाची के ही पास है, लेकिन डर के मारे कुछ बोल नहीं पाया। फिर चाची वहीं बैठ गई और मेरी हरकतों को देखती रही। थोड़ी देर बाद चाची ने फिर से पूछा- सच बताओ कि क्या ढूंढ रहे हो? जो है सच बताओ मैं कुछ नहीं कहूंगी। हो सकता है कि मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकू !

यह सुनकर मुझ में थोड़ी हिम्मत आई और मैंने कहा- मैंने यहाँ एक वीडियो केसेट रखा था, मिल नहीं रहा ! वही ढूँढ रहा हूँ !

तो चाची ने पूछा- कौन सा केसेट? किस फिल्म का था?

मैंने डर के मारे कहा- मेरे दोस्त के भाई के शादी का था !

चाची ने तुरंत पूछा- कल से तू वही ढूंढ रहा है?

मैंने कहा- हाँ चाची !

“तो कल क्यों झूठ बोला था तूने ?

मैं कुछ नहीं बोल सका। फिर चाची मेरे पास आई और मुस्कुराते हुये मेरे गाल पकड़ कर कहा- इतना परेशान मत हो, मिल जायेगी ! चल सब सामान वापस रख दे अभी !

 

इतना बोल वो वहाँ से चली गई और अपने काम में लग गई। चाची की बातें सुनकर मुझे थोड़ा डर भी लगा और कहीं थोड़ी खुशी भी हो रही थी, खुशी इस बात की कि अगर चाची ने वो वीडियो देख ली है और मुझसे नाराज़ नहीं हैं तो मेरा उन्हें चोदने का सपना सच हो सकता है। लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी चाची से कुछ भी कहने की। मैं हाल में सोफे पर बैठा था, मन में कई प्रकार के सवाल जवाब चल रहे थे।

तभी चाची आई और मेरे बाजू में बैठ गई। तभी मैंने हिम्मत कर के कहा- चाची, अगर वो केसेट आप के पास है तो प्लीज मुझे दे दीजिये, वो वापस लौटानी है मुझे !

चाची- अरे तुझे कहा ना, टेन्शन मत ले, पहले जा और अपने कपड़े बदल ले !

मैं तुरंत उठा और दूसरे कमरे में कपड़े बदलने लगा। तभी मैंने अलमारी के शीशे में देखा तो मेरे पीछे चाची दरवाजे के पास खड़ी मुझे देख रही हैं। मैंने उन्हें लगने ही नहीं दिया कि मैंने उन्हें देख लिया है, और जैसे ही मैं कपड़े बदल कर मुड़ा, चाची वहाँ से जा चुकी थी। वहाँ से मैं रसोई में गया, चाची खाना परोस रही थी, मैं खाना खाना खाने बैठ गया। हम दोनों आमने-सामने बैठे थे, मैंने चुपचाप सर झुकाये खाना खाया और बेडरूम में आकर अपनी किताब ले कर बैठ गया। थोड़ी देर बाद चाची भी आ गई और एक मैगज़ीन लेकर मेरे पास बैठ गई।थोड़ी देर बाद चाची ने मस्ती शुरू कर दी, वैसे तो हम अकसर करते थे, पर जैसा मैंने कहा, उस दिन उनका मूड कुछ अलग ही था। वो मुझे गुदगुदी करने लगी।

मैंने कहा- प्लीज़ चाची, मत करो ऐसा, मैं करुंगा तो आप को पता चलेगा, फिर मत बोलना !

