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विधवा पड़ोसन की चूत चोदकर सुहाग का सुख दिया

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Sex Stories हेलो दोस्तों मेरा नाम प्रीतम है। पटना, बिहार का रहने वाला हूँ। मेरे घर के पास की एक आंटी रहती थी। उनका नाम लुबना था। सब लोग उनको आंटी कहकर ही बुलाते थे। वो देखने में बहुत सुंदर और सेक्सी माल थी। दोस्तों लुबना आंटी को देखकर ही लंड खड़ा हो जाता था। दिल करता था अभी जाकर उनको गिराकर चोद लूँ अपने लम्बे लंड से। पर मैं उनकी इज्जत भी बहुत करता था। लुबना आंटी की उम्र 35 साल थी पर देखने में आज भी कच्छी कली लगती थी। आंटी का फिगर 38 का था। शादी शुदा होने के बादजूद भी वो हमेशा सलवार सूट। मैक्सी, जींस टॉप में घर में रहती थी।
उनके दूध कसे कसे गोल गोल उनके सूट से ही दिख जाते थे। अक्सर वो बिना दुप्पटे के ही बाहर निकल आती थी और सुबह सुबह अपने छोटे से बगीचे में बाल्टी और जग लेकर पौधों को पानी देती थी। लुबना आंटी को बागवानी का बड़ा शौक था। मैं सुबह सुबह बाहर मेज लगाकर पढता था और आंटी को ही ताड़ता रहता था। जैसे वो अपने बगीचे में पौधों को पानी देने आती थी मैं किताब उठाकर पढ़ने का बहाना बनाता था पर असल में मैं उनको ताड़ रहा होता था।
“आंटी गुडमोर्निंग!!” मैंने ये जरुर बोलता था जिससे मुझे उनसे बात करने को मिल जाए
“प्रीतम बेटे!! कैसे हो?? और सब ठीक है??” लुबना आंटी पूछती
जब जब मैं आंटी को बिना दुपट्टे के देखता मेरा दिल मचल जाता। अंकल कितने किस्मत वाले है जो इतनी मस्त मालदाल, खूबसूरत औरत मिली है। अंकल तो लुबना आंटी की चूत रोज रात में बजाते होंगे। ये सब बाते जब जब मैं सोचता था मेरी नियत खराब हो जाती थी। काश!! मुझे आंटी की चूत चोदने को मिल जाए तो समझो की जिन्दगी सफल। मैं यही सोचता था। फिर अगले महीने एक हादसा हो गया। लुबना आंटी के पति को अचानक जोर का करंट मार दिया। वो बिजली का पंखा ठीक कर रहे थे। आप यह स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है। 

“कोई बचाओ मेरे पति को….कोई बचाओ!!” लुबना आंटी रोने लगी। मैं जल्दी से भागकर गया। अंकल को बाइक पर बिठाकर अस्पताल ले गया। पर 2 दिन बाद मेरी जवान खूबसूरत चुदासी लुबना आंटी विधवा हो गयी। अंकल चल बसे। उनका अंतिम संस्कार में मेरा पूरा परिवार गया। अब आंटी हमेशा रोती रहती। जब मैं उनके घर जाता तो मेरे सीने पर अपना सिर रख देती और फूट फुटकर रोने लग जाती। मेरा दिल पिछल जाता।
एक दिन रात के 10 बजे थे। गर्मी का दिन था। मैं लुबना आंटी के घर गया। उनका एक लड़का था जो अभी 5 साल का था। अपने कमरे में सो रहा था। फिर से आंटी ने मेरे कंधे पर सिर रख दिया और रोने लगी। मोटे मोटे आंसू बहाने लगी। अचानक मैंने उनको पकड़ लिया और बाहों में ले लिया। वो भी मुझसे चिपक गयी। मेरा लंड खड़ा हो गया। आज मुझे कैसे भी लुबना आंटी की चूत मारनी थी। मैंने उनके गाल, होठ, और आँखों पर मैं जल्दी जल्दी किस करने लगा। शायद आंटी भी चुदाने के मूड।
“प्रीतम बेटे ये क्या??” आंटी बोली
“आंटी आज से तुम मेरी औरत हो। रोज तुमको प्यार करूंगा। खूब चूत मारूंगा तुम्हारी। आज से कभी तुम अंकल को याद करके नही रोवोगी। वादा करो मुझसे” मैंने कहा
उसके बाद लुबना आंटी मुझसे पट गयी। वो भी मेरा साथ देने लगी। आज मेरा कितने दिनों का सपना पूरा होने जा रहा था। आंटी ने पीले रंग का सलवार कुरता पहना था। बिलकुल ताजे गुलाबी की कली लग रही थी। मैं उनको चोदने को मरा जा रहा था। धीरे धीरे उन्होंने मुझे बाहों में लपेट लिया। वो खुद ही बिस्तर पर लेट गयी। आप यह स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है। 