चाची तुरंत बोली- अच्छा तो क्या करेगा तू ? हाँ ? मैं भी तो देखूँ जरा?
और उनकी हरकत ज़ारी रही। मैं डर के मारे कुछ बोल नहीं पाया पर इधर मेरा लंड भी मस्ती में आ रहा था और सख्त होता जा रहा था। इस बीच चाची ने मुझे इतना परेशान किया कि मैं एकदम से उठा और उन्हें गुदगुदी करनी चालू कर दी। चाची भी खड़ी हो गई और हम दोनों मस्ती में खो गये।

तभी मैंने उनके दोनों हाथ पकड़ लिये और उन्हें धक्का देकर बिस्तर पर लिटा दिया। मैंने उनके दोनों हाथ कस कर पकड़ रखे थे वो बिल्कुल हिल नहीं पा रही थी, उनका पल्लू कहीं तो ब्लाऊज़ कहीं था। उन्होंने अपने पैर हिलाने की कोशिश की पर मैंने उन्हें अपने पैरों के बीच दबोच रखा था। चाची मेरे सामने एकदम चित्त पड़ी थी। इधर मेरा लंड पूरे जोश में आ गया था पर मन में अभी भी थोड़ा डर था, मैंने उन्हें कहा- देखा ना, मैं क्या कर सकता हूँ ? अब बोलो आप?

चाची कुछ नहीं बोली और मुस्कुरा कर मुझे देखती रही। फिर मैंने उन्हें छोड़ दिया पर इस हाथापाई में मेरा हाथ उनके शरीर पर कहाँ-कहाँ लगा, मुझे भी कुछ पता नहीं चला क्योंकि एकदम अचानक और इतनी जल्दी हुआ। जैसे ही मैंने चाची को छोड़ा तो उठ कर उन्होंने अपने अस्त-व्यस्त कपड़े देखे और मुस्कुरा कर बोली- तुमने दम तो बहुत है ! मेरे सारे कपड़े खराब कर दिये !

यह कह कर वो दूसरे कमरे में चली गई। मैंने भी अपने कपड़े ठीक किये और फिर से अपनी किताब ले कर बैठ गया। पर अब कहाँ किसी किताब में ध्यान लगना था, मैंने उस दिन पहली बार किसी स्त्री को पकड़ा था।

मेरे दिमाग में वही दृश्य चल रहा था कि चाची वापस आई और मेरे बाजू में बैठ गई। वो अपने कपड़े बदल कर आई थी, अब वो नाईटी पहन कर आई थी। मैंने गौर से देखा तो यह वही नाईटी थी जो चाची साल में सिर्फ एक महीना पहनती थी वो भी सिर्फ रात में, जब चाचा आते थे, क्योंकि नाईटी एकदम सिल्की और सेक्सी थी, उसमें चाची और भी बिजली गिरा रही थी। उन्हें बस तरह देख मेरा लंड तो एकदम तन गया, मेरी नज़र चोरी-चोरी उन्हें ही निहार रही थी और चाची भी मुझ पर ही नज़र रखे हुए थी।

थोड़ी देर बाद उन्होंने कहा- तेरा ध्यान तो किताब में है ही नहीं, क्यों पकड़ रखी है किताब? लगता है अब भी कोई परेशानी है?

मैंने नज़रें चुराते हुए कहा- हाँ, वो केसेट मुझे कल वापस करनी है, अगर आप को पता है कि कहाँ है तो प्लीज़ बता दो !

चाची- हाँ वो मैं सफाई कर रही थी तो मिली थी, पर वो शादी की ही है ना?

 

चाची ने जोर देते हुए पूछा, अब तो चाची ने खुद कबूल किया कि केसेट उनके पास है। मैं एकदम डर गया था और यह अभी यकीन होने लगा था कि चाची ने वो फिल्म देख ली है, मैं उनसे नज़रें नहीं मिला पा रहा था, मैंने एक बार फिर कहा- हाँ शादी की ही है।

 

तो चाची ने तुरंत ही फिर पूछा- सच्ची बता ! तू कुछ छुपा रहा है, जो भी है बता दे, तू नहीं बतायेगा तब मुझे पता तो चल ही जायेगा !

मेरे पास कोई जवाब नहीं था, फिर उन्होंने मेरे हाथ से किताब ले ली और एक तरफ़ रख दी और एक सेक्सी मुस्कान देते हुए कहा- घबरा मत ! मुझे सब पता है, मैं किसी को नहीं बताऊंगी।

चाची के मुँह से यह सुनते ही मुझे थोड़ी राहत हुई, मैंने चाची को धन्यवाद कहा और उन्हें एक टक देखता रहा।

चाची बोली “अच्छी थी वैसे फिल्म, पसन्द अच्छी है तुम्हारी !

यह सुनते ही मन तो किया कि दबोच लूं चाची को पर उस वक़्त हिम्मत नहीं हुई, वो मेरा हाथ धीरे धीरे सहला रही थी, मेरे पूरे शरीर में जैसे करंट दौड़ने लगा था। पहली बार था इसलिये मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था, मैंने अपना हाथ वापस खींच लिया, तो वो बोली- क्या हुआ ?अच्छा नहीं लगा ? इतने प्यार से सहला रही हूँ।

मैंने कहा- अच्छा तो बहुत लगा पर !

उन्होंने तुरंत कहा- पर क्या ? बोलो तो सही, डरो मत !

मैंने कहा- आप नाराज़ हो जायेंगी !

चाची- अरे ऐसा बिल्कुल नहीं है, मैं क्यों नाराज़ होऊँगी? तुम कुछ भी कहो, कुछ भी करो, तुम्हें तो छूट है !

चाची के मुँह से ये शब्द सुन कर मुझे भी थोड़ा जोश आ रहा था। चाची मुस्कुराने लगी, अब मुझे यकीन होने लागा था कि चाची को वाकई में मुझसे चुदवाने का मन है। बस इसी यकीन से मैं चाची के करीब गया और उनका हाथ पकड़ कर प्रेम से सहलाने लगा और मेरी नज़र उनके गोरे गोरे स्तनों पर थी जो सिल्की नाईटी में एकदम तने हुए नज़र आ रहे थे।

तभी चाची ने कहा- क्या देख रहे हो इतने ध्यान से? कुछ दिखा?

मुझे उनकी बातों से और आत्मविश्वास आता जा रहा था। मैंने भी उनकी तरह शब्दों के वाण छोड़ना शुरु किया और कहा- अभी तक को कुछ नहीं दिखा, और कुछ नहीं मिला ! बस कोशिश जारी है, पर यकीन है कि जल्द ही सब कुछ मेरे पास होगा।

मेरे निरंतर स्पर्श से चाची मदहोश होती जा रही थी, मैंने मौका देख कर धीरे धीरे उनके वक्ष पर हाथ फेरना चालू कर दिया। तभी चाची ने कातिल अंदाज़ में मुझे देखते हुए कहा- शान, तू बड़ा छुपा-रुस्तम निकला, मैं तो तुम्हें छोटा बच्चा समझती थी पर तुम तो कुछ और ही निकले !

मैंने कहा- बस आप साथ दो तो मेरी और भी खूबी दिखाऊँ ! फिर चाची ने मेरा हाथ पकड कर अपने वक्ष पर रख दिया और एक लम्बी सांस ली। बस फिर क्या था, मुझे तो हरी झंडी मिल गई। मैं दोनों हाथों से उनके सख्त स्तन मसलने लगा। इससे चाची एकदम मदहोश होती जा रही थी और मेरा लंड भी अंडरवीयर फाड़ रहा था। फिर चाची ने मेरे लंड पर हाथ रखा और पैंट के ऊपर से ही सहलाने लगी, उनके स्पर्श से मेरे पूरे शरीर में मानो एक करन्ट सा लगा, किसी ने पहली बार मेरे लंड को छुआ था और मैंने उनके स्तनों को पूरे जोर से निचोड़ दिया जिससे उनकी चीख निकल पड़ी- अ आअ आह।

 

हम दोनों पूरे जोश में थे, सब कुछ भूल चुके थे कि हम कहाँ हैं, हमारा रिश्ता क्या है और समय क्या हुआ है।

मैं उनके वक्ष को सहलाते-सहलाते उन्हें चूमने लगा, उनके गोरे गालों पर, गले पर हर जगह ! चाची भी मेरा पूरी तरह साथ दे रही थी, वो भी मुझे चूमने लगी। उनके मुँह से निरंतर सिसकियाँ निकल रही थी- ओह.. अह. हुम्म… आह !