हम दोनों किस करने लगे। मैंने अपने लब लुबना आंटी के होठो पर रख दिए। जल्दी जल्दी मैं चूसने लगा। ये कहानी आप इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।
आंटी अपनी नाक से तेज तेज गर्म सासें छोड़ रही थी। वो गर्म हो रही थी। मैंने उसकी पीठ पर हाथ घुमा रहा था। उनको हर जगह सहला रहा था। धीरे धीरे वो भी मुझे हर जगह सहला रही थी। आंटी भी मुझे जल्दी जल्दी किस करने लगी। धीरे धीरे वो गरम होने लगे। मेरे होठो को वो चबा चबाकर चूस रही थी। उनकी सासों की महक मैं पी रहा था। तेज तेज साँसे आंटी ले रही थी। मैंने उसके उनकी सलवार उपर से उनकी चूत के उपर हाथ रख दिया और चूत को घिसने लगा। लुबना आंटी “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” करने लगी। मैं रुका नही और जल्दी जल्दी सलवार वाले कपड़े के उपर से चूत बार बार सहलाता रहा और घिसता रहा। आंटी सरेंडर हो गयी। मुझे सीने से लगा लिया। अब मैंने उनके कुर्ते के उपर से उनके 38” के गोल गोल दूध दबाना शुरू कर दिए। मेरे साथ गोल गोल आकार में आंटी के दूध का साइज पता कर रहे थे। सहला सहलाकर मैं दबा रहा था। जिन्दगी का असली मजा दोस्तों मुझे आज मिल रहा था। आंटी चुदासी हो गयी।
“प्रीतम बेटा!! क्या सिर्फ उपर उपर से ही दबाएगा। रुक जा मैं नंगी हो जाऊं” वो बोली और बैठ गयी। फिर लुबना आंटी ने अपनी सलवार कुर्ता उतार दिया। वो ब्रा और पेंटी में मस्त माल लग रही थी। वो अब विधवा रांड हो चुकी थी पर जवानी ऐसी थी की जैसे कोई कच्ची कली हो। जैसे अभी अभी उनकी शादी हुई हो। यही लग रहा था। मैंने भी अपना शर्ट पेंट उतार दिया। मेरा लंड फुफकार रहा था। आंटी ने खुद ही अपनी ब्रा और पेंटी उतार दी और लेट गयी। मुझे अपने उपर लिटा लिया। आप यह स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है। 
“प्रीतम बेटा!! आज मैं तुम्हारी औरत हूँ। आज जी भरकर चोद लो मुझे! इस तरह से मुझे चोदो जैसे मेरे पति मेरी चूत बजाते थे” वो बोली
मैंने प्यार की शुरुवात उनके 38” की भारी भारी चूचियों को सहलाने से कर दी। ओह्ह गोद!! हल्की सी लटकी हुई चूचियां थी पर थी बिलकुल सफ़ेद और गोरी। संगमर्मर की तरह चिकनी और सेक्सी चूचियां। दोस्तों मेरी नजर लुबना आंटी के मम्मो से नही हट रही थी। बार बार मैं ताड़ रहा था और हाथ से सहला रहा था। आज आंटी किसी गैर मर्द से चुदने जा रही थी। कमाल के खूबसूरत नशीले दूध थे उनके। मैं जब हाथ से सहलाने लगा आंटी “…….उई. .उई..उई…….माँ….ओह्ह्ह्ह माँ……अहह्ह्ह्हह…” करने लगी। मैं उनके उपर ही लेट गया और बायीं चूची को हाथ से पकड़कर मुंह में ले लिया और चूसने लगा। मैं आज बहुत खुश और संतुस्ट था। जिस औरत की चूत कबसे चोदना चाहता था आज वो काम होने जा रहा था। इस वक़्त मैं लुबना आंटी के चोकलेटी निपल्स और काले काले गोलों वाले मुलायम दूध को मुंह में लेकर चूस रहा था। मुझे बहुत मजा मिल रहा था। इतनी मस्त मस्त हसींन दूध को आजतक पीने को मैं नही मिला था। मैं दबा दबाकर पी रहा था।