फिर मैंने उन्हें सोफे पर ही लिटा दिया और उनके पूरे शरीर को दबोचने लगा। चाची भी पूरे जोश में थी और मेरे बालों में तो कभी मेरे हाथों को सहलाती। अब चाची चुदने के लिये बिल्कुल तैयार हो चुकी थी, वो ऐसे तड़प रही थी जैसे सालों से भूखी हों।

मैं उनकी नाईटी खोलने लगा कि अचानक दरवाज़े पर घण्टी बजी, घण्टी की आवाज़ सुनते ही हम दोनों घबरा गये और रुक गये। तभी हमरी नज़र सामने लगी घड़ी पर पड़ी, शाम के 5.30 बज चुके थे, चाची ने कहा- उठ, मैं देखती हूँ ! बच्चे स्कूल से आ गये होंगे।

मेरा मन तो नहीं था उनको छोड़ने का, पर मजबूरी थी, मैं उठ कर एक ओर बैठ गया, चाची मुस्कुराते हुए उठी और अपने कपड़े और बाल बराबर करने लगी और जाकर दरवाजा खोला। दोनों बच्चे आ गये थे, मेरी नजर अभी चाची पर टिकी हुई थी, मैं वहीं से चाची को देख रहा था और मेरा लंड था कि शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा था। एक तो पहला मौका वो भी अधूरा रह गया। चाची बच्चों के साथ दूसरे कमरे में चली गई। मैं भी उनके पीछे वहाँ पहुँच गया और दरवाजे से टिक कर खड़ा उन्हें देखता रहा। बीच-बीच में उनकी भी प्यासी नज़र मुझे देखती।

थोड़ी देर बाद चाची मेरे पास आई और मेरे पैंट में टावर को देख हाथ फेरा और बोली- अभी इसे सुला दे, थोड़ा आराम करने दे, इसे, बाद में बहुत काम करना है।

और वो रसोई में चली गई और अपने काम में लग गई। मैं भी वापस अपने कमरे में आकर बैठ गया, पर दिमाग में तो वही दोपहर वाला दृश्य चल रहा था, अब मैंने तय कर लिया था कि जो भी हो चाची को जल्द से जल्द चोदना है, क्योंकि मैं उनकी प्यास और तड़प देख चुका था।

इन्हीं ख्यालो में समय बीत गया और 8.00 बज गये। चाची ने खाना खाने को आवाज़ लगाई, हम खाना खाने बैठे पर मेरी नज़र चाची से हट ही नहीं रही थी। चाची भी मेरी तरफ देखती और हमारी नज़र एक होती तो वो नज़र घुमा लेती।

खाना खा कर मैं और दोनों बच्चे हाल में टीवी देखने बैठ गये, चाची अपना काम कर रही थी, मेरा ध्यान तो किसी और दुनिया में ही घूम रहा था। थोड़ी देर में चाची अपना काम निपटा कर मुस्कुराते हुए आई और मेरी बगल में बैठ गई और दोनों बच्चो से कहा- चलो आज हम दादा दादी के कमरे में सोयेंगे और शान अकेला सो जायेगा।

(दादा दादी के नहीं होने के कारण हम सब एक ही कमरे में सोते थे)

यह सुनकर मैं एकदम दंग रह गया, मुझे लगा कि शायद चाची मुझसे दूर रहना चाहती हैं, मुझे कुछ समझ नहीं आया कि चाची के दिमाग में क्या चल रहा था.

वो दोनों बच्चो को लेकर दूसरे कमरे में चली गई। उनके जाते ही मैंने अपने कपड़े बदल लिये .. हाफ पैंट और बनियान जो मैं अक्सर रात में पहनता हूँ। और वापस आकर बैठ गया। दिमाग अभी भी उन्हीं ख्यालों में खोया था।

रात के दस बजे होंगे, मैंने देखा कि चाची कमरे से निकली और बाहर से दरवाजा बंद कर रही थी। अब मुझे चाची की योजना समझ आने लगी थी। उन्होंने वही सिल्की नाईटी पहनी थी, बहुत सेक्सी लग रही थी। वो आकर मेरे बाजू में बैठ गई। मन तो कर रहा था कि बदोच लूँ पर सोचा- जल्दबाजी में कहीं काम ना बिगड़ जाये !

उन्होंने मुस्कुरते हुए पूछा- क्या कर रहा है? सोया नहीं अब तक?

मैंने कहा- टीवी देख रहा हूँ।

उन्होंने तुरंत रिमोट से टीवी बंद कर दिया और कहा- टीवी में ध्यान तो है नहीं तेरा !

मैंने कहा- दोपहर के बाद से मेरा ध्यान कहीं और ही घूम रहा है !मैं समझ गया था कि चाची अब मुझ से चुदवा कर ही रहेंगी।

मैं वहाँ से उठ कर अपने कमरे में आ गया, मेरे पीछे ही चाची भी आ गई। दोनों के सब्र का बांध टूटता जा रहा था। चाची ने अंदर आते ही बत्ती बुझा दी और आकर बिस्तर पर मेरे पास बैठ गई और कहा- मैंने कहा था तो बराबर सुलाया ना (लंड को) आराम कर लिया ना?

मैंने कहा- भूखे शेर को भला नींद कैसे आएगी, वो बिना शिकार किए कहाँ आराम करेगा?

चाची का हाथ मेरे लंड पर घूमने लगा। उनकी इस हरकत को देख मैंने उन्हें अपने ऊपर खींच लिया, अपनी बाहों में समेट लिया और उनकी चूचियाँ दबाता, चूमता तो कभी उनकी ग़ाण्ड पर हाथ फेर उसे दबाता। हम दोनों फिर पूरे जोश में आ रहे थे। चाची फिर सिसकियाँ भर रही थी- ओह्ह अह्हा उफ्फ्फ ईई !

फिर मैंने उनके होंठ पर अपने होंठ रख दिये और चूमने लगा। उनकी जीभ मेरे मुँह में घूमने लगी और उनके हाथ मेरे बालों में !

 

मैंने उनकी नाईटी निकलनी शुरु की, सारे बटन खोल दिये और नाईटी निकाल फेंकी। अब उनका हाथ मेरे अन्डरवीयर में था। बड़े प्यार से मेरा लंड सहला रही थी चाची !

दोनों पूरी तरह एक दूसरे में खोये हुए थे, लेकिन अंधेरे की वजह से मुझे उनके सेक्सी बदन को देखने का आनंद नहीं मिल रहा था। फिर मैंने उनकी ब्रा भी उतार फेंकी और अब मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उठ कर बत्ती जला दी। जैसे ही मैंने चाची के बदन को देखा, मेरे होश उड़ गये, गोरा बदन, सेक्सी फिगर, गोरे गोरे कसे हुए स्तन और खड़े चुचूक !

चाची की शादी को भले ही आठ साल हो गये थे पर उन आठ सालों में वो बहुत कम चुदी थी, इस वजह से उनका फिगर कुंवारी लड़की से कम नहीं था। चाची बिस्तर पर सिर्फ पैंटी में लेटी थी, मैंने भी अपनी बनियान और निकर उतार दिये और चाची के ऊपर आ गया और उनके गोरे बदन से खेलने लगा। कभी स्तन चूसता तो कभी तो कभी उनके पूरे बदन को चूमता। फिर मैंने उनकी पैंटी में हाथ डाला, एक दम चिकनी और सफ़ाचट थी। मैंने अपनी उंगली निशाने पर रख दी और धीरे से अंदर की और धकेला। चाची तो जैसे सातवें आसमान पर पहुँच गई थी, उनकी निरंतर सिसकियाँ निकल रही थी- ओह्ह अह्हा उफ्फ्फ मूह्ह्ह

मेरी उंगली अंदर जाने लगी और उनकी सिसकियाँ भी तेज़ होने लगी- अह्ह्ह अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह अह्ह्हा

उनकी चूत एक दम गीली थी, मेरी उंगली अंदर-बाहर होने लगी। तभी चाची ने मुझे कस कर अपनी बाहों में पकड़ लिया और कहा- शान प्लीज़, मुझे और मत तड़फ़ाओ, जल्दी से मेरी प्यास बुझाओ !