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आंटी भी पूरा सहयोग कर रही थी। मस्ती से मुझे पिला रही थी। उनक एक चूची को मैं अच्छी तरह से चूस लिया। अब दूसरी वाली चूसने लगा। आंटी के दूध बेहद सेक्सी थे। निपल्स अब खड़ी होकर टनटना गयी थी। तन गयी थी। निपल्स के चारो तरह चोकलेट के रंग के गोल गोल छल्ले तो जैसे मेरी जान ही निकाल रहे थे। मैं सोच रहा था कहीं आंटी के दूध पीते पीते मैं मर जा जाउं। खून चूसा मैंने।
धीरे धीरे मैंने नीचे की तरफ बढ़ने लगा। लुबना आंटी का फिगर कमाल का था। 38 32 34 का फिगर था उनका। पर कहीं से भी मोती नहीं दिखती थी। अब मैं आंटी के गोरे और चिकने पेट को किस कर रहा था। भरपूर मजा मिल रहा था मुझे दोस्तों। धीरे धीरे मैं नाभि के ठीक उपर पहुच गया और उसने जीभ डालने लगा।
“प्रीतम बेटा!! ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….आराम से!” आंटी बोली. मैं कुछ देर तक नाभि में जीभ डालकर उनको गर्म कर रहा था। आंटी का जिस्म अब गर्म हो चुका था। वो चुदने को तैयार थी। उन्होंने खुद ही अपने पैर खोल दिए। मेरी नजर लुबना आंटी के भोसड़े पर पड़ी। कितना खूबसूरत जानलेवा भोसड़ा था उनका। बड़ी सी गुलाबी चूत के दर्शन मैं कर रहा था। एक भी झांट नही। पूरी तरह से साफ़ चूत।
“आंटी रोज तुम बाल बनाती हो क्या???” मैंने पूछा
“बेटा!! कई दिनों ने मुझे विश्वास था की तू आकर मेरी चूत चोदेगा इसलिए मैं रोज बना लेती थी। चोद बेटा!! आज तू मुझे अच्छे से चोद” आंटी बोली
मैं जल्दी जल्दी चूत चाटने लगा। मुझे बड़ी जोर की चुदास चढ़ गयी थी। मैं छप छप करके आंटी की बुर पी रहा था। सुड़क सुड़क के जीभ लगाकर चूस रहा था जैसे लोग चाय पीते है। उनकी हसींन चूत बेहद गर्म थी और उबाल मार रही थी। मैंने 15 मिनट चूत चाटी। लंड को सेट किया और हल्का सा प्यार भरा धक्का मारा। मेरा 7” का लंड अंदर प्रवेश कर गया। आप यह स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है। 

मैं अब जल्दी जल्दी  चोदने लगा। लुबना आंटी “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. ऊँ—ऊँ…ऊँ….” की सेक्सी आवाजे निकाल रही थी। मैं जल्दी जल्दी ताकत लगाकर आज उनको चोद रहा था। मैं नही चाहता था की कल को वो शिकायत करे की मैं उनको ठीक से चोद नही पाया। इसलिए मैं तेज तेज धक्के चूत की गुफा में दे रहा था। मैं सिर्फ लुबना आंटी की चुर की ओर ही देख रहा था। मेरा लंड सट सट अंदर जा आ रहा था। आंटी पूरा सहयोग कर रही थी। मैंने मेहनत से उनको पेल रहा था। उनकी चूत अब अपना रस छोड़ रही थी। मेरा लंड अब और अधिक चिकनाहट पा रहा था क्यूंकि लुबना आंटी की चूत अपना मक्खन बीच बीच में छोड़ देती थी।
इस तरह से हम दोनों खूब मजे रे रहे थे। विधवा आंटी को मैं चोद रहा था। उनको सुहाग का सुख दे रहा था। 15 मिनट बाद तो आंटी ने मुझे बाहों में भर लिया। “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..पेल बेटा और पेल” लुबना आंटी बोली . हम लोग मस्ती से सम्भोग के मजे लेते रहे। आंटी के होठो को मैं किस करता और नीचे से लंड से चुदाई करता। जिस तरह से मन होता उनके मम्मो को दबा देता। खूब मनोरंजन हुआ उस दिन। अंत में 30 मिनट बाद मैं विधवा आंटी की चूत में झड़ गया। उन्होंने मुझे कलेजे से लगा लिया और किस करने लगी। कुछ देर बाद हम दोनों का मौसम फिर से बन गया। मैंने आंटी को कुतिया बना दिया और उनकी गांड तेल लगाकर मारी..DMCA.com Protection Status

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