मैंने कहा- अब आप कभी प्यासी नहीं रहोगी ! मैं आपको कभी भी प्यासा नहीं रहने दूंगा !

और मैंने उनकी पैटी उतार दी, अब मस्त टाईट चूत मेरे सामने थी। मैंने अपना अंडरवीयर भी उतार दिया और अब हम दोनों निर्वस्त्र एक दूसरे से लिपटे हुए थे। मेरी उंगली उनकी चूत में और उनके चुचूक मेरे मुँह में और मेरा लंड उनके हाथ में !

उनकी सिसकियाँ और तेज़ होती जा रही थी- अह्ह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह्ह ऊऊफ्फ्फ्फ्फ्फ्

फिर मैंने चाची से कहा- मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चख तो लो !

और लंड उनके मुँह में रख दिया और वो बड़े प्यार से मेरे लंड को चूसने लगी। अब मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था, मैंने उनके बालों में हाथ डाला और पकड़ कर उनका मुँह मेरे लंड की ओर खींचने लगा। फिर मैंने उनके वक्ष को चोदना शुरु किया। दोनों हाथों से दोनों स्तनों को पकड़ा और अपना लंड बीच में डाल कर चोदने लगा।

(मैंने कई फिल्में देखी थी इसलिये थ्योरी तो पूरी आती थी आज प्रेक्टिकल करना था सो पूरा मजा ले रहा था)

और इधर चाची का बुरा हाल था- आआह्ह्ह ओह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह मह्ह्ह्ह अहाआअ फिर मैंने उनकी दोनों टांगे फैलाई और बीच में आ गया। तभी चाची ने मुझे कोंडोम दिया और कहा- इसे लग लो, सावधानी रखना अच्छा है !

और मैंने उनकी बात मान ली और अपना लंड उनकी रसीली चूत पर रख दिया और धीरे धीरे अंदर डालने लगा।

उनकी सिसकियाँ और बढ़ गई- आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओफ्फ्फ्फ्फ उम्म्म्म्म्म्म्म अह्ह्ह्हाअ

उनकी चूत इतनी गीली थी कि मेरा लंड हर धक्के के साथ अंदर समाता जा रहा था, थोड़ी ही देर में मेरा पूरा लंड अंदर समा गया। फिर मैं थोड़ी देर उनसे लिपट कर यों ही पड़ा रहा और उनकीचूचियों से खेलता रहा।

चाची ने मुझे कस कर पकड़ रखा था, फिर मैंने धीरे धीरे चोदना शुरु किया, दोनों टाँगों को पकड़ा और अपनी स्पीड तेज़ की। चाची सातवें आसमान में थी और पूरे जोश में भी ! और लगातार सिसकियाँ भर रही थी।

 

मेरी गति तेज़ होती जा रही थी और चाची के सिसकियाँ भी !

 

अब चाची ने मुझे अपनी बाहों में कस कर जकड़ लिया पर मेरी चोदने के रफ्तार बढ़ती ही गई और कुछ ही समय में मैं झड़ गया और उनके ऊपर ही लेट गया।

 

उस रात मैंने चाची को दो बार चोदा और बारह दिन घर पर कोई नहीं था तो रोज़ दिन में और रात में जब भी मन करे तब चोदता।

पर दादा-दादी के वापस आ जाने के बाद तो दिन में कोई मौका नहीं मिलता पर रात में हर दूसरे-तीसरे दिन चाची को चोदता।

और हाँ, दिन में भी अगर घर पर कोई नहीं हो तो कोई मौका नहीं छोड़ता और चाची भी मेरा पूरा साथ देती थी। यह सिलसिला करीब चार साल चला। फिर मैं अपने शहर सूरत आ गया और यहीं का होकर रह गया।

